बस्ती / ब्यूरो रिपोर्ट( एजाज अहमद )
भोजपुरी फिल्म जिंदगी के संघर्ष शुरू हुई शूटिंग लेखक एवं निर्देशक जितेंद्र गुप्ता
भोजपुरी फिल्म का सारांश व कहानी एक मजदूर रिक्शा चालक अपने परिवार का भरण पोषण रिक्शा चलाकर करता है तीन बेटे पत्नी एक टूटे-फूटे झोपड़ी में रहतें हैं। बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं उनको दोपहर का भोजन स्कूल में ही मिल जाता है किसी तरह से परिवार चलता है एक रामदास अपने परिवार के साथ बाजार जाता है रास्ते में एक बहुत बड़ा प्राइवेट स्कूल पड़ता है वही रिक्शे का चैन उतर जाता है बच्चे रिक्शे से उतरकर स्कूल के गेट पर चले जाते हैं बच्चे आसपास में बात करते हैं की हमनी के बाबूजी के पास पैसा होता तय हम नियोके यही उस स्कूल में पढ़ल जात लेकिन बाबू जी के पास पैसा नहीं कि यह सारी बात रामदास सुनता है रामदास रात में सोया रहता है उसे बार-बार बच्चों की बातें याद आती है रामदास ठान लेता है कि बच्चों को उसी स्कूल में पढ़ाएंगे और सुबह स्कूल में जाते हैं प्रधानाध्यापक से बात करते हैं और उनका पैर पकड़कर बहुत गिड़गिड़ाते हैं । प्रधानाध्यापक मान जाते हैं और 2 महीने का समय देते हैं रामदास काफी खुश होते हैं वह आकर अपनी पत्नी किरण से सारी बात बताते हैं किरण और रामदास दिन रात मेहनत करके किरण दूसरे के घर जाकर झाड़ू पोछा करके और रामदास रात दिन रिक्शा चला कर पैसे इकट्ठा करके तीनों बच्चों का नाम उसी स्कूल में लिखवा देते हैं बच्चे भी खूब मेहनत से पढ़ाई करने लगते हैं लेकिन लाइट ना रहने के कारण से पढ़ने में बहुत दिक्कत होती है तभी स्कूल में यूपी सरकार की योजनाओं के तहत सभी बच्चों को पढ़ने के लिए सौर ऊर्जा लाइट सारे बच्चों को देती है जिससे बच्चों को पढ़ने में आसानी होती है एक दिन रामदास रात रिक्शा लेकर घर वापस आ रहे थे तभी एक साहूकार अपनी गाड़ी से उतरते हैं कपड़े में लपेटकर 1 बच्चों को कूड़े में तोप कर चले जाते हैं। रामदास जाकर देखते हैं की एक बच्ची छोटी सी बच्ची रोती रहती है रामदास को दया आ जाता है वह उस बच्ची को घर ले आते हैं रामदास अपनी पत्नी किरण को सारी बात बताता है और इस इस बच्ची को यह लोग पालने लगते हैं उसका नाम परी रखते हैं परी का भी नाम उसी स्कूल में लिखा देते हैं बच्चे पढ़ने में काफी तेज रहते हैं हैं बड़े होकर टाप करते हैं और पढ़ने में बाहर चले जाते हैं और परी आईपीएस की तैयारी करने के लिए बाहर निकल जाती हैं।


इस भोजपुरी फिल्म की कहानी लगभग आगे ऐसे ही चलती है साहूकार को और उनकी पत्नी और परी से माफी मांगते हैं जिससे बेटे के चक्कर में बेटी को खोया था वही बेटा मुझे बर्बाद कर दिया मुझे पता चला कि बेटी घर की लक्ष्मी के साथ-साथ मां-बाप का भाग्य भी होती है सब लोग माफी मांगते हैं रामदास सबको माफ कर देते हैं और एक साथ रहने लगते हैं फिल्म काफी कहानियों से भरी हुई है शूटिंग पूरी होने पर इसे रिलीज होने के बाद लोग इसको देख सकते हैं वही कलाकारों की बात की जाए तो कलाकार जो है निम्न वत है…
भोजपुरी फिल्म जिंदगी के संघर्ष शुरू हुई शूटिंग लेखक एवं निर्माता अब्दुल मुक्ति शेख
देवेंद्र कुमार
आर.डी. बाबा
निर्देशक जितेंद्र गुप्ता ( जीतू )
मुख्य कलाकार
1: राकेश मिश्रा
2: आकांक्षा दूबे
3: देवेंद्र कुमार – बी.एम. राय
4: मनोज सिंह ( टाइगर )
5: कृष्ण कुमार
6: नीलम पांण्डेय – विजय लाल
7: मुश्ताक अहमद
8: पुष्पांजलि पाण्डेय
9: राजेश सोनी, गरिमा राज, अनामिका तिवारी, प्रियंका, पीयूष श्रीवास्तव, प्रदीप मिश्रा विजय लाल, आदि कलाकारों के द्वारा फिल्म होगी रिलीज!!!