बस्ती यूपी।।
रंग लाया समाजसेवी सुदामा का भागीरथी प्रयास शुरु हुआ ठोकर निर्माण

समाजसेवी चन्द्रमणि पाण्डेय के 5वर्षों के भागीरथी प्रयास का ग्रामीण कर रहे हैं गुणगान

करीब चार दशक पूर्व में घाघरा के बाढ व कटान से बचाव हेतु निर्मित विक्रमजोत धुंसवा बांध से वंचित सैकड़ों गांव जिनमें से करीब एक दर्जन गांव को इस दौरान घाघरा ने अपनी गोद में समाहित कर लिया और बाढ के दौरान निरन्तर बाघानाला, गौरियानयन, भरथापुर,कल्याणपुर, संदलपुर को निरन्तर कटान करते हुए आपने आगोश में लेने को आतुर दिखती रही जिससे क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांव के लोग भय में जीने को मजबूर रहते थे अब न केवल उनका भय समाप्त होता दिखता है अपितु घाघरा में समाहित उनकी जमीन पुनः मिलने की सम्भावना प्रबल हो गई है कारण न केवल विकास खण्ड दुबौलिया की भांति इस क्षेत्र में भी नदी की धारा सीधी करने हेतु जिले की सीमा पर स्थापित सरयु पुल के पास ड्रेजिंग जनवरी माह से ही शुरू हो चुका है अपितु इन गांवों में पूर्व से निर्मित ठोकरों को पुनर्जीवित करने के साथ साथ नये ठोकरों के भी निर्माण का काम 23नवम्बर 2019को विग्यप्ति प्रकाशित कराते हुए दिसम्बर जनवरी माह में गांवों में कैम्प कराते हुए जनता की समस्या सुनने के साथ साथ उनका सुझाव भी लेते हुए इस बीच कार्य शुरू हो गया है जिसकी मांग समय समय अनेक संगठनो जनप्रतिनिधियों व समाजसेवी द्वारा होती रही अब जहां इन ठोकरों के निर्माण से इस क्षेत्र के निवासियों के हौसले मजबूत हुए है उनके अन्दर गांव छोडने का भी भय समाप्त हो चुका है इतना ही नहीं ड्रेजिंग कार्य से तटबंध विहीन गांव के साथ साथ बी.डी.बांध के किनारे बसे लोगों का भी हजारो एकड जमीन पुनः वापस मिलता दिख रहा है शासन द्वारा कराये जा रहे इस कार्य का श्रेय ग्रामीण समाजसेवी चन्द्रमणि पाण्डेय सुदामाजी को देते हैं जिन्होनें 2014-15से लगातार इसके लिए भागीरथी प्रयास किया ग्रामीणों की माने तो अधिकारी जनप्रतिनिधि आपदा राहत व विस्थापन की बात करते थे किन्तु ड्रेजिंग व ठोकर के जरिये विस्थापन की जगह गांवों को सुरक्षित करने की बात सुदामाजी ने ही पुरूजोर ढंग से उठाते हुए भूख प्यास व प्राणों का मोह किये बिना शासन प्रसासन यहां तक कि मंत्री,मुख्यमंत्री से लगातार 5वर्ष लडते रहे ग्यात हो कि सैकड़ों धरना प्रदर्शन व ग्यापन के क्रम में दर्जनों बार लिखित मौखिक समझौता कर प्रसासन अपनी बात से मुकरता रहा किन्तु अपना जान जोखिम में डाल श्री पाण्डेय ने बार बार प्रसासन को घुटने टेकने को मजबूर किया जिसमें घाघर की बीच धारा में अवशेष बची पुलिया पर 23जुलाई 2017को धरना देते हुए जलसमाधि की धमकी जिसके फलस्वरूप 24जुलाई को आनन फानन में पचवस सूबे के मुख्यमंत्री का आगमन हुआ,12जुलाई 2018को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत घाघरा में छलांग भी लगा दिया करीब 6बार सूबे के मुख्यमंत्री के जनपद आगमन पर श्री पाण्डेय नजरबंद भी व हुए दस दस दिन भूखहडताल पर रहे कई बार उपजिधिकारी व जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव भी किया जिसमें 20जुलाई 2018का पोलखोल हल्लाबोल,5अगस्त 2018 को संसद आवास का घेराव 8अगस्त2018को चूडी भेंट,20अगस्त2018को हजारों समर्थकों संग थाली बजाकर भोजनहडताल व कई दिनों तक घाघरा की धारा में खडे रहकर जलसत्याग्रह को न केवल लोग आज भी याद करते हैं अपितु वर्ष 2018 में उनके द्वारा घाघरा में कूद जाने व 6नवम्बर को उन्हें नजरबंद किये जाने से आक्रोशित समर्थकों द्वारा योगी जी की सभा में जमकर किये गये बवाल से प्रसासन उनके हर कदम से चौकन्ना रहता है।क्षेत्र में चल रहे इस कार्य से उत्साहित ग्रमीण लाकडाउन उपरांत समाजसेवी के भव्य स्वागत की भी तैयारी में हैं ।।
रिपोर्ट::राहिल खान
बस्ती यूपी।।