सफाईकर्मियों को प्रशस्ति पत्र, कम्बल एवं मास्क देकर आल इंडिया मानवाधिकार संगठन ने किया सम्मानित
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
विश्व मानवाधिकार दिवस के अवसर पर आल इंडिया मानवाधिकार संगठन द्वारा चेतना तिराहा, गोलघर, गोरखपुर पर मानवाधिकारों की जन जागरुकता हेतु विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
उक्त कार्यक्रम में शहर के सम्मानित सफाईकर्मियों को कोरोना वारियर्स के रूप में प्रशस्ति पत्र, कम्बल एवं मास्क देकर सम्मानित किया गया। सफाई कर्मी विगत कई महीनों से कोरोना वैश्विक महामारी के दौरान अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए अपने अपने वार्ड में सफाई कार्य को बखूबी अंजाम देते आ रहे हैं। उसी क्रम में शहर के सभी वार्डों से संगठन द्वारा चिन्हित कर उन्हें सम्मानित करने का गौरव प्राप्त हो रहा है, चूंकि शहर के सभी सफाई कर्मी सम्मान के हकदार हैं लेकिन शासन द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन करते हुए सिर्फ 75 सफाईकर्मियों को आल इंडिया मानवाधिकार संगठन द्वारा सम्मानित किया गया। साथ ही साथ कार्यक्रम के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग एवं शासन द्वारा जारी गाइडलाइन का विशेष रूप से पालन किया गया। इसी क्रम में बिना मास्क के दो पहिया वाहन एवं चार पहिया वाहन से चलने वालों को को मास्क देकर कोविड-19 के दिशानिर्देशों को समझाते हुए उन्हें जागरूक भी किया गया।
मुख्य रूप से उपस्थित संगठन के महासचिव पन्नेलाल यादव ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों में अभिवृद्धि का भविष्य बहुत उज्जवल नहीं दिखाई पड़ता। ऐसा उस समय तक रहने के लिए सम्भव है, जब तक विकासशील देशों के प्रति विकसित देशों की प्रवृति में परिवर्तन नहीं होता। वास्तव में, मानवाधिकार के सम्बन्ध में कागजी कार्रवाई बहुत ही अधिक की गयी है। विभिन्न बैठकें, सम्मेलन तथा सेमिनार आयोजित किये गये हैं, जहां वक्ता मानवाधिकार के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते रहे हैं किन्तु वास्तव में स्थिति पूर्णतया भिन्न हैं। लाखों लोग अत्याधिक बिगाड़ी हुई आर्थिक तथा सामाजिक स्थिति के कारण जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं से अब भी वंचित हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संगठन के प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश बी. एन. शर्मा ने कहा कि मानवाधिकार जो एक मानव के पूर्ण विकास के लिए आवश्यकता है। संक्षेप में वे अधिकार जो मानव को भय व भूख से मुक्ति मुक्ति दिलाने के लिए संरक्षित हैं। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर जनकल्याणकारी कार्यो की दिशा में प्रभावी पहल करते हुए मानवाधिकारों के रक्षार्थ मानवाधिकारों का शिलान्यास करने वाली महामानव रूजवेल्ट की जितनी भी सराहना की जाय कम ही होगी। परन्तु दुर्भाग्य के साथ यह कहना पड़ रहा है कि मानवाधिकार पक्षकार राज्यों ने मानवाधिकार की सार्वभौमिक घोषणाओं के अनुपालन हेतु आयोगों एवं न्यायालयों के गठन दर्शाते हुए उसे आदेशात्मक अधिकारों से वंचित करते हुए कूट रचित षड्यंत्र के तहत मानवाधिकारों से जन सामान्य को व्यवाहारिक रूप से वंचित कर रखा है जिसके परिणामस्वरूप पूरे विश्व की आबादी की आधी से अधिक आबादी नित्य मानवाधिकार हनन की घटनाओं का शिकार हो रही है।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए संगठन के जिला अध्यक्ष मो. रजि ने कहा कि मानवाधिकार वह मौलिक एंव संक्राम्य अधिकार है जो मनुष्य जीवन के लिए आवश्यक आवश्यक है। मानवाधिकार और मौलिक स्वतंत्रताएं हमें अपने गुणों, ज्ञान, प्रतिभा तथा अन्त:विवेक का विकास करने में सहायक होता है जिसमें हम अपनी भौतिक, आध्यात्मिक तथा अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति एंव संतुष्टि कर सके। इस प्रकार मानवाधिकार वह अधिकार है जो हमारी प्रकृति में अन्तर्निहित हैं तथा जिनके बिना हम मनुष्य की भांति जीवित नहीं रह सकते। मानवाधिकारों को मूल या नैसर्गिक अधिकार भी कहते हैं क्योंकि इसे किसी विधायी शक्ति या सरकार द्वारा छिना नहीं जा सकता है।
उक्त कार्यक्रम में संगठन के उत्तर प्रदेश प्रवक्ता शिवेन्द्र पाण्डेय, एस के हुसैन, वरिष्ठ विधिक सलाहकार अरूण ब्रह्मचारी, जिला उपाध्यक्ष मो. खालिद, शमशेर जमा खान, जिला मंत्री ज्या फरमान, जिला कोषाध्यक्ष मो. अफजाल, जिला मीडिया प्रभारी अली मिर्जा, प्रखर अग्रवाल, शहाब अहमद, महानगर अध्यक्ष राजेश पाण्डेय, महानगर उपाध्यक्ष जोगेन्द्र साहनी, महानगर मंत्री इमरान खान, महानगर संगठन मंत्री रियाजुद्दीन, मुरली गुप्ता, सचिन निषाद, सुशील कश्यप, सुनील श्रीवास्तव, अनिल पाण्डेय, अनिल जायसवाल, मनोज गुप्ता, संजय अग्रवाल, मुहम्मद क्यामुद्दीन, पिन्टू कश्यप सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहें।