अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है रंगमंच – रूप कुमार बनर्जी!
गोरखपुर व्यूरों :- विश्व रंगमंच दिवस या अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच दिवस हर साल 27 मार्च को मनाया जाता है l यह दिन उन लोगों के लिए एक उत्सव है जो “थिएटर” के मूल्य और महत्व को देखते हैं और सरकारों, राजनेताओं और संस्थानों को जगाने का कार्य करते हैं l इस दिन को मनाने का उद्देश्य दुनिया भर में रंगमंच को बढ़ावा देने और लोगों को रंगमंच के सभी रूपों के मूल्यों से अवगत कराना है l
1962 में पहला अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच संदेश फ्रांस की जीन काक्टे ने दिया था! वर्ष 2002 में यह संदेश भारत के प्रसिद्ध रंगकर्मी गिरीश कर्नाड द्वारा दिया गया था!
भारत में रंगमंच का इतिहास :-
भारत में रंगमंच का इतिहास बहुत पुराना है l ऐसा समझा जाता है कि नाट्यकला का विकास सर्वप्रथम भारत में ही हुआ l कहा जाता है कि नाट्यकला का आदि श्रोत शिव हैँ l ऋग्वेद के सूत्रों में यम और यमी, पुरुरवा और उर्वशी आदि के कुछ संवाद हैं जिनमे लोग नाटक के विकास का चिह्न पाते हैं l कहा जाता है कि इन्हीं संवादों से प्रेरणा ग्रहण कर लोगों ने नाटक की रचना की और नाट्यकला का विकास हुआ.l उसी समय भरतमुनि ने उसे शास्त्रीय रूप दिया l भारत मे जब रंगमंच की बात होती है तो ऐसा माना जाता है कि छत्तीसगढ़ में स्थित रामगढ़ के पहाड़ पर महाकवि कालीदास जी द्वारा निर्मित एक प्राचीनतम नाट्यशाला मौजूद है l कहा जाता है कि महाकवि कालिदास ने यहीं मेघदूत की रचना की थी l इस आधार पर यह भी कहा जाता है कि अम्बिकापुर जिले के रामगढ़ पहाड़ पर स्तिथ महाकवि कालिदास जी द्वारा निर्मित नाट्यशाला भारत का सबसे पहला नाट्यशाला है l
हमारे गोरखपुर में रंगमंच का इतिहास बहुत ही पुराना है जहां तक याद है मुझे जब मैं 7 या 8 साल का था, दुर्गा बाड़ी में मैंने अपने बाबा जी स डॉ हेमंत कुमार बनर्जी , श्री संतोष कुमार बनर्जी, स्व• श्रीमती गिरीश रस्तोगी जी, स्व• असित सेन दादू, श्री तमाल आचार्य काकू, श्री विजय कृष्ण डे दादा, श्री अजय चटर्जी काकू, रमा बटोब्याल काकू, खुदीराम बटोबयाल काकू, और बहुत सारे दादू, काकुओं , काकियों को दुर्गा पूजन एवम् अन्य अवसरों पर नाटक करते देखा l उसी समय से मेरा नाटक के प्रति इतना लगाव हो गया कि उसको शब्दों में बयान करना बहुत ही मुश्किल है l वे इतना जीवंत नाटक करते थे कि जो भी चरित्र वह दर्शाना चाहते थे वह बिल्कुल जीवंत हो उठता था l
आजकल बहुत सारे गुणी नाटककर्मी है जैसे रंगाश्रम के श्री के° सी• सेन दादा, श्री मुमताज़ भैया, अभियान थिएटर ग्रुप के संचालक श्री श्री नारायण पांडेय भाई, रविन्द्र रंगधर भाई, मेरी सहपाठिनी एवम् मित्र डा• अमृता सरकारी जयापुरियार, अशोक महर्षि भाई, रंगमंडल के श्री अजीत प्रताप सिंह ,’ मासूम ‘ भाई, श्री मृत्युंजय शंकर सिंह भाई ,कल्याण सेन, सुश्री सीमा सिकदर, आनंद मुखर्जी, पार्थी चटर्जी, देव प्रकाश”बाप्पा” बनर्जी और बहुत सारे नाट्यकर्मी जिनका नाम लेना तो थोड़ा मुश्किल है, सभी नाट्यकला के क्षेत्र में समर्पित भाव से गोरखपुर और पूरे भारवर्ष में अपना पूरा योगदान दे रहे हैं l
आज विश्व रंगमंच दिवस के शुभ अवसर पर मैं सभी रंगमंच के कलाकारों को जो परदे के सामने और परदे के पीछे रहते हैं ,उनको मैं प्रणाम करता हूं और ह्रदय से अनंत शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं तथा आशा करता हूँ कि रंगमंच के द्वारा आप सभी समाजसेवा की ज्योति अनंत काल तक जलाये रखेंगे l