जब यहीं हैं सारी सुविधाएं, तो मेडिकल कालेज क्यों जाएं
– जेई/ एईएस के इलाज की सभी सुविधाएं हैं जिले में मौजूद
– 2 मिनी पीआईसीयू व एक पीआईसीयू हैं वेण्टीलेटर से लैस
संतकबीरनगर। 14 जुलाई 2019

जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) के साथ ही एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस यानी विभिन्न प्रकार के गंभीर ज्वर रोग) से बचाव की सारी सुविधाएं जिले में ही मौजूद हैं। लेकिन जेई/ एईएस की संभावना मात्र दिखने पर तुरन्त स्पेशल इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कालेज गोरखपुर की दौड़ लगाना शुरु कर देते हैं। इससे न सिर्फ मरीज के इलाज में देरी होती है, बल्कि मेडिकल कालेज में बढ़ती भीड़ के चलते दुर्व्यवस्था भी होती है। मेडिकल कालेज में जो सुविधाएं मौजूद हैं, वही सुविधाएं जिले में तहसील स्तर के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के साथ ही संयुक्त जिला चिकित्सालय में भी मौजूद हैं।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ हरगोविन्द सिंह बताते हैं कि अगर किसी को भी तीव्र ज्वर हो तो वह तुरन्त ही 102 या 108 एम्बुलेन्स बिना किसी देरी के बुला ले। एम्बुलेन्स के प्रशिक्षित कर्मचारी उसके ज्वर की स्थिति का आकलन करते हुए तुरन्त ही उसे नजदीकी प्राथमिक या सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर ले जाएंगे। अगर कोई जरुरत पड़ी तो वे उसे संयुक्त जिला चिकित्सालय पर लाएंगे। जिले में छ: इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेण्ट सेण्टर आवश्यक सुविधाओं और प्रशिक्षित स्टाफ से लैस हैं। आवश्यकता पड़ने पर वहीं पर जांच भी हो जाएगी। अगर स्थिति थोड़ी गंभीर है तो उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र हैसर बाजार या मेंहदावल में स्थित पीआईसीयू में ले जाएंगे। इन दोनों स्थानों पर वही सुविधाएं हैं जो मेडिकल कालेज गोरखपुर में हैं। यही से मरीज की प्रोफाइल जांच सेण्टीनल लैब भेज दी जाएगी तथा प्रशिक्षित स्टाफ और चिकित्सकों के कुशल निर्देशन में उनका बेहतर इलाज हो जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें संयुक्त जिला चिकित्सालय में स्थित 10 बेड के पीआईसीयू में भी भर्ती कर लिया जाएगा। जहां वे पूरी तरह से स्वस्थ हो जाएंगे। भारी संख्या में मरीज हमारे इन्हीं सेण्टरों से पूरी तरह से स्वस्थ होकर गए हैं।
ग्लूकोमीटर और आक्सीजन से लैस हैं 6ईटीसी
जिले में कुल 6 ईटीसी सेमरियांवा, बघौली, सांथा,नाथनगर, शनिचरा बाजार व खलीलाबाद में हैं। हर ईटीसी में 4 स्टाफ नर्स, प्राथमिक उपचार की सुविधा, आक्सीजन सिलिण्डर, ग्लूकोमीटर,आक्सीमीटर आदि मौजूद हैं। साथ ही यहां पर जेई व एईएस से सम्बन्धित दवा एजीथ्रोमाइसिन,डाक्सीसाइक्लीन जैसी दवाएं भी मौजूद हैं।
जेई सेण्टीनल लैब में एईएस प्रोफाइल जांच
जिला मुख्यालय पर एक जेई सेण्टीनल लैब स्थित है, जहां पर जेई और एईएस से सम्बन्धित हर प्रोफाइल की जांच होती है। इस लैब में एईएस प्रोफाइल की बीमारियों डेंगू,चिकनगुनिया के साथ ही अन्य बीमारियों की। यही नहीं अन्य सम्बन्धित बीमारियों की भी जांच हो जाती है। जबकि मलेरिया व टाइफाइड जैसी जांच ईटीसी सेण्टरों पर ही हो जाती है।
जेई / एईएस के यह हैं लक्षण
बहुत तीव्र ज्वर हो जाए और न उतरे
बुखार के दौरान मरीज को बेहोशी आए
बुखार के दौरान मरीज झटके लेने लगे
ज्वर बार बार चढ़ता और उतरता रहे
घर पर क्या करें प्राथमिक उपचार
जिले के इपीडेमियोलाजिस्ट डॉ मुबारक अली बताते हैं कि अगर किसी भी बच्चे या बड़े को किसी तरह का तेज बुखार हो जाए तो उसके सिर पर ठण्डे पानी की पट्टी लगाएं । सर की पट्टियां लगातार बदलते रहें। मरीज को ओआरएस का घोल पिलाते रहें, साथ ही नजदीकी स्वास्थ्य उपकेन्द्र या प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र से जाकर बुखार उतरने की दवा ले लें। ताकि मरीज को त्वरित उपचार मिल सके। इसके बाद भी अगर बुखार न उतरे तो एम्बुलेन्स सेवा के जरिए तुरन्त नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र को जाएं। एम्बुलेंस के प्रशिक्षित स्टाफ उनकी आवश्यकतानुसार रोगी को प्राथमिक उपचार देते हुए नजदीकी केन्द्र तक ले जाएंगे।