तबादला एक्सप्रेस विकास भवन,अंगद की तरह पांव जमाये बैठा हुआ है बाबू कब होगा इसका तबादला , पैसे का खेल तबादला की रेल,
संतकबीरनगर 27 जुलाई 2025 ,,अंधेर नगरी, चौपट राजा” यह लाइन संतकबीरनगर जिले के विकास भवन के कारनामे पर सटीक बैठती दिख रही है। उर्दू अनुवादक के पद पर नियुक्त बाबू अशफाक का कारनामा जग जाहिर होते दिख रही है बसपा शासन काल में विधायक मोहम्मद ताबिश खान द्वारा गलत गतिविधियों में सहयोग के शिकायत पर हटवाया गया था जैसे ही सपा की वापसी सत्ता में हुई दोबारा इसको वापस बुलाया गया तब से लेकर अब तक अंगद की तरह पांव जमाए जनपद के विकास भवन में नाजीर के पद पर कुंडली मार कर बैठा हुआ है डीआरडीए तीनों विधानसभा की विधायक निधि सोशल ऑडिट एवं मनरेगा योजना का चार्ज लिए हुए पांच पटलों का कार्य देख रहा है कभी भी अपनी कुर्सी पर बैठकर कार्य नहीं करते देखा गया है, अपितू टहल बाजी में इनका समय तथा ब्लॉक स्तरीय अधिकारी व कर्मचारी के बीच तालमेल बैठाते नजरआते रहते हैं ,उनसे अधिकारियों के नाम पर सुविधा शुल्क एकत्रित किया जाता है जिस कार्य में इनका एक सहयोगी चेला भी है जो विकास भवन में चपरासी के पद पर 15 सालों से जमा हुआ है प्रमोशन होने के बाद भी उसको वही विकास भवन में हमेशा अटैच
रहता है मेहरबानी बाबू उर्दू अनुवादक अशफाक अहमद के, उक्त बातें सटीक बैठती तब देखते हैं जो अभी हाल ही में तबादाला का दौर शुरू हुआ उसमें उनके एक सजातीय मिराज उल हक को तो ब्लॉक पौली और हैसर का चार्ज दिया गया जबकि वहीं तेज तरार ऋषि सिंह को जिले से अटैच कर दिया गया मनरेगा में सभी ट्रांसफर पोस्टिंग में वही होता है जो बाबू द्वारा कराया जाता क्योंकि इनके फितरत में है कि अधिकारियों को गुमराह करते हुए पटल पर बने रहकर माननीय जनप्रतिनिधियों का बजट लेकर हेरा फेरी करवाने में अहम भूमिका अदा करता है क्या इनके ऊपर तबादला नीति लागू नहीं होती जो 3 साल के बाद पटल चेंज कर दिए जाते हैं यदि सवाल उठते हैं तो उन्हें वही दवा दिया जाता है उक्त उर्दू अनुवादक/नाजीर का दबदबा अपने रसूक के बल पर अंगद की तरह पांव जमाए हुए बैठा है जिनके ऊपर तबादला नीति एक्सप्रेस नहीं लागू हो सकती क्योंकि अधिकारियों के बीच दुरभ तालमेल दिखाई पड़ता है, जो तबादला नीति को दर् किनार करते हुए अधिकारियों के रहमो करम पर विगत 12 /13 सालों से विकास भवन के आधा दर्जन से अधिक मलाई दार पदों पर बाबू या नाजीर के पद पर पांव जमाए हुए बैठा है देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन तबादला नीति का अनुसरण करते हुए उक्त उर्दू अनुवादक बाबू का ट्रांसफर कहीं अन्यत्र किया जाता है या तबादला नीति को दरकिनार करते हुए उसे अपने स्थान पर बने रहने दिया जाता है, यह बात ठीक ही किसी ने कहा है कि,,साहब मेहरबान तो बाबू भी पहलवान,
के के मिश्रा जर्नलिस्ट