- डीएम के अनुमोदन से हुआ सचिवों, एपीओ मनरेगा, ब्लॉक टीए और तकनीकी सहायकों का स्थानांतरण
- आखिर डीएम के बजाय सीडीओ के अनुमोदन के बाद क्यों जारी हुआ एडीओ पंचायत नाथनगर के स्थानांतरण का आदेश
संतकबीरनगर 25 जुलाई 2025
मनरेगा के जिला समन्वयक/ जिलाधिकारी के कंट्रोल से बाहर निकलती दिख रही है जिले की मनरेगा सेल। मनरेगा में व्याप्त भ्रष्टाचार को खत्म करने के संकल्प को धरातल पर उतारने में जुटे जिलाधिकारी को कहीं न कहीं उनके अधीनस्थ विकास भवन के जिम्मेदार ही तो गुमराह नही कर रहे हैं? विकास भवन की करतूतों को देख आज गांवों की आवाम भी साहबों के क्रियाकलापों पर सवाल खड़ी करती नजर आ रही है। सूत्रों की माने तो ग्राम पंचायत में होने वाले सोशल ऑडिट में टीम के साथ-साथ बड़े सामान लोगों का भी हक दस्तूर ग्राम प्रधानों को पहुंचाना पड़ता है,
मनरेगा के जिला समन्वयक पदेन जिलाधिकारी होते हैं। जबकि जिले की मनरेगा सेल कलेक्ट्रेट की बजाय विकास भवन से संचालित हो रही है। ऐसे में जिला मनरेगा सेल पर जिलाधिकारी के बजाय सीडीओ का प्रभुत्व कायम रहता है। विकास भवन के आला अधिकारी की कथित रूप से प्रदर्शित कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी और विकासोन्मुखी सोच के भरोसे जिलाधिकारी ने मनरेगा को साहब के हवाले कर दिया। मनरेगा में लूट खसोट की सूचना जब डीएम तक पहुंची तो उन्होंने विकास भवन के जिम्मेदारों के पेंच कसने शुरू कर दिए। डीएम की मंशा को भांप विकास भवन के साहब भी मीडिया में तेज हो गए। सूत्रों का दावा है कि कथित बड़े साहब के ईमानदारी की बानगी तो उनके द्वारा ही किए गए औचक निरीक्षण के दौरान एक चर्चित ब्लॉक में देखने को मिली थी। वित्तीय वर्ष के शुरुआती दिनों में ही रसूखदार साहब के निरीक्षण में सरपट दौड़ रहे मस्टररोल के सापेक्ष कार्य स्थलों पर न तो मजदूर मिले और न तो काम ही दिखा था। दिखावटी हाय तौबा मचा कर साहब ने क्यों क्यों चुप्पी साध लिया उसका जवाब आज भी आवाम खोज रही है। मजे की बात यह है कि जिले के मनरेगा संचालक आज तक उक्त चर्चित ब्लॉक में संचालित मनरेगा की धरातल पर कभी मॉनिटरिंग किया ही नहीं। सूत्रों का दावा है कि ब्लॉक के मुखिया से कथित रूप से हुई बड़ी डील के चलते लाख शिकायतों के बाद भी साहब वहा कदम रखने को भी तैयार नहीं हैं। नजराना चाहे 10 प्रतिशत का हो या फिर पूरी परियोजना घोंटने की शिकायत हो। साहब तो सिर्फ जमीनी जिम्मेदारों को रगड़ने की फिराक में लगे रहते हैं। भले ही उनके विद्वता की हर चार्जशीट हाईकोर्ट में औंधे मुंह धराशाई हो जाती हो। नए डीएम को जब जिले की मनरेगा के सड़ांध की बू महसूस हुई तो उन्होंने पेंच कसने की तैयारी शुरू किया। साहब जी मंशा भांप विकास भवन के ईमानदार साहब ने कमान अपने हाथ में ले लिया। पहले तो ब्लॉक मुख्यालयों पर मुंहमांगा नजराना वसूलने में बीडीओ लोगों की राह में रोड़ा बनने वाले ग्राम विकास अधिकारियों का जबरिया नियमों को ताक पर रख 30 प्रतिशत से अधिक का ट्रांसफर कर दिया गया और बाद में सब कुछ बदलने की नियत दिखाने के लिए सभी एपीओ, तकनीकी सहायकों और ब्लॉक टीए लोगों को भी फेंट दिया गया। नजरिया साफ है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले छोटे कर्मियों (सचिव, टीए, एपीओ और ब्लॉक टीए) के सर ही मनरेगा में व्याप्त भ्रष्टाचार ठीकरा फोड़ना था। उन्हें फेंट कर सब कुछ सही कल लिए जाने का जिलाधिकारी को संदेश देने की मंशा थी। अरे साहब आप ने तो अभी मुश्किल से सिर्फ मनरेगा के भ्रष्टाचार की झाड़ियां ही साफ किया है जब तक मनरेगा में परसेंटेज के साथ नजराना वसूलने वाले भ्रष्टाचार के पितामह बीडीओ और अकाउंटेंट की सूची को नहीं फेंटा गया तब तक यह बीमार सिस्टम दीमक की तरह शासन की महत्त्वाकांक्षी परियोजना को खोखला करता रहेगा।
के के मिश्रा जर्नलिस्ट