दादा मियाँ ने पूरी जिंदगी इस्लाम की सही तस्वीर पेश की : मौलाना मकसूद अशरफ़ी
संतकबीरनगर
रिपोर्ट : अतहरूल बारी

सेमरियावां।संतकबीरनगर बृहस्पतिवार की शाम विकास खण्ड सेमरियावां के गांव सालेहपुर में दादा मियां के छप्पनवां सालाना उर्स का शुभारम्भ हुआ। तीन दिन तक चलने वाले उर्स में बड़ी तादाद में जायरीन पहुंचे। बाद नमाज मगरिब उर्स की शुरुआत हुई। अकीदतमंदों ने मजार पर चादर और फूल चढ़ाये और फातेहा पढ़ी। रात में इशा की नमाज के बाद जलस-ए- आम हुआ जिसकी सरपरस्ती सैयद रफअत हुसेन ने की। इस मौके पर जामिया हनफिया बस्ती के
अल्लामा मौलाना मोहम्मद मकसूद अशरफ़ी ने खेताब किया है। मौलाना मोहम्मद मकसूद अशरफी ने अपने सम्बोधन में कहा कि दादा मियाँ ने अपनी पूरी जिंदगी को इस्लाम की सही तस्वीर पेश की है उन्होंने फिरकावारियत को छोड़कर हर धर्म व मज़हब के लोगो को बढ़कर गले लगाया है। उन्होंने कहा कि सैयद शाह मोहम्मद अशरफ शहीद उर्फ दादा मियां सोलहवीं शताब्दी के बुजुर्ग थे इस्लामिक शिक्षा के प्रसार के लिए वे अम्बेडकर नगर के किछौछा कस्बे से सालेहपुर आये थे वे पूरी जिन्दगी इस्लामिक शिक्षा के प्रसार के साथ ही लोगों में आपसी भाईचारा और सदभाव बढ़ाने का प्रयास करते थे। उन्होंने जीवनपर्यंत अल्लाह की मखलूक के लिये काम करते रहे। उन्होंने अपनी पूरी जिन्दगी अल्लाह के हुक्म व अल्लाह के रसूल की इताअत में गुजारी। यही वजह है कि आज भी उनके अकीदतमंद दुनिया के कोने कोने में फैले हुए हैं जो दीन की इशाअत व आपके पैगाम फैला रहे हैं। उन्होंने समाज के सभी वर्गों की भलाई के लिए काम करते रहे।
उन्होंने कहा कि औलिया अल्लाह के बरगजीदा बन्दे होते हैं जो अल्लाह के पैगाम को अल्लाह के बन्दों को रोशनाश कराते हैं। वह पूरी इंसानियत के लिये होते हैं। उनका मकसद इंसानियत की फलाह व बहबूद होता है।सैयद शाह मोहम्मद अशरफ शहीद उर्फ दादा मियां ने इन्हीं मकसद की तकमील के लिए जिन्दगी भर कोशां रहे। हमें उनकी तालीमात, उनके जीवन के उच्च आदर्शों को अपनाकर उस पर अमल करना चाहिए तभी हम कामयाबी की मंजिल हासिल कर सकते हैं। इससे पूर्व अल्लामा मौलाना सैयद मोईन अशरफ ने हालाते हाजरा पर तफसील से रोशनी डाली। कार्यक्रम का संचालन हाफिज व कारी मौलाना मतीउल हक ने किया। इस मौके पर सैयद फिरोज अशरफ, सैयद आमिर हुसेन, सैयद निजाम अशरफ, सैयद मु. हमजा अशरफ, सैयद तारिक हुसेन, तारिक सिद्दीकी, जमील अंसारी आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।