स्वच्छता पर रोना देख शौचालय अभियान फूट – फूटकर रोया
संतकबीरनगर
के के मिश्रा / हरीश सिंह

संतकबीरनगर :- केन्द्र सरकार व राज्य सरकार की बहुपयोगी योजना ” स्वच्छता अभियान ” जिसमे भारत मे खुलेआम शौच को लेकर सरकार गम्भीर होते हुए करोड़ो रुपये पानी की तरह बहाया , इतना ही नही भोर मे भी ग्राम पंचायत स्तर पर सफाईकर्मियो को लगाकर सीटी बजाओ , खुलेआम शौच मुक्त कराओ , घर – घर शौचालयो का निर्माण कराया गया परन्तु आज भी हालत ज्यो की त्यो बनी हुई है ।
कौन है जिम्मेदार ? जनता ! कर्मचारी ! या ग्राम प्रधान ? अभी भी खुलेआम शौच करते हुए सरकार के मंसूबो पर पानी फिर रहा है ।
बताते चले कि भारत सरकार के इस कल्याणकारी योजना को दो अक्टूबर 2018 मे ही जनपद के सभी ग्राम पंचायतो मे शौचालय मुहैया कराकर विकास खण्डो के ग्राम पंचायतो को ओ डी एफ घोषित करा दिया । लेकिन आज भी इन सबके बावजूद ग्राम पंचायतो के सड़को , संपर्क मार्गो पर खुलेआम शौच करने वालो की लाइन लग जाती है जिसे जिला प्रशासन , स्वच्छता अभियान के पुरोधा राज मूक दर्शक बनते हुए है अपने तो सदियो से निकल जाते है लेकिन औरो की बारी मे इनका जरा भी ध्यान नही जाता । क्या ऐसा करना इनकी कोई मजबूरी है या जान बूझकर नजरंदाज करते है ?
कैसे होगा वातावरण स्वच्छ जब खुलेआम होगा शौच । कौन है इसका जिम्मेदार ? सरकार की निगाह तो अब स्वच्छता अभियान को छोड़ पशु आश्रालय के ऊपर केंद्रित हो गया है । स्वच्छ भारत अभियान की तरफ किसी की निगाह पड़े तो कैसे पड़े ?
लिहाजा अभियान अपनी बदनसीबी पर आंसू बहाते नजर आ रहा है ।