

मंसूरचक, बेगूसराय, बिहार।
हमारे शास्त्रों में लिखा है कि बड़ों के अभिवादन करने मात्र से यश, आयु, बुद्धि और बल की वृद्धि होती है किन्तु आज समाज में इन संस्कारों की कमी हो गई है जिसके कारण हमारा समाज पतनोन्मुख है.आज की पीढ़ी के सामने फिर से अपने वैभवशाली , गौरवशाली अतीत को वापस लाने की चुनौती है.शिक्षा के साथ संस्कार की आवश्यकता आज है.उक्त बातें राजकीयकृत मध्य विद्यालय नौलागढ़ के प्रधानाध्यापक सह शिक्षाविद रामनरेश चौधरी ने अपने सम्मान समारोह के दौरान मंसूरचक के हवासपुर स्थित मानकी संगीत कला केंद्र के सभागार में कही.उन्होंने कहा कि पत्थर में भी यदि आकृति गढ़ दी जाती है तो उसे पूजा जाने लगता है . शिक्षक एक शिल्पकार हैं जो बच्चों के भविष्य को गढ़ने का काम करते हैं.सम्मान समारोह की अध्यक्षता उच्च विद्यालय बनवारीपुर के पूर्व प्रधान रामसेवक महतों , संचालन केंद्र के निदेशक सह चर्चित पार्श्वगायक अजय अनंत ने किया.मौके पर बिहार सिने आर्टिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सह सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेता अमिय कश्यप, रामसेवक महतों, अजय अनंत आदि ने शिक्षा के क्षेत्र में रामनरेश चौधरी के उल्लेखनीय योगदान हेतु संस्था की ओर से राष्ट्रकवि दिनकर शिक्षा रत्न सम्मान से सम्मानित किया। अभिनेता अमिय कश्यप ने कहा कि जिंदा कौमें ही इतिहास को संरक्षित करती है.कश्यप ने कहा कि आज शिक्षा से जुड़े लोगों को रामनरेश चौधरी जैसे शिक्षकों से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है.मौके पर प्रीति प्रिया के नेतृत्व में संगीत कला केंद्र के बच्चों ने अपनी संगीत की प्रस्तुति से लोगों का मन मोह लिया।