क्षयरोग का घर – घर जांच और अस्पताल मे नजरंदाज
के के मिश्रा / हरीश सिंह
सन्त कबीर नगर – केन्द्र सरकार के 2025 तक के क्षयरोग मुक्त लक्ष्य के क्रम मे चलने वाला क्षयरोग मुक्त अभियान किसी उस दिखावे से कम नही है जो कहावत के रुप मे बीरबल की पकती खिचड़ी की कहानी पढ़ी सुनी जाती है ।
उल्लेखनीय है कि जिला क्षयरोग अस्पताल मे क्षयरोगियो के जांच मे घोर लापरवाही होती है ढंग से बलगम की जांच ही नही होती है दवा युक्त शीशी मे निकाले गये बलगम को स्टाप की जगह मरीज या उसके साथ गये लोग तब – तक मिक्स करने का काम करते है जब – तक अच्छी तरह से बलगम मे दवा घुल न जाये । ऐसे मे अभियान की सार्थकता और जिम्मेदारो की गंभीरता कितनी है इसका उत्तर धर्मराज युधिष्ठर से प्रश्न करने वाला यक्ष भी बगले झांकता मिलेगा , क्या दायित्व की यही परिभाषा है ? जब बलगम जांच मे इस कदर नजरिया काम कर रही है तो इलाज की नैतिकता कितनी कारगर होगी इसे या तो क्षयरोगी बता सकता है या तो क्षयरोग मुक्त अभियान का उद्देश्य बता सकता है । बहरहाल क्षयरोग मुक्त अभियान के प्रति केन्द्र सरकार की कटिबद्धता तो है ही साथ ही साथ लोकप्रिय जिलाधिकारी रवीश गुप्ता के पहल पर जनपद मे दस तारीख से डोर टू डोर जाकर क्षयरोग रोगियो को चिन्हित कर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियो द्वारा जिले से क्षयरोग मुक्त करने का दृढ़ संकल्प लिए घूमते नजर आयेगे वर्षो से चली आ रही परम्परा को जागृत करते हुए मुक्त करने का दृढ़ संकल्प संजोये है । अब देखना यह है कि क्षयरोग मुक्त होगा जिला या जिले से क्षयरोगी हो जायेगे मुक्त , यह आने वाला समय ही बतायेगा ।