सोशल आडिट टीम जांच नही ? दे रहा है भ्रष्टाचार को बढ़ावा
संतकबीरनगर
के के मिश्रा / हरीश सिंह
सन्त कबीर नगर – आधुनिकता के पायदान पर शिक्षा और विकास को जितनी ऊंचाईया मिली है भ्रष्टाचार और अपराध के उतने ही ग्राफ बढ़े है बल्कि अगर यह कहा जाय कि इनकी पारदर्शिता अपराध और भ्रष्टाचार के सामने नतमस्तक है तो कोई अतिशयोक्ति नही होनी चाहिए इसके एक से एक उदाहरण धरातल पर देखे जा सकते है चाहे वह योजनाओ मे पनपा भ्रष्टाचार हो या जांच मे पनपा भ्रष्टाचार हो । हर जगह शिक्षा और विकास को मात मिल रही है । मसलन प्रदेश की योगी सरकार भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के क्रम मे ग्राम पंचायतवार सोशल आडिट के माध्यम से बतौर कामयाब नीति पारदर्शिता सहभागिता और जवाबदेही के बूते जांच करवा रही है । लेकिन इस जिस तरह से गतिविधिया नजर आ रही है वह कही न कही भ्रष्टाचार के बुलन्द हौसले की हौसला अफजाई की तरफ इशारा कर रहा है । आज की तारीख मे ब्लाको के जितने भी ग्राम पंचायतो मे सोशल आडिट हुआ है उसमे कमशकम पचहत्तर प्रतिशत से कही अधिक औपचारिकता के रुप मे जांच निपटा दिया गया ।
बताते चले कि विकास खण्ड बघौली के ग्राम पंचायत गगौली , गौरापार , गुलरिहा , हाड़ापट्टी , हटवा , फेउसी विकास खंड सेमरियावा के अंतर्गत जिगिना , धुसरा , लहुरादेवा , इनायत पुर , जातेडीहा , कड़जा , कान्हापर मे आडिट टीमो द्वारा पूर्व नियोजित समयानुसार जांच की खाना पूर्ति कर ली गयी । कही पर प्रधान नजर नही तो कही रोजगार सेक्रेटरी नजर नही आये , इस तरह सोशल आडिट टीम के द्वारा शासन द्वारा निर्देशित स्लोगन पारदर्शिता सहभागिता जवाबदेही के प्रति लापरवाही नजर आ रही है यहां तक कि विकास खंड बघौली के ग्राम पंचायत गुलरिहा मे दो लाख अट्ठावन हजार रुपये का मनरेगा मजदूरो से काम दिखाया गया है जबकि मनरेगा मजदूरो का जाब कार्ड / भुगतान अपूर्ण पाये । यहां तक की वर्ष 2018 / 19 के काम मे 2014 का जाब कार्ड पाया गया जिसे सोशल आडिट कोआर्डिनेटर द्वारा उक्त जाब कार्ड को अपने पास रख लिया गया । प्रधान व रोजगार सेवक चिल्लाते रहे कि इनका जाब कार्ड नया बनाया गया है लेकिन मौके पर पाया नही गया , यही हाल ग्राम पंचायत गौरापार का भी देखा गया कि कोआर्डिनेटर अखिलेश शर्मा द्वारा जांच को असामान्य तरीके से निपटा दिया गया । वहां जाब कार्ड रजिस्टर व अन्य पत्रावलिया ब्लाक पर होने की बात रोजगार सेवक द्वारा बताया गया जिसे श्री शर्मा द्वारा प्रधान को आश्वस्त करते हुए कहा गया कि जांच काम की होती है रजिस्टर की नही , ऐसे हो रहे है सोशल आडिट । इसी तरह विकास खंड सेमरियावा के ग्राम पंचायत जिगिना मे देखने को मिला , जहां पर टीम की महिला कोआर्डिनेटर नीलम अपने चार पहिया वाहन से मय ड्राइवर के साथ पूरे गांव मे प्रधान द्वारा कराये गये कार्यो को अपनी पूरी ईमानदारी और निष्ठा से भौतिक स्थलीय सत्यापन करती रही टीम के अन्य सदस्य उनकी गाड़ी के पीछे – पीछे भागते नजर आ रहे थे । लेकिन मैडम को जिसकी तलाश थी वो गांव मे न मिल करके नेशनल हाईवे के चाय की दुकान पर मिल गयी , हो जांच प्रधान भी खुश मैडम भी खुश , गाड़ी खुशी मे लहराती हुई अपने स्थान को चली गयी ।