

सन्त कबीर नगर (बेलहर कला ) ” अजगर करै न चाकरि पंछी करे न काम । दास मलूका कह गये सबके दाता राम ” यह और बात है यह भी और बात है कि भाग्य के सितारे जन्म तय करते है लेकिन कर्म से ही सफलताओ की झड़ी लगती है आज विकास के विभिन्न पायदान इसके जीते जागते उदाहरण है चाहे वह धरती से लेकर आसमान तक स्थापित करने वाली अनेको उपलब्धियां हो चाहे ऊसर भूमि से बड़ी राशि मे पैदा होने वाले साग सब्जी , गेहूं धान इत्यादि अनाज हो । यही नही गरीबी से लेकर दयनीय स्थिति से उबारने वाला वह हमारा कर्म ही है जिसे ” कर्म ही पूजा ” कहते है । विकास खण्ड बेलहर कला के बरगदवां कला गांव निवासी किसान श्यामलाल का एक दिन ऐसा भी था जब अपनी गरीबी , आर्थिक तंगी को लेकर अपने नसीब को कोसता था लेकिन जब उसे रीलेक्सो डोमस्वेयर कंपनी निदेशक अब्दुल्लाह खान का सहयोगी हाथ और कर्म फल सिद्धांत के गुण मिले तो उसके दिन बहुर गये । पाई – पाई को मोहताज आज वही लाचार किसान श्यामलाल की आर्थिक तंगी ही खत्म नही हुई बल्कि उसकी अपनी एक पहचान हो गयी है । अब वह नसीब को नही कोसता है बल्कि दूसरो को कर्म करने का नसीहत देता है । केले के फल से उसका अब मासिक इनकम पन्द्रह हजार से ऊपर हो गया है रोज पांच सौ से अधिक का इनकम कर लेता है । यही नही केले के पौधे की क्यारियो से ” धनिया , मूली , गोभी इत्यादि अनेक प्रकार के उपज से भी स्वादिष्ट भोजन के साथ धन लाभ उठा रहा है जो पौधे लगाने के समय से कर रहा है । किसान श्यामलाल का कहना है कि कंपनी निदेशक अब्दुल्लाह खान द्वारा जब केले की खेती की बात कही जा रही थी तब बहुत अटपटा लग रहा था भला यहां केले की खेती से कौन सा लाभ हो जायेगा । इसके तो ” नाशिक , भुसावल आदि अपने एक क्षेत्र की पहचान है । लेकिन जब उनके द्वारा दिये गये कमर्शियल खेती के टिप्स को स्वीकार कर केले की खेती प्रारम्भ की तो हमारे दिन वाकई मे बदल गये । अब हम पाई – पाई को मोहताज नही है अब हमारे पास इनकम का एक अच्छा स्रोत हो गया है । वही सहयोगी हाथ के साथ केले की कमर्शियल खेती के प्रेरणा बने कंपनी निदेशक अब्दुल्लाह खान जी कहना है कि मेहनत से ही नसीब बनता है कर्म मे कभी नाकारात्मक भावना को स्थान नही देना चाहिए , मेहनत भाग्य का विधाता है । जिसके अनेको उदाहरण के साथ किसान श्यामलाल भी है ।