वर्ष 2020 जो बीत गया-
लेख: मुहम्मद आरिफ नदवीी
संतकबीरनगर
कुछ ख़ास ख़ास लम्हों की तस्वीर खींच ली।
यानी कि हम ने वक़्त की ज़ंजीर खींच ली।
बड़ी मुहब्बत व इज़्ज़त अफजाई के साथ नए साल की शुरुआत होती है। युवा संघर्ष समिति संत कबीर नगर के संयोजक रिज़वान मुनीर व सह संयोजक मुहम्मद सलमान आरिफ का मुम्बई में समिति के पदाधिकारी शहबाज़ अहमद व जसीम अहमद आदि द्वारा शानदार स्वागत किया जाता है।
युवा संघर्ष समिति संत कबीर नगर की पुरानी और अहम मांग यानी सेमरियावाँ संत कबीर नगर को तहसील बनाए जाने के मुद्दे को एक बार फिर 4 जनवरी को अख़बारात बेहतरीन कवरेज देते हैं।
कड़े विरोध प्रदर्शन के बावजूद 11 जनवरी को सिटीजन अमेंडमेंट बिल संसद में पारित हो जाता है। और धरना प्रदर्शन मज़ीद सख़्त रुख एख़्तियार कर लेता है। मैं भी अपने मुम्बई के सफर में मुम्बई में होने वाले प्रदर्शनों में पहुंचता हूँ, और अगली मोहड़ी पर रहने की कोशिश करता हूँ। शाहीनबाग इस सिलसिले में एक नया अध्याय लिखता है। जामिआ मिल्लिया यूनियवर्सिटी व अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों पर ज़ुल्म व सितम के पहाड़ तोड़े जाते हैं। शाहीनबाग की दादी प्रभावशाली महिलाओं में उच्च स्थान पाती हैं। इसी दौरान देश की राजधानी दिल्ली में केंद्र व प्रदेश शासन की नाक के नीचे दंगे फूट पड़ते हैं। जो शासन प्रशासन की कमज़ोरी का मुंह बोलता सुबूत साबित होते हैं।
17 जनवरी को उस्ताज़े मोहतरम मौलाना बुरहानुद्दीन साहब संभली उस्ताज़ दारुल उलूम नदवतुल उलमा लखनऊ का इंतेक़ाल हो जाता है। आप हज़रत मौलाना अबुल हसन अली हसनी नदवी रह• के बेहद क़रीबी थे। आप मजलिसे तहक़ीक़ाते शरइया के अध्यक्ष, आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड दीनी तालीमी कौंसिल, इस्लामिक फिक़्ह एकेडमी के सदस्य और कई किताबों के लेखक थे।
3 फरवरी को अज़ीज़ दोस्त रिज़वान अहमद साहब एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। सिर में चोट आती है। लखनऊ के ट्रामा सेन्टर में इलाज होता है। कुछ दिनों बाद वह स्वस्थ हो कर अपने कामकाज पर लौट आते हैं।
ब्लाक परिसर सेमरियावाँ संत कबीर नगर में विभिन्न उद्देश्यों से दूर दराज से आने वाली जनता के बैठने व विश्राम हेतु पार्क बनवाए जाने सम्बन्धित एक मांग पत्र युवा संघर्ष समिति के सदस्य 4 फरवरी को ब्लाक प्रमुख मुमताज़ अहमद को सौंपते हैं।
प्रसिद्ध शाएर मस्ऊद हस्सास साहब मुक़ीमे हाल कुवैत की वतन आमद पर मुजीब बस्तवी, फुज़ैल अहमद नदवी, वसीम ख़ान वसीम, संतोष प्रजापति, हाशिम आदमज़ाद, मुहम्मद नसीम, अलक़मा हुसैन आदि द्वारा 9 फरवरी को पुरतपाक इस्तेक़बाल किया जाता है। इस मौक़े पर एक अदबी नशिस्त का आयोजन भी किया जाता है। मस्ऊद हस्सास साहब ने कम समय में काफी नाम कमाया, आप का एक दीवान/काव्य संग्रह “जोशे जुनूं” छप कर सराहा जा चुका है।
24 फरवरी को मदरसा फैज़ुल उलूम कोहरियावाँ संतकबीर नगर में आयोजित तय्यब टैलंट सर्च प्रतियोगिता में अतीक़ अहमद सर व माशूक़ अहमद सर के साथ बतौर परीक्षक शिरकत का मौक़ा मिलता है
26 फरवरी को मदरसा नजमा लिलबनात जातेडीहा निकट दुधारा संतकबीर नगर में आयोजित टैलेंट सर्च कम्पटीशन में भी शिरकत होती है।
26 फरवरी को ही यह दुख भरी ख़बर मिलती है कि मशहूर आलिम, शाएर, साहित्यकार, वक्ता, मौलाना वलीउल्लाह साहब वली बस्तवी का इंतेक़ाल हो गया। आप जामिआ मज़ाहिरे उलूम वक़्फ सहारनपुर के सीनियर उस्ताज़ और सैकड़ों किताबों के लेखक थे। आप का आबाई वतन कोइलसा निकट बाघनगर संतकबीर नगर है। मेरे बड़े भाई क़ारी मुहम्मद इस्माईल साहब उस्ताज़ शोबए हिफ्ज़ मदरसा दीनियात मौलाना आजाद रोड शांती नगर भिवंडी के हमज़ुल्फ/साढ़ू क़ारी अलीमुल्लाह साहब नाज़िम मदरसा छपिया ख़ास आप के छोटे भाई हैं। उन की यौमे वफात पर एक तफ्सीली मज़मून लिखूंगा, इंशाअल्लाह।
6 मार्च को अलहिरा ग्लोबल एकेडमी मजीदाबाद सेमरियावाँ संतकबीर नगर में एक प्रोग्राम बनाम तकमीले क़ुरआन मजीद का आयोजन किया जाता है। प्रोग्राम की सरपरस्ती मौलाना फुज़ैल अहमद नदवी प्रबन्धक अलहिरा ग्लोबल एकेडमी और अध्यक्षता मौलाना मुनीर अहमद नदवी नाज़िम मदरसा तालीमुल क़ुरआन ने की, जबकि संचालन मुहम्मद सलमान आरिफ नदवी ने किया।
इसी बीच पड़ोसी देश चीन में एक वायरस जन्म लेता है, या जन्म दिया जाता है। और देखते ही देखते सारे संसार को अपनी लपेट में ले लेता है। सारे देश लाकडाउन के एलान पर विवश हो जाते हैं। हालांकि अब देर हो चुकी होती है। होना तो यह चाहिए था कि वक़्त रहते चीन से आने जाने वाली फ्लाइट्स रद्द कर दी जातीं। और आवाजाही पर पूर्ण रूप से विराम लगा दिया जाता। लेकिन अब पछताए का होत, जब चिड़ियाँ चुग गईं खेत। भारत देश में भी देर से ही सही पर अचानक लाकडाउन की घोषणा कर दी जाती है। यातायात के सारे साधनों पर अकस्मात ब्रेक लगा दिया जाता है। जो जहाँ है वहीं रह जाता है। रोज़गार ठप पड़ जाता है। रोटी के लाले पड़ जाते हैं। जनता भूखमरी का शिकार हो जाती है। देश भर में फैले हुए मज़दूर पैदल ही अपने घरों की ओर पलायन करने लगते हैं। अनगिनत लोग भूखे प्यास से तड़प तड़प कर रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। कई राहगीर रेल की पटरियों पर कट जाते हैं, और साथ ले जाई गई रोटियाँ दूर तक छितरा जाती हैं।
जांच शुरू होती है, 26 मार्च तक कोरोना संक्रमितों की संख्या 718 तक पहुंचती है। उस वक़्त पूरा देश मुकम्मल तौर पर लाक कर दिया जाता है। और अब जबकि 1 करोड़ 4 लाख के ऊपर केस पहुंच चुके हैं, तो सब कुछ खोल दिया गया है। हाँ अगर कोई चीज नहीं खुली है तो वह है विद्या का केंद्र, स्कूल।
28 मार्च को मैं अपने गांव परसादपुर संत कबीर नगर में एंटी लार्वा व ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करवाता हूँ। ताकि कीटाणुओं व मच्छरों के प्रकोप से नजात मिल सके।
29 मार्च को यह ख़बर दिल पर बिजली बन कर गिरती है कि मौलाना लियाक़त हुसैन साहब साकिन कोहरियावाँ संतकबीर नगर अब हमारे बीच नहीं रहे। आप जनपद के कुछ इदारों में तालीमी ख़िदमात अंजाम देने के बाद मादरे इल्मी जामिआ इस्लामिया मुज़फ्फरपुर आज़मगढ़ में तशरीफ ले गए। और वहाँ कई वर्षों तक शैख़ुल हदीस की मसनद पर जलवा अफरोज रहे। आप बहुत दिनों से बीमार चल रहे थे, मैं कई बार इयादत करने गया। एक बार मौलाना सादिक अली साहब का जिक्र छिड़ गया, आप बार बार कहते रहे, मौलाना सादिक साहब बहुत नेक थे, बहुत अच्छे थे, बहुत शरीफ थे। आप की यौमे वफात पर एक तफ्सीली लेख लिखने का इरादा है, इंशाअल्लाह।
अप्रैल के अन्तिम दहे में रमज़ानुल मुबारक का आग़ाज़ होता है। ज़हन व शरीर जो लाकडाउन के कारण लाक हो चुका होता है, अचानक उन में नई ऊर्जा आ जाती है। सुस्ती की जगह फुर्ती और आलस की जगह निशात का दौर दौरा हो जाता है।
लाकडाउन की बिना पर यह सुनहरा अवसर प्राप्त हो जाता है कि तरावीह घर वालों के साथ जमाअ्त के साथ पढ़ी जाए। हाय वह मन्जर, तरावीह सुनाने की वह कैफियत, कुर्आने करीम पढ़ने की वह लज्जत, दिल की वह अजब हालत, वह लमहात एक नाकाबिले फरामोश यादगार बनकर दिल व् दिमाग़ पर सब्त हो गये। खास तौर पर आख़िरी तरावीह और फिर वह आखिरी रकअ्त, जी चाह रहा था कि घड़ी थम जाए, रफ़्तारे जमाना ठहर जाए, समय का पहिया रुक जाए, और यह रकात कभी खत्म न हो। वह कैफियत जब भी जहन के दरीचों में आ मचलती है, तो मानो शरीर में बिजली सी कौंध जाती है, दिल सिहर उठता है, जज्बात अठखेलियां करने लगते हैं।
अब तक कई बार तरावीह सुनाने का मौका मिला, अपने गांव परसादपुर की मस्जिद में, अल्लामा मुहम्मद उमर साहब अध्यक्ष जमइयते उलमाए सन्त कबीर नगर व् उन के साहबजादे कारी अशफाक अहमद साहब की ख्वाहिश पर उन के गांव रजगनपुर में, सांगली में, और अब इधर कुछ वर्षों से लोनावाला/पूना में। लेकिन वह स्वाद जो घर परिवार के साथ तरावीह पढ़ने में मिला, कहीं मुयस्सर न हो सका। यूं मस्तूरात/खवातीन की जमाअ्त की अपनी पुरानी तमन्ना भी पूरी हुई।
ईदुल फित्र के बाद 28 मई को अचानक यह दुख भरी ख़बर मिलती है कि मशहूर शाएर असद बस्तवी व अज़ीज़म शुऐब अख़्तर की वालिदा मोहतरमा का इंतेक़ाल हो गया। आप कुछ दिनों से बीमार चल रही थीं। मरहूमा नेक और परहेज़गार थीं। लाकडाउन की बिना पर जल्द तदफीन कर दिए जाने के कारण जनाज़े में न पहुंच सका। शाम के वक़्त जसीम अहमद, मुहम्मद अरमान, ज़ुहैब हस्सान आदि के साथ ताज़ियत के लिए जाना हुआ। वहाँ मशहूर शाएर आलम निज़ामी साहब और अज़ीज़म अबरार अहमद से भी मुलाक़ात हुई।
30 मई को हमारे उस्ताज़े मोहतरम मौलाना मुहम्मद शाहिद साहब नदवी ने इस दुनिया को ख़ैरबाद कहा। आपका आबाई वतन अलनपुर निकट टांडा अम्बेडकर नगर है। लाकडाउन और दूरी के कारण जनाज़े में शिरकत न हो सकी। अभी हाल ही में रफीक़े मोहतरम अब्दुल क़य्यूम साहब नदवी के हमराह मौलाना की क़ब्र पर फातेहा ख़ानी के लिए जाना हुआ। आप हज़रत मौलाना अली मियां नदवी रह• के ख़ादिमे ख़ास और मदरसा ज़ियाउल उलूम मैदानपुर राय बरेली व मदरसा आएशा लिलबनात राय बरेली के उस्ताज़ थे। उन की यौमे वफात पर एक तफ्सीली मज़मून लिखा जायेगा, इंशाअल्लाह।
30 मई को ही अनीस अहमद, जसीम अहमद, ज़ुहैब हस्सान, मुहम्मद आमिर के साथ शहबाज़ अहमद व सलमान अहमद के दौलतख़ाने पर पुरैना मंसूर निकट करही दानू कोइयाँ संतकबीर नगर जाना हुआ। वहाँ दोनों साहबान की मोहब्बतों और उन के पुरतकल्लुफ दस्तरख़ान से इस्तेफादे का मौक़ा मिला।
5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर युवा संघर्ष समिति संत कबीर नगर उ0 प्र0 के तत्वावधान में वृहद वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। समिति के सदस्यों ने क्षेत्र भर में सैकड़ों पेड़ लगाए, जिस की चहुंओर प्रशंसा की गई। अख़बारों ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया।
27 जून का दिन यूँ यादगार बना कि उस दिन एक ऐसी मख़्लूक़ देखी गई जिसका ज़िक्र बचपन से पढ़ते और माता पिता की ज़बानी सुनते आए थे। लाखों करोड़ों की संख्या में टिड्डियाँ तप्पा उजियार के सिर पर देर तक मंडराती रहीं।
9 जुलाई को सेमरियावाँ संत कबीर नगर स्थित मुनीरूल हसन चौधरी साहब के आवास पर होने वाली एक बैठक में शिरकत हुई। जिस में प्रसिद्ध लीडर महमूद ख़ान, राजेश पांडेय संस्थापक तेजी फाउंडेशन ऑफ इंडिया, रिज़वान मुनीर संयोजक युवा संघर्ष समिति, मेराज अहमद एमआईएम विधानसभा अध्यक्ष, जसीम अहमद कर्ख़ी, अबूजर चौधरी, अलक़मा हुसैन, मुहम्मद आमिर आदि उपस्थित रहे। इस मीटिंग में बुनियादी व ठोस शिक्षा पर विचार विमर्श किया गया। इस मौक़े पर वित्तीय मामलों के विशेषज्ञ महमूद ख़ान ने कहा कि बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए बुनियादी तालीम बेहद जरूरी है। इसके लिये काम करने की जरूरत है। जनपद में बच्चों की तालीम, उच्च शिक्षा तथा रोजगार के मुद्दे पर अलग अलग तकनीकी विशेषज्ञों के सहयोग से काम किया जायेगा। युवा संघर्ष समिति तथा तेजी फाउंडेशन आफ इंडिया आदि संस्थाओं के सहयोग से बच्चों के भविष्य के लिए हर स्तर से सहयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि युवा संघर्ष समिति की हर स्तर पर मदद की जायेगी। उन्होंने सामाजिक कार्यों में सहयोग की युवाओं से अपील भी की।
16 जुलाई को मेरी दूसरी फेसबुक आईडी फेसबुक टीम मेमोरियलाइज़्ड कर देती है। पहली फेसबुक आईडी जोकि सन 2011 में बनी थी, वह 2 साल पहले सन 2018 में इसी जुलाई के महीने में किसी अज्ञात द्वारा हैक कर ली गई थी। पहली आईडी से काफी यादें वाबस्ता थीं। हालांकि उसे वसी अहमद भाई साकिन सेहुंड़ा संतकबीर नगर ने बड़ी कोशिशों के बाद रिकवर किया, कुछ देर मैं ने यूज़ भी किया, लेकिन हैकर बड़ा चतुर था, फिर ले उड़ा।
दरअस्ल 15 जुलाई 2020 की शाम को मैं ने तुर्की में सन 2016 में फूट पड़ने वाली बगावत और उस में अमेरिका का हाथ होने के विषय पर एक पोस्ट की। अगले दिन जब फेसबुक खोलता हूँ, तो अकाउंट अपने आप लागआउट हो जाता है। और फिर पता चलता है कि आईडी मृत घोषित कर दी गई है। मैं हज़ार प्रयास करता हूं, लेकिन असफलता हाथ लगती है। मृत घोषित आईडी के रिकवर करने में अगर कोई जानकार सहायता करते हैं, तो बड़ी ख़ुशी की बात होगी, मैं उन्हें माकूल मेहनताना भी दूंगा।
21 जुलाई को NH 328 यानी BMCT बस्ती- मेंहदावल- कैम्पियरगंज- तमकुही मार्ग की जर्जर हो चुकी स्थिति और जगह जगह दुर्घटना को दावत दे रहे गड्ढों को लेकर युवा संघर्ष समिति संत कबीर नगर उ0 प्र0 के तत्वावधान में होने वाले एक धरना प्रदर्शन में शिरकत करने का अवसर मिला। जिस को सभी अहम अख़बारों ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। इस मौक़े पर जसीम अहमद, फिरोज अली, इमरान अहमद, शमशीर अहमद, मुहम्मद आमिर, महबूब अहमद, मुहम्मद उवैस, तुफैल अहमद, मक़सूद अहमद सहित विभिन्न क्षेत्रवासी मौजूद रहे।
30 जुलाई को तेजी फाउंडेशन ऑफ इंडिया व युवा संघर्ष समिति के आह्वान पर 30 लोगों ने ब्लड डोनेट किया। रक्तदान शिविर के आयोजक राजेश पांडेय व रिज़वान मुनीर साहबान ने सभी का आभार प्रकट किया।
5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन के अवसर पर मैं ने एक लेख लिखना शुरू किया, जो 25 भागों में 31 अगस्त को मुकम्मल हुआ। हालांकि वह कुछ बिन्दुओं पर अभी अधूरा है, किसी मौक़े पर उसे पूरा किया जाएगा, इंशाअल्लाह।
16 अगस्त को युवा संघर्ष समिति के पदाधिकारी खस्ताहाल हो चुकी बस्ती- मेंहदावल सड़क को लेकर आवाज़ उठाते हैं। सत्य मेव जयते लाइव अपने चैनल पर इसे प्रमुखता से प्रसारित करता है। ख़ुद मैं अपनी फेसबुक वाल पर वह वीडियो अपलोड करता हूं ,जिसे अबतक क़रीब 18 हज़ार यूज़र्स देख चुके हैं।
1 सितम्बर को राम किशुन व नसीम अहमद द्वारा विकास कार्यों में अनियमितता की शिकायत पर दो सदस्यीय जांच टीम मेरे गाँव परसादपुर ब्लाक सेमरियावाँ आती है। लेकिन प्रधान जी के अनुपस्थिति के कारण बैरिंग वापस लौट जाती है।
4 सितम्बर को यह दुःख भरी ख़बर मिलती है कि अज़ीज़ दोस्त अब्दुस्समी साक़िबी साहब व अब्दुल अली साहब साकिन मझौवा मीर जमदा शाही जनपद बस्ती के वालिदे मोहतरम मौलाना क़मरुद्दीन साहब की वफात हो गई। आप दारुल उलूम रामपुर के कई वर्षों से शैख़ुल हदीस थे। आप की यौमे वफात पर इंशाअल्लाह तफ्सीली लेख लिखने का इरादा है।
10 सितम्बर को जसीम अहमद साहब महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष युवा संघर्ष समिति के प्रथम जनपद आगमन पर समिति के सदस्यों रिज़वान मुनीर, मुहम्मद सलमान आरिफ, फिरोज अली, अलक़मा हुसैन, शुऐब चौधरी, अफसर अहमद, सलमान अहमद, इमरान अहमद, शादाब अहमद, अबू तलहा आदि द्वारा भव्य स्वागत किया जाता है।
12 सितम्बर को मैं ने कुछ पुराने वाक़ेआत जो व्यस्तता और लापरवाही के कारण छूट गए थे, को समेटने का एक सिलसिला “यादों के झरोखे से” शुरू किया, पहले चरण में इनायतुल्लाह फलाही साहब की दावत पर मुम्ब्रा महाराष्ट्र में मुन्अक़िद अदबी मेले में हुई शिरकत से इस का आगाज़ किया। इरादा था कि इसे 4/5 किस्तों में मुकम्मल कर के दूसरी छूटी हुई यादों को लिखूंगा। लेकिन पहला सिलसिला ही “लज़ीज़ बूद हिकायत दराज़ तर गुफ्तम” के मद्देनजर इतना लम्बा हुआ जो अभी तक जारी है। अब देखिए कि बाक़ी बची यादें जो राह निहार रही हैं, उन का नम्बर कब आता है?
30 सितम्बर को भीम आर्मी के तत्वावधान में पीड़ित मनीषा के हत्यारों को फांसी देने की मांग को लेकर जनपद मुख्यालय ख़लीलाबाद में निकाले जाने वाले एक मार्च में शिरकत होती है। वहाँ बसपा के लीडर सुबोध यादव और नाजिम खान से मुलाक़ात होती है।
10 अक्तूबर को जाफरिया बुक डिपो निकट स्टेट बैंक सेमरियावाँ संतकबीर नगर में मुहम्मद अरशद की अध्यक्षता, ज़ुहैब हस्सान की क़्यादत और अलक़मा हुसैन की निगरानी में एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिस का संचालन मुहम्मद सलमान आरिफ नदवी ने किया। इस में हाशिम आदमजाद, शुऐब शैख़, मक़सूद अहमद, मुहम्मद अरमान, मुहम्मद तलहा, अब्दुल वदूद, मुहम्मद अरक़म, मुहम्मद ज़ैद, अबू तलहा सहित विभिन्न युवा शायरों ने शिरकत की।
14 अक्तूबर को मैं ने ODF के मुद्दे पर आवाज़ उठाई। मेरा कहना था कि वह बहुप्रतीक्षित 2 अक्तूबर (जिस का दो साल पहले ही वादा किया गया था) आख़िर कब आएगा, जबकि अपना जनपद संत कबीर नगर खुले में शौच मुक्त होगा?
23 अक्तूबर को राबेहा मोबाइल सर्विस सेंटर लोहरौली संतकबीर नगर के उदघाटन के अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में हाजिरी हुई। संचालन सलमान शकील नदवी ने किया। मुजीब बस्तवी, काशिफ शकील, फराज़ अदीबी मुबारकपुरी, वसीम खान वसीम, असद महताब, गुफरान शकील नदवी, डाक्टर क़मर मुहम्मदाबादी, मन्सूर आज़मी, आरिफ आज़मी क़ासिमी, फख़रुल इस्लाम कबीर नगरी, ज़हीर ग़ौरी आदि सहित कई कवियों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं। इस अवसर पर अहमद जमाल, ख़ालिद कमाल, मुहम्मद इमरान क़ासिमी, ज़ुबैर अहमद, फिरोज अहमद, फुरकान शकील, नोमान अहमद आदि उपस्थित रहे।
1 नवम्बर को सेमरियावाँ संतकबीर नगर में फैजान कलेक्शन/नकाब घर प्रोपराइटर मुनीर अहमद व वीमेंस वर्ल्ड/पर्स सेंटर प्रोपराइटर मेराज अहमद के उदघाटन के अवसर पर मारूफ आलिम मुफ्ती अफरोज अहमद, मशहूर शाएर महमूद अहमद, जिला पंचायत सदस्य मुहम्मद अहमद, वरिष्ठ लीडर सैय्यद फ़िरोज़ अशरफ़, अख़लाक़ अहमद, शफीक़ अहमद, रिज़वान मुनीर ,अलीमुल्लाह ख़ान, ज़फीर चौधरी, मुहम्मद यूसुफ कमाल, मुहम्मद इरफान, जुनैद अहमद, अबूजर चौधरी, फिरोज़ अहमद साहबान समेत विभिन्न अहबाब से मुलाक़ात हुई।
4 नवम्बर को जमदा शाही जनपद बस्ती में सज्जाद अहमद नदवी की क़्यादत और मुफ्ती सईद अहमद क़ासिमी की सरपरस्ती में होने वाले टैलेंट सर्च कम्पटीशन में मुनीर अहमद नदवी और तसद्दुक़ हुसैन क़ासिमी के हमराह बतौर परीक्षक के शिरकत हुई। इस अवसर पर मुहम्मद फैसल नदवी, नौशाद अहमद क़ासिमी, तुफैल अहमद नदवी, क़ारी अमीरुल्लाह वग़ैरह मौजूद थे।
9 नवम्बर को विश्व उर्दू दिवस के मौक़े पर अलहिरा ग्लोबल एकेडमी मजीदाबाद सेमरियावाँ संतकबीर नगर में एक अदबी बैठक हुई। जिस की अध्यक्षता मशहूर शाएर मुजीब बस्तवी और संचालन मुहम्मद सलमान आरिफ ने किया। फुज़ैल अहमद नदवी प्रबन्धक अलहिरा ग्लोबल एकेडमी ने अल्लामा इक़बाल की जीवनी पर प्रकाश डाला। ज़फीर अली कर्ख़ी ने उर्दू भाषा की उन्नति पर बात करते हुए मुजीब बस्तवी व सलमान आरिफ की उर्दू के लिए की गई सेवाओं की चर्चा की, और मज़ीद मेहनत करने की सलाह दी। इस अवसर पर नौशाद अहमद नदवी, मुहम्मद हारून, महफूज़ुर्रहमान, क़ारी शफीक़ अहमद, मुहम्मद आसिफ आदि उपस्थित रहे।
11 नवम्बर को शिक्षा दिवस के अवसर पर जूनियर हाई स्कूल सेमरियावाँ में मुजीब बस्तवी की अध्यक्षता और मुहम्मद सलमान आरिफ के संचालन में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिला पंचायत सदस्य मुहम्मद अहमद ने मौलाना अबुल कलाम आजाद की जीवनी पर रौशनी डालते हुए शिक्षा के महत्व पर भी ज़ोर दिया। ज़फीर अली कर्ख़ी, हमूद समी आदि ने भी शिक्षा की अहमियत के बारे में विस्तार से बताया। इस मौक़े पर फुज़ैल अहमद नदवी, रिज़वान मुनीर , सलमान उमर, इकरामुद्दीन चौधरी, मुहम्मद आरिफ, मुहम्मद आतिर वग़ैरह मौजूद रहे।
20 नवम्बर को युवा संघर्ष समिति संत कबीर नगर उ0 प्र0 की एक बैठक सम्पन्न हुई। जिस में समिति को आगे बढ़ाने पर चर्चा की गई। इस मौक़े पर महाराष्ट्र प्रान्त की विभिन्न छोटी बड़ी संस्थाओं के पदाधिकारी इमरान अहमद क़ुरैशी प्रमुख सलाहकार युवा संघर्ष समिति के प्रथम जनपद आगमन पर रिजवान मुनीर, मुहम्मद सलमान आरिफ, जसीम अहमद, मेराज अहमद, सलमान उमर, नियाज अहमद, फिरोज अली, जतिन पटेल, शादाब अहमद, मुहम्मद आमिर, मुहम्मद अरशद आदि द्वारा उन का शानदार इस्तेक़बाल किया गया। इस मौक़े पर इमरान अहमद क़ुरैशी ने अपने अनुभव भी तफसील से साझा किए
29 नवम्बर को सांथा संत कबीर नगर स्थित शकील मंज़िल में आयोजित एक अदबी नशिस्त में जाना हुआ। काशिफ शकील, फुवाद शफीक, आसिफ अदील, दानिश जमाल सहित कई उभरते हुए शाएरों ने अपने कलाम सुनाए। दिलशाद साक़िबी की तिलवात से गोष्ठी का आगाज हुआ। जबकि तौफीक अहमद बस्तवी ने नाते पाक पढ़ी। इस अवसर पर शकील अहमद, रमशा शकील आदि मौजूद थे।
15 दिसम्बर को बिना नुक्तों की उर्दू किताब “दाइए इस्लाम” सहित कई किताबों के लेखक मौलाना सादिक अली साहब सादिक बस्तवी की यौमे वफात के मौक़े पर मैं ने उन पर एक सिलसिले वार लेख लिखना शुरू किया, जो ता हाल जारी है।
21 दिसम्बर को युवा संघर्ष समिति ने अपर मुख्य सचिव अपर मुख्य सचिव/नोडल अधिकारी अनिल कुमार को उन के सेमरियावाँ संत कबीर नगर आगमन के मौक़े पर सेमरियावाँ को नगर पंचायत बनाए जाने, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत को बेहतर बनाये जाने समेत विभिन्न समस्याओं सम्बन्धित एक ज्ञापन सौंपा। इस दौरान संयोजक रिज़वान मुनीर, महासचिव संतोष प्रजापति, अबुजर चौधरी, पंकज कुमार, जमुना प्रसाद, विशाल जायसवाल, इकरामुद्दीन आदि मौजूद रहे।
लम्बे समय से बेरोजगारी का दंश झेलने और ठंडक से बचने हेतु 22 दिसम्बर को मुम्बई महाराष्ट्र की राह पकड़ी। और अब फिलहाल भिवंडी में यह तहरीर लिख रहा हूँ। ख़ैर आगे आगे देखिए होता है क्या??? किसी शाएर ने क्या ही ख़ूब कहा है कि:
हो रही है उम्र, मिस्ले बर्फ कम।
चुपके चुपके रफ्ता रफ्ता दम बदम।
साँस है एक रह रवे मुल्के अदम।
दफ्अतन एक रोज़ यह जाएगा थम।
मुहम्मद सलमान आरिफ नदवी
परसादपुर, तप्पा उजियार, संतकबीर नगर, उ•प्र•।
कार्यकारी अध्यक्ष: युवा संघर्ष समिति
9792761672