संगिनी के परामर्श और बीसीपीएम के मोटीवेशन से हुई पहली पुरुष नसबन्दी
– परिवार नियोजन पखवाड़े के दौरान पहली पुरुष नसबन्दी में मिली सफलता
– पति के जरिए आशा कार्यकर्ता नसबन्दी करवाने वाले पुरुष के सम्पर्क में आई
संतकबीरनगर। 31 जुलाई 2019
जितेन्द्र चौधरी
नसबन्दी करवाने में काउंसलर और मोटीवेटर की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। जिले में परिवार नियोजन पखवाड़े के दौरान हुई पहली पुरुष नसबन्दी इसका जीता जागता प्रमाण है। इसमें आशा संगिनी गायत्री ने नसबन्दी कराने वाले पुरुष को इसका परामर्श दिया। लेकिन जब वह आनाकानी करने लगा तो उसे बीसीपीएम नन्दिनी के जरिए मोटीवेट किया, नतीजा यह हुआ कि पहले पुरुष नसबन्दी में विभाग को सफलता मिली।
यूपीटीएसयू के फैमिली प्लानिंग एक्सपर्ट धर्मराज त्रिपाठी ने बताया कि परिवार नियोजन पखवाड़े के दूसरे चरण सेवा प्रदायिगी पखवाड़े में 10 दिन बीतने के बाद भी कोई पुरुष नसबन्दी नहीं हुई तो अधिकारियों ने आशाओं का सहयोग मांगा। ऐसे में बघौली ब्लाक क्षेत्र की आशा संगिनी गायत्री सिंह ने यह बात अपने पति को बताई तो पति ने ऐसे पुरुष की खोज शुरु की जो नसबन्दी करवा सकता हो। दो दिन बाद गायत्री के पति ने अपने एक मित्र का हवाला देते हुए बताया कि उसका परिवार पूरा हो गया है। वह नसबन्दी करवा सकता है। संगिनी गायत्री उसके पास गई तथा उसे नसबन्दी करवाने का परामर्श दिया। इसके बाद वह कहने लगा कि नसबन्दी से कमजोरी आ जाएगी। जिसके चलते उसका व्यवसाय प्रभावित होगा। समझाने के बाद भी जब वह नहीं माना तो गायत्री ने हार नहीं मानी। उसने बघौली की बीसीपीएम नन्दिनी को यह बात बताई। नन्दिनी ने उसे परामर्श देने के साथ ही नसबन्दी के लिए मोटीवेट करना शुरु किया। नन्दिनी के प्रयासों के चलते तकरीबन आधे घण्टे के बाद वह नसबन्दी के लिए तैयार हो गया। इसके बाद दूसरे दिन उसकी स्वास्थ्य विभाग के द्वारा अनुबन्धित एक निजी चिकित्सालय में नसबन्दी करा दी गई। इस दौरान उसकी पत्नी भी उसके साथ थी और उसने भी उसे सम्बल दिया। नसबन्दी के बाद वह अपने पैरों पर चलकर घर गया और पूरी तरह से स्वस्थ है। पूछने पर नाम न छापने की शर्त पर उसने बताया कि पहले तो वह इसे लेकर काफी डरा हुआ था। लेकिन अब उसके अन्दर कोई भी डर नहीं है। सारी भ्रान्तियां दूर हो गईं। परिवार को सुखमय बनाने के लिए नसबन्दी बहत ही आवश्यक है।
पुरुष नसबन्दी पर 3000 रूपये प्रोत्साहन
परिवार नियोजन के साधनों को अपनाने के लिए लाभार्थियों को भी प्रोत्साहन भत्ता दिया जाता है। नसबन्दी कराने वाले पुरुष को 3000 रूपये दिए जाते हैं, तो वहीं नसबन्दी के लिए प्रेरित करने वाली आशा कार्यकर्ता को भी 400 रुपये प्रोत्साहन राशि के रुप में दिए जाते हैं।
काफी चुनौतीपूर्ण था उसे मोटीवेट करना – नन्दिनी
बीसीपीएम नन्दिनी ने बताया कि जब उन्हें उनकी आशा संगिनी गायत्री ने बताया कि एक व्यक्ति है उसकी नसबन्दी करवाई जा सकती है, लेकिन वह तैयार नहीं हो रहा है। इसके बाद मैने इस कार्य को चुनौती पूर्वक लिया तथा उसके मन में उठ रहे सभी शंकाओं का मैने समाधान किया। नतीजा यह हुआ कि उसकी नसबन्दी हो गई।
तैयार नहीं था नसबन्दी करवाने को – गायत्री सिंह
आशा संगिनी गायत्री सिंह बताती हैं कि मेरे पति ने मुझे केवल इतना बताया कि उस व्यक्ति का परिवार पूरा हो गया है, वह नसबन्दी करवा सकता है। उसके बाद मैं उसके पास लगातार दो दिनों तक गई। लेकिन वह नसबन्दी कराने को तैयार नहीं था। उसके मन में तरह तरह की आशंकाएं थीं। अन्त में बीसीपीएम मैडम से बात किया तो वह खुद उससे मिलीं, उसको मोटीवेट किया और वह तैयार हो गया।
परिवार नियोजन से सम्बन्धित आंकड़े
वर्ष 2018 (1 अप्रैल 2018 से 31 मार्च 2019 तक) : महिला नसबन्दी 1435, पुरुष नसबन्दी 9, अन्तरा इंजेक्शन 1575, पीपीआयूसीडी 3600 तथा आयूसीडी 5000 लगाया गया था।
वर्ष 2019 (1 अप्रैल 2019 से 21 जून 2019 तक) :
महिला नसबन्दी 100, पुरुष नसबन्दी शून्य , अन्तरा इंजेक्शन 750 तथा पीपीआयूसीडी व आयूसीडी 500 लगाए गए हैं ।
‘‘आशा संगिनी और बीपीसीएम का प्रयास सराहनीय है। उन दोनों लोगों ने समन्वित प्रयास से एक पुरुष की नसबन्दी कराई। इसके लिए वे बधाई की पात्र हैं। जिले की अन्य आशा कार्यकर्ताओं तथा बीसीपीएम को उनसे प्रेरित होकर समाज हित में इस तरह के कार्य करने चाहिए।’’
डॉ मोहन झा
एसीएमओ आरसीएच

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