
कुरैश अहमद सिद्दीकी
अजीम शायर राहत इन्दौरी साहब इस दुनिया में नहीं रहे
हिन्दुस्तान के मशहूर और विश्व विख्यात शायर राहत इन्दौरी साहब करोना वायरस महामारी के चपेट में आ गये और इस दुनिया को अलविदा कह गये उनका यह शेर उनकी मशहूर शख्सित की याद दिलाता रहेगा ।
ज़िन्दगी को साज सांसों को नयी धुन कह दिया
कौन है जिसने बिना सोंचे हुए कुन कह दिया ।
राहत साहब अपनी ज़िन्दगी के आखिरी वरक बंद होने की याद हमेशा शेरों के माध्यम से दिलाते रहे हैं
उन्होंने लिखा था ।
दो गज सही मगर ये मेरी मिल्कियत तो है ।
ऐ मौत तूने मुझको जमींदार कर दिया ।
राहत साहब का इस दारे फानी से कूच करना हिन्दुस्तान ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया नें शेरो शायरी और गजल की दुनिया के एक बेताज बादशाह और अजीम शख्सित एवं महान इनसान को खो दिया ।
राहत साहब के अश्आर रहती दुनियां तक पढे और याद किए जाएंगे। राहत साहब का यह शेर भी कब्र की याद दिलाता है।
ये ज़िन्दगी सवाल थी जवाब मांगने लगे
फरिशते आ खॉब में हिसाब मांगने लगे
हम अपनी तरफ से और राहत साहब के बे शुमार चाहने वालों की तरफ से दिल की गहराईयों से खेराजे तहसीन पेश करते हैं।
और दुवायें करते हैं कि अल्लाह पाक राहत साहब की मगफरत फरमाए और जन्नतुलफिरदौस में आला मकाम आता फरमाए आमीन सुम्मा आमीन।
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