भूख की तड़प से कही हिंसक न हो जाये कुकुर

सन्तकबीर नगर / के के मिश्रा – वैश्विक महामारी कोविड 19 से जीवन सुरक्षा के क्रम मे लाकडाउन केवल मानव जीवन को ही प्रभावित नही कर रहा बल्कि कुकुर जैसे पालतू जानवरो का जीवन भी प्रभावित हो रहा है । मानव भूखा सोता हो या नही पर कुकुर जैसे जानवरो को भूखो रहने की नौबत आ गयी है । जो कुकुर नगर शहरो से सम्बन्ध रखते है उन्हे भूख का सामना करना पड़ रहा है । लाकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के चलते होटल वगैरह का संचालन बंद होने से बचा – खुचा जूठन बासी खाद्य पदार्थ अब उपलब्ध नही हो रहा है । जिससे कुकुरो को भूखो रहने की नौबत आ गयी है । ऐसे मे उनका ” भूखा क्या नही करता ” हिंसक होना स्वभाविक है कही – कही से कुत्तो द्वारा काटे जाने की सूचनाये भी आने लगी है ” जीवो पर दया करो ” की भावना वालो की माने तो कुकुर जैसे जानवरो का ख्याल रखना चाहिए , विषम स्थिति मे भी यहां का इतिहास है कि राजा शिवि एक पंक्षी की जान बचाने के एवज मे अपनी जांघ का मांस काटकर कर भेंट कर दिया था । आज की स्थिति उसी इतिहास को दोहराने की राह पर है चूंकि आज कोई राजा शिवि तो नही है पर बुद्ध जैसा हृदय वालो की कोई कमी नही है । वैसे भी कुकुर मानव जीवन से विशेष सम्बन्ध रखता है जहां ये एक तरफ स्वच्छ वातावरण मे अपनी भूमिका निभाते है वही इनकी वफादारी के किस्से जीवन मे उतारने का उदाहरण बनते है । चोर उचक्को से रक्षा इनकी फितरत है । ऐसे मे अगर ये भूखे रहे तो ये बड़े शर्म की बात हो सकती है । हालांकि ये नौबत शहर और नगर मे अधिक है इसकी वजह होटल वगैरह का संचालन बंद होना है । लिहाजा अब ये घरो पर आश्रित होते दिखायी दे रहे है जहां का पचहत्तर फीसदी विकल्प लाकडाउन से प्रभावित बेरोजगारी वगैरह खत्म कर दिया है । लोग खुद मोहताज के कगार पर हो रहे है ऐसे मे भला कोई और के बारे मे सोचे भी तो कैसे सोचे । वैसे इस देश का इतिहास रहा है कि अपनी भूख से कही अधिक भूख दूसरे की भूख को समझा गया है ऐसे मे यह उम्मीद बनता ही है कि कुकुर जैसे रक्षक वफादार जानवर भूख की वजह से हिंसक बनने नही पायेगे ।