राधिका की तरह से पछताएंगे फाइलेरिया की गोली न खाने वाले
– फाइलेरिया निरोधक दवाओं को खिलाने के लिए 29 फरवरी तक चलेगा अभियान
– घर घर जाकर टीमें लोगों को अपने सामने ही खिला रही हैं फाइलेरिया की दवाएं
संतकबीरनगर, 19 फरवरी 2020
जितेन्द्र चौधरी

खलीलाबाद ब्लाक क्षेत्र के एक गांव की 40 वर्षीया राधिका का बायां पैर 4 साल पहले फाइलेरिया के कृमि की चपेट में आने से फूल गया है। पैर फूलने से उसका जीवन कष्टदाई हुआ। वह चिकित्सकों के पास गई तो चिकित्सकों ने बताया इसका कोई इलाज नहीं है। जब उससे फाइलेरिया की दवा खाने के बारे में पूछा गया तो उसने बताया सरकार ने कई बार दवा खिलाई का दौर चलाया लेकिन उसने फाइलेरिया की दवा नहीं खायी । डाक्टरों ने उसे बताया उसने अगर फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के दौरान खिलाई जाने वाली दवाएं खाई होती तो उसे फाइलेरिया नहीं होता। अब उसे इस बात का पछतावा है
जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह ने बताया फाइलेरिया निरोधी दवा गत 17 फरवरी से खिलाई जा रही हैं। पहले दिन यह अभियान चिकित्सा केन्द्रों पर चला, लेकिन अब घर घर जाकर दवा खिलाने का कार्यक्रम चल रहा है। इस बीच कुछ लोगों के द्वारा दवाएं न खाने की बात भी सामने आ रही हैं। ऐसे लोगों को चिकित्सकों की टीम के साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम भी जाकर समझा रही है। इसके बावजूद पिछले 3 दिन में एक गांव में बघौली ब्लाक के जगदीशपुर गांव में 13 परिवारों के द्वारा फाइलेरिया की दवा खाने से इनकार कर दिया गया। लेकिन ऐसे लोगों को समझ लेना चाहिए कि फाइलेरिया पूरी तरह से लाइलाज बीमारी है। फाइलेरिया होने के बाद इसका इलाज नहीं किया जा सकता है। इसका केवल एक मात्र उपाय है कि फाइलेरिया निरोधी दवाओं को खुराक नियमित 5 साल तक लें, नियमित 5 साल तक इसकी खुराक लेने से फाइलेरिया के कृमि मर जाते हैं। इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि हर व्यक्ति जो 2 वर्ष से उपर का है वह फाइलेरिया की दवाओं को खाए। 29 फरवरी तक हर रविवार को माप अप राउण्ड चलेगा जिसके तहत जिन लोगों ने दवा नहीं खाई है, उनको दवा खिलाई जाएगी। पहले दवाएं वितरित की जाती थीं, जिनको प्राय : लोग नहीं खाते थे, लेकिन टीम अपने सामने लोगों को दवा खिलाकर उसके नाखून पर अमिट स्याही लगा रही है।
जगदीशपुर के 13 परिवारों को समझाएगी डब्ल्यूएचओ की टीम

जिले में अभी तक बघौली ब्लाक क्षेत्र के जगदीशपुर गांव में 13 परिवारों ने फाइलेरिया निरोधी दवा खाने से इनकार कर दिया। ऐसे लोगों को समझाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम के साथ ही पीसीआई की टीम भी वहां पर विजिट करेगी। साथ ही ऐसे लोगों को फाइलेरिया की दवा खाने के लिए प्रेरित करेगी। इसके लिए धर्मगुरुओं का भी सहारा लिया जाएगा।
केवल इनको नहीं खानी है फाइलेरिया की दवा
फाइलेरिया की दवा 2 साल से कम आयु के बच्चों को नहीं खानी है, साथ ही किसी भी गर्भवती महिला को भी दवा नहीं खिलाई जा सकती है। गंभीर रोगियों को भी फाइलेरिया की दवा नहीं खिलाई जा सकती है। इसके अतिरिक्त खाली पेट भी किसी को दवा न खिलाने के निर्देश दिए गए हैं।
संयुक्त निदेशक ने किया अभियान का निरीक्षण
फाइलेरिया अभियान का बस्ती से आए संयुक्त निदेशक डॉ आर के तिवारी ने बुधवार को अरबन पीएचसी मगहर तथा अरबन पीएचसी कांशीराम आवासीय क्षेत्र में जाकर अभियान का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होने आशा कार्यकर्ताओं को यह निर्देश दिया कि फाइलेरिया अभियान के दौरान कोई भी व्यक्ति छूटना नहीं चाहिए। उन्होने यह भी निर्देश दिया कि किसी को भी अपने सामने ही फाइलेरिया की दवा खिलाएं तथा उन्हें स्वच्छ जल भी पिला दें। साथ ही एलवेण्डाजॉल की गोली को चूसकर खाने के लिए दें। किसी को भी खाली पेट दवा न खिलाएं। कोई भी परेशानी दवा खाने के बाद हो तो तुरन्त ही इसकी जानकारी ब्लाक स्तरीय रैपिड रिस्पांस टीम को दें। जो भी लोग अभियान में लगाए गए हैं वे पूरी र्इमानदारी से अपने काम को पूरा करें। इस दौरान अरबन क्षेत्र के समन्वयक सुरजीत भी उनके साथ मौजूद रहे।
चित्र परिचय – फाइलेरिया उन्मूलन अभियान का बुधवार को निरीक्षण करते हुए संयुक्त निदेशक डॉ आर के तिवारी