अति गंभीर प्रसव वाले मरीज जाएंगे बड़े सेंटर
निर्देश –
· 102 एम्बुलेन्स चालकों को मुख्य चिकित्साधिकारी ने दिये निर्देश
· 4 बड़े स्वास्थ्य केंद्र सीएचसी हैसर, खलीलाबाद, मेंहदावल व जिला अस्पताल हैं
· मातृ शिशु कल्याण केन्द्र या पीएचसी पर नहीं होगा एचआरपी ऐसी महिलाओं का प्रसव
जितेन्द्र चौधरी
संतकबीरनगर, 10 दिसम्बर 2019


एम्बुलेन्स कर्मचारी अब गर्भवती महिलाओं के अति गंभीर मरीजों केस सीएचसी, पीएचसी नहीं बल्कि सीधे जिले में मौजूद 4 बड़े स्वास्थ्य केन्द्रों पर ले जाएंगे। इन बड़े स्वास्थ्य केन्द्रों में सीएचसी हैसर, खलीलाबाद, मेंहदावल और जिला अस्पताल शामिल हैं। इस संबंध में सीएमओ ने आवश्यक निर्देश दिये गए हैं।
सीएमओ डॉ हरगोविन्द सिंह ने बताया कि गर्भवती महिलाओं का रजिस्ट्रेशन होने के बाद उनके कार्ड पर मुहर लगती है। इसमें से एक श्रेणी हाई रिस्क प्रेग्नेन्सी (एचआरपी) यानि अति गंभीर मरीजों की भी होती है। इन महिलाओं की जांच हायर सेण्टर पर कराई जाती है। साथ ही जिले के सभी 102 एम्बुलेन्स चालकों को यह निर्देश दिया गया है कि जिन महिलाओं के मातृत्व कार्ड पर एचआरपी की मुहर लगी है, उनको सीधे जिले में स्थित चार हायर सेण्टरों पर ले जाएं। वहां विशेषज्ञों की निगरानी में उनका प्रसव कराया जाएगा। इससे मातृत्व मृत्युदर को रोकने में और सफलता मिलेगी। एचआरपी महिला के चिन्हीकरण के लिए एएनएम को 200 रुपए तथा आशा कार्यकर्ताओं को बड़े स्वास्थ्य केन्द्रों पर प्रसव कराने के लिए 300 रुपए की प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है।
कौन आता है अति गंभीर के दायरे में
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र खलीलाबाद की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ रेनू यादव बताती हैं कि हाई रिस्क प्रेग्नेन्सी का दायरा दो तरह से तय होता है। पहला वर्तमान शरीरिक संरचना के आधार पर जिसमें हीमोग्लोबीन 7 ग्राम से कम, ब्लड प्रेशर 140/ 90 से अधिक, वजन 35 किलो से कम, उम्र 35 वर्ष से अधिक, यूरीन में प्रोटीन व सुगर इत्यादि आते हैं। दूसरा पूर्व इतिहास के आधार पर तय होता है जिसमें 2 से अधिक एबार्सन, 1 मृत बच्चे का पैदा होना, 4 बार से अधिक गर्भवती होना, पिछला बच्चा आपरेशन से पैदा होना तथा प्रसव के दौरान पूर्व में कोई जटिलता जैसे बच्चा टेढ़ा होना, उल्टा होना, एचआईवी पाजिटिव होना आदि हो तो वह गर्भवती महिला हाई रिस्क प्रेग्नेन्सी के दायरे में आती है।
15 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं हैं एचआरपी
उत्तर प्रदेश तकनीकी सहयोग इकाई (यूपीटीएसयू ) के कम्यूनिटी हेल्थ एक्सपर्ट करुणेश मिश्रा बताते हैं कि सभी गर्भवती महिलाओं में 15 प्रतिशत महिलाएं एचआरपी के अन्तर्गत आती हैं। इनमें से 2.1 प्रतिशत महिलाएं सीवियर एनिमिक हैं, अर्थात जिनमें एनीमिया की प्रतिशतता 7 ग्राम से कम है। वहीं 2016 एनएफएचएस – 4 के आंकड़ों के अनुसार मातृत्व मृत्युदर प्रति 1 लाख महिला में 203 है। इसे कम करने के लिए ही एचआरपी महिलाओं का चिन्हीकरण किया जाता है तथा उसे आवश्यक सुविधाएं देकर मृत्युदर को रोका जाता है।
फोटो –
1 – डॉ हरगोविन्द सिंह, सीएमओ
2- डॉ रेनू यादव, स्त्री रोग विशेषज्ञ
3- एचआरपी ( हाई रिस्क प्रेग्नेन्सी ) का प्रतीकात्मक चित्र