एचआईवी संक्रमित 27 महिलाओं का हुआ संस्थागत प्रसव
– संस्थागत प्रसव से पैदा हुए 25 बच्चे एचआईवी निगेटिव पाए गए
– नेविरापिन सीरप के जरिए बच्चों में रोका जा रहा एचआईवी संचरण
संतकबीरनगर, 06 दिसम्बर 2019
जितेन्दर चौधरी

जिले में एचआईवी संक्रमित महिलाओं के प्रसव के लिए सेफ डिलिवरी किट के साथ प्रशिक्षित प्रसूति रोग विशेषज्ञ भी उपलब्ध हैं। बच्चों में एचआईवी के संचरण को रोकने वाली दवा भी उपलब्ध है। इस वर्ष अब तक 27 एचआईवी संक्रमित महिलाओं का संस्थागत प्रसव कराया गया, जिनमें 25 महिलाओं के बच्चे एचआईवी निगेटिव पाए गए हैं।
जिला एड्स कण्ट्रोल अधिकारी डॉ एस. डी. ओझा का कहना है कि संक्रमित गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य केन्द्र में ही प्रसव करवाना चाहिए। उन्होने बताया कि केन्द्र सरकार की यह मंशा है कि एचआईवी पाजिटिव पिता या माता की संतानें एचआईवी निगेटिव हों, इसके लिए जिला एड्स कण्ट्रोल सोसायटी द्वारा व्यापक सावधानियां बरती जा रही हैं। जनपद की प्रत्येक आशा कार्यकर्ता को यह जानकारी दी गई है कि कोई भी महिला अगर गर्भवती होती है तो अन्य जांचों के साथ उसकी एचआईवी जांच अवश्य कराएं। जांचोपरान्त यदि महिला एचआर्इवी पाजिटिव पाई जाती है तो उसको तुरन्त ही बस्ती और गोरखपुर में स्थित एआरटी सेण्टर ले जाएं। वहां पर उसे एचआईवी की दवाओं की नियमित डोज दिलाएं । प्रसव के लिए उसे पंजीकृत कराएं। प्रसव के दौरान उसे संस्थागत प्रसव केन्द्र पर ले जाएं। जहां पर सेल्फ डिलिवरी किट के जरिए उसका प्रसव कराया जाएगा। जन्म के 2 घण्टे से 72 घण्टे के भीतर नवजात बच्चे को नेविरापिन दवा पिलाई जाएगी। उन्होने बताया इसके बाद एचआईवी के बच्चे में संचरण की संभावना 95 प्रतिशत तक समाप्त हो जाती है। इस वर्ष जनवरी से लेकर अब तक कुल 27 महिलाएं एचआईवी संक्रमित पाई गईं। इन महिलाओं का हायर सेण्टर में प्रसव कराया गया। इनमें से 25 बच्चे एचआईवी से पूरी तरह से मुक्त हैं। जो दो बच्चे एचआईवी से ग्रसित हैं, उनका तथा माताओं का इलाज जारी है। जिले में अभी तक तमाम एचआईवी पीडि़त दम्पतियों के बच्चे पूरी तरह से एचआईवी से मुक्त हैं।
गर्भवती महिलाओं की होती है एचआईवी जांच
महिलाएं जब गर्भवती होती हैं तो उनकी विभिन्न जांचों के दौरान एचआईवी की भी जांच की जाती है। ताकि उसके बच्चे को एचआईवी के संक्रमण से बचाया जा सके। गर्भावस्था के दौरान जांच में अगर यह पता लगता है कि महिला एचआईवी संक्रमित है तो उसे तुरन्त ही एआरटी सेण्टर भेजकर एचआईवी के नियन्त्रण की दवाएं दी जाती हैं। यही नहीं उसे टीएलई की डोज दी जाती है। ताकि वह एक एचआईवी निगेटिव बच्चे को जन्म दे सके ।
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