


- शिव नाडर फाउंडेशन द्वारा जिला कारागार में चल रहा कार्यक्रम
- निरक्षर बंदियों को साक्षर बनाने का है लक्ष्य
संतकबीरनगर: प्रौढ़ शिक्षा का महत्व बहुत अधिक है क्योंकि यह न केवल व्यक्तियों को साक्षर बनाता है, बल्कि उन्हें सशक्त भी बनाता है, जिससे वे अपने जीवन और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। यह बातें मंगलवार को जनपद न्यायाधीश मोहन लाल विश्वकर्मा ने जिला कारागार में कही। वह शिव नाडर फाउंडेशन द्वारा चलाए जा रहे उद्घाटन कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि प्रौढ़ शिक्षा व्यक्तियों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरुक करती है, उन्हें बेहतर आजीविका के अवसर प्रदान करती है, और सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान करती है। उन्होंने बंदियों से अपराध दूरी बनाए रखने तथा कानून का पालन करते हुए समाज के मुख्य धारा से जुड़ने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने चिन्हित बंदियों को शैक्षणिक किट देकर प्रोत्साहित किया।
अपर जिला जज व विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट भूपेंद्र राय ने संस्था के पवित्र उद्देश्यों की प्रशंसा करते हुए बंदियों को इसका भरपूर उठाने की बात कही। अपर जिला जज व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव देवेंद्र नाथ गोस्वामी ने कहा कि जिला कारागार में चल रहे इस कार्यक्रम का निरक्षर बंदियों को भरपूर लाभ उठाना चाहिए।
जेल अधीक्षक कुलदीप सिंह ने कहा कि शिक्षा विभाग से स्थाई तौर पर शिक्षक मौजूद हैं, जो लोगों को शिक्षा देते हैं, परंतु प्रौढ़ शिक्षा का यह कार्यक्रम निश्चित तौर पर कारगर सिद्ध होगा। इस दौरान चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल अन्जय कुमार श्रीवास्तव, संस्था के कोऑर्डिनेटर कार्तिकेय पांडेय, मनोज कुमार शुक्ला, प्रशिक्षक राहुल आनंद, जेलर आर.के.वर्मा, डिप्टी जेलर नयन कमल सिंह समेत अन्य लोग मौजूद रहे।