सोशल आडिट बैठक के बारे मे हमे कुछ नही मालूम – प्रधान प्रतिनिधि
संतकबीरनगर
के के मिश्रा / हरीश सिंह
संतकबीरनगर :- मेहदावल – आम जनमानस मे विकासशील योजनाओ के क्रियान्वयन रुप आदि की जानकारी एवं जागरूकता लाने वाली प्रदेश सरकार की तीन प्रमुख बिन्दुओ वाली ग्राम पंचायत स्तरीय सोशल आडिट बैठक के बारे मे विकास खण्ड मेहदावल के ग्राम पंचायत नरायन पुर के प्रधान प्रतिनिधि को कुछ भी नही मालूम । सूत्रो की माने तो प्रतिनिधि का कहना रहा है कि सोशल आडिट बैठक के बारे मे हमे कोई जानकारी नही है । बी डी ओ , सी डी ओ के बार – बार कहने पर हमने एक गड्डे का काम मनरेगा से करवाया था जिसमे से अभी तक नब्बे हजार का भुगतान नही हुआ जबकि हमने मनरेगा देखने वाले बाबू आदि को बीसनो हजार रुपया बतौर कमीशन दे चुका हूं । ब्लाक को केवल रुपया चाहिए , हम कमीशन भी देते है । ऊपर से बार – बार जांच करने आने वाले अधिकारियो को खर्चा दो । छै लाख रुपया खर्च करके पंचायती चुनाव जीताया
हूं । प्रधान सूची मे मेरा नम्बर फीड है जिससे ब्लाक जिला व प्रदेश स्तरीय अधिकारियो की सेवा शुश्रुवा करना पड़ता है चूंकि पशु बाजार मालिक हूं मेरी भी प्रतिष्ठा है मै तंग आ चुका हूं इस प्रतिनिधित्व से क्यो कि बी डी ओ , सी डी ओ मनरेगा बाबू तथा पत्रकारो की सेवा करनी पड़ती है ये आडिट नही बल्कि प्रधानो को तंग करने का जरिया है । ग्राम पंचायतो के बकाया धनराशि न दिलाकर बल्कि उस पर रोक लगा दी गयी , क्या यही महात्मा गांधी व पूर्व प्रधानमन्त्री राजीव गांधी की पंचायती राज की व्यवस्था है जो पंचायतो के अधीन रहनी चाहिए ये कोरी कल्पना बनकर रह गयी । विकास का आडिट / स्थलीय सोशल आडिट जिसका मतलब मेरे समझ मे नही आता । कैसे होगा ग्राम पंचायतो का विकास ? सोशल आडिट के बहाने ग्राम पंचायतो / उनके प्रतिनिधिओ का हो रहा शोषण । कल से पत्रकारो का आना जाना लगा है पता नही कितने पत्रकार हो गये है तांता नही टूट रहा है ।