- फास्ट टैग में पैसे के बावजूद वसूल किया गया था दोगुना रकम
- नेशनल हाइवे के प्रोजेक्ट मैनेजर व हाइवे एडमिनिस्ट्रेटर के खिलाफ हुआ था मुकदमा
संतकबीरनगर : फास्ट टैग में पैसा रहने के बावजूद टोल प्लाजा कर्मियों के द्वारा पैसा न होने की बात कहकर रुपए एक सौ बीस की जगह रुपए दो सौ चालीस वसूल करना महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार सिंह व महिला सदस्य संतोष ने नेशनल हाइवे के प्रोजेक्ट मैनेजर/ हाइवे एडमिस्ट्रेटर के खिलाफ फैसला सुनाते हुए टोल प्लाजा वसूल किए जाने के तिथि से अंतिम भुगतान की तिथि तक 10 % ब्याज के साथ रुपए 30 हजार अतिरिक्त 60 दिनों के भीतर चुकाने का आदेश दिया है।
खलीलाबाद थानाक्षेत्र के बंजरिया पश्चिमी मोहल्ला निवासी विशाल शर्मा ने अद्विक लीगल कंसल्टेंसी के माध्यम से मुकदमा दाखिल कर कहा कि वह दिनांक 18 अगस्त 2023 को अपनी कार से लखनऊ से वापस खलीलाबाद आ रहे थे। वह जब मनकापुर रोड पिलखावन स्थित रोनाही टोल प्लाजा पर पहुंचे तब आपरेटर के द्वारा कहा गया कि फास्ट टैग में पैसा नही है जबकि उनके फास्ट टैग खाते में रुपए एक हजार पांच था। आपरेटर के द्वारा रुपए एक सौ बीस के बाजार जबरन रुपए दो सौ चालीस वसूल किया गया। इस बात की शिकायत हाइवे एडमिस्ट्रेटर से करने पर कोई ध्यान नही दिया गया। थक-हार कर न्यायालय की शरण में आना पड़ा।
न्यायालय में पत्रावली में दाखिल प्रपत्रों व साक्ष्यों का अवलोकन करने के उपरांत रोनाही टोल प्लाजा के खिलाफ फैसला सुनाते हुए वसूल किए गए धनराशि रुपए दो सौ चालीस वसूल किए जाने की तिथि से अंतिम भुगतान की तिथि तक 10% ब्याज के साथ 60 दिनों के भीतर चुकाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही मुकदमा खर्च व क्षतिपूर्ति के रुप में रुपए 30 हजार अतिरिक्त अदा करना होगा।