- संभावित मरीजों को जांच के लिए भेज रहे सरकारी अस्पताल
- पिछले तीन साल में 1127 क्षय रोगी जुड़े , 874 हुए स्वस्थ
संतकबीरनगर, 7 जनवरी 2023 ।

जनपद को क्षयमुक्त बनाने के लिए जरुरी है कि लक्षण नजर आने पर जितनी जल्दी संभव हो जांच करायी जाए और टीबी की पुष्टि हो तो तत्काल इलाज शुरु किया जाए । ऐसा न करने से एक टीबी रोगी साल भर में 15 लोगों को जाने अनजाने में टीबी का मरीज बना सकता है। स्वास्थ्य विभाग से कंधे से कंधा मिलाकर अब निजी चिकित्सक भी मरीजों की जांच और इलाज में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं । पिछले तीन साल में प्राइवेट चिकित्सकों ने जिले में 1127 क्षय रोगियों को चिन्हित करने के साथ 874 क्षय रोगियों को स्वस्थ भी बनाया है।

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ एस डी ओझा का कहना है कि जब तक कोई क्षय रोगी इलाज की प्रक्रिया में शामिल नहीं हो जाता है तब तक वह समाज में संक्रमण फैलाने की भूमिका में रहता है। चिन्हित क्षय रोगी की अपेक्षा पहचान से बाहर के क्षय रोगी ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं। पीपीएम समन्वयक ( प्राइवेट पब्लिक मिक्स कोआर्डिनेटर ) के माध्यम से जिले के सभी चिकित्सकों का डाटा तैयार किया जा रहा है। उनसे सम्पर्क करके संभावित क्षय रोगी को जिला क्षय रोग कार्यालय भेजने को प्रेरित किया जाता है। राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम की पब्लिक प्राइवेट मिक्स कोआर्डिनेटर कविता पाठक बताती हैं कि अभी तक जिले के कुल आठ चिकित्सकों को इस कार्यक्रम से जोड़ा जा चुका है। इनके माध्यम से क्षय रोगियों की पहचान करके उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है तथा उनको क्षयमुक्त करने के साथ ही क्षय रोग के प्रसार को रोका जा रहा है। जिले के अन्य चिकित्सकों से भी सम्पर्क किया जा रहा है, ताकि क्षय रोग के प्रसार को रोका जा सके। एक क्षय रोगी किरन ( बदला हुआ नाम ) बताती हैं कि वह डॉ अशरफ अली के क्लीनिक पर इलाज के लिए गयीं। वहां पर क्षय रोग की पुष्टि हुई तो डॉ अशरफ लेकर जिला क्षय रोग कार्यालय गए। वहां पर पंजीकरण कराया। अब उनको नियमित रुप से हर महीने 500 रुपए पोषण भत्ता के रुप में मिलता है तथा दवाएं भी मिलती हैं। चार माह इलाज के बीत गए हैं। पहली रिपोर्ट सामान्य आई है। चिकित्सक ने बताया कि शीघ्र ही वह क्षयमुक्त हो जाएंगी। वह नियमित रुप से मास्क का प्रयोग भी करती हैं तथा उनके परिवार के लोगों की भी जांच हुई तथा उनको दवाएं दी गयी हैं, ताकि उनको क्षय रोग से मुक्त बनाया जा सके।
क्षय उन्मूलन को जनान्दोलन बनाएं प्राइवेट चिकित्सक – सीएमओ

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अनिरुद्ध कुमार सिंह ने जिले के सभी चिकित्सकों से अपील की है कि अगर उनके पास ऐसा कोई मरीज आए जिसके अन्दर क्षय रोग के लक्षण दिखाई दे रहे हों तो इसकी सूचना जिला क्षय रोग कार्यालय को अवश्य दें। इससे रोगी एक सिस्टम में आ जाएगा तथा वह रोग का वाहक नहीं बनेगा। क्षय उन्मूलन को जनांदोलन बनाने के लिए जरूरी है कि हर कोई अपनी सहभागिता दिखाए, इसी के तहत प्राइवेट चिकित्सक भी अपनी भूमिका निभाएं और शत-प्रतिशत टीबी मरीजों को नोटिफाई कराएँ ताकि उन्हें सरकारी सुविधाएँ मिल सकें और वह जल्दी से जल्दी स्वस्थ बन सकें ।
प्राइवेट चिकित्सकों को मिलते हैं 1000 रुपए
क्षय रोग के जिला कार्यक्रम समन्वयक अमित आनन्द बताते हैं कि जो भी प्राइवेट चिकित्सक संभावित क्षय रोगी के बारे में सूचना देता है और जांच में क्षय रोग की पुष्टि होती है तो उसको 500 रुपए मिलते हैं। इलाज के बाद जब वह स्वस्थ हो जाता है तो 500 रुपए और दिए जाते हैं। इस प्रकार एक क्षय रोगी के चिन्हीकरण और स्वस्थ होने पर प्राइवेट चिकित्सक को कुल 1000 रुपए दिए जाते हैं।
निरन्तर किया जा रहा है क्षय रोगियों का चिन्हीकरण
कल्पित हास्पिटल की डॉ सोनी सिंह बताती हैं कि मेरे चिकित्सालय पर जो भी संभावित क्षय रोगी आते हैं उनको जिला क्षय रोग अस्पताल भेजकर उनकी सीबीनाट जांच कराई जाती है। अगर उसके अन्दर क्षय रोग की पुष्टि होती है तो हम उसे जिला क्षय रोग अस्पताल से जोड़कर इलाज कराया जाता है। इस वर्ष अभी तक 35 क्षय रोगियों का चिन्हीकरण किया जा चुका है।