
कानपुर,हुसैनी फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी हाजी क़मर आब्दी के दामाद थे ,
और खानदाने इज्तिहाद के धार्मिक विद्वान मौलाना सैयद सैफ अब्बास नकवी के भांजे मेजर सै0 अबुल कासिम ज़ैदी जो कि जवानी मे इस दुनिया से चल बसे । भांजे मेजर सैo अबुल कासिम ज़ैदी अपने छोटे से जीवन में भारतीय फौज मे पहले लेफ्टिनेंट फिर कैप्टन का पद हासिल करते हुए भारतीय सेना में मेजर के पद तक पहुंचे थे और इस समय लद्दाख में तैनात थे। मेजर अबुल कासिम बचपन से ही शिक्षा के क्षेत्र में कड़ी मेहनत कर रहे थे। बीटेक 23 साल की उम्र मे पूरा करने के बाद उसी साल भारतीय सेना में तैनात हुए। सेना में पदस्थापित होने के बाद भी वे लगातार परीक्षा देकर पदोन्नति के स्तर की ओर बढ़ रहे थे और इसी वर्ष उन्होंने leiutinent colonal की परीक्षा उत्तीर्ण की, जिसके बाद करनल के पद को पाने वाले थे ।लेकिन आयु की कमी के कारण अभी यह पद नही मिला था। 22 अक्टूबर 2022 को अपने परिवार से मिलने के लिए छुटटी लेकर लद्दाख से घर आए इसी बीच वे डेंगू की बीमारी से पीड़ित हो गए और एक छोटी सी बीमारी के बाद उनका इंतेकाल हो गया।तरहीम की मजलिस की मस्जिद अल्लाह हो अकबर जाजमऊ में हुई मजलिस का आगाज़ तेलावते कलामे पाक से हुआ।मजलिस को मौलाना सैयद रजा हैदर ज़ैदी ने खेताब किया।इस मौके पर प्रमुख रूप से हुसैनी फेडरेशन के चेयरमैन कबीर जैदी, परवेज जैदी, रईसुल हसन, रज़ि अब्बास, इब्ने हसन जैदी, डॉक्टर जुल्फिकार अली रिजवी, हाजी मुंसिफ अली रिजवी आदि सम्मिलत हुये।