ग्राम प्रधान प्रतिनिधि घनश्याम तिवारी घनश्याम मनरेगा रोजगार योजना की उड़ाई गई धज्जियां रोजगार से वंचित रहे मनरेगा मजदूर,


संत कबीर नगर 12 नवंबर 2022 भारत सरकार के द्वारा चलाई जा रही मनरेगा मजदूर योजना के नियमों को उड़ाई गई धज्जियां कार्य से वंचित रहे से वंचित रहे मनरेगा मजदूर, इतना ही नहीं , ६०_ 40 के रेश्यो को दरकिनार करते हुए 20 लाख से ऊपर के कराए गए कार्य उक्त मामले का खुलासा उस समय हुआ जब ग्राम पंचायत में सोशल ऑडिट कराने गई सोशल ऑडिट टीम के सामने जांच उपरांत पाया गया उक्त मामला विकासखंड बघौली के ग्राम पंचायत हावपुर भड़ारीकाहै,
बताते चलें कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत ग्राम पंचायतहावपुर भडारी में सोशल ऑडिट टीम के ब्लॉक कोऑर्डिनेटर पौली के गिरीश चंद यादव द्वारा अपने टीम के साथ ऑडिट की जा रही थी उस समय देखने को मिला उक्त ग्राम पंचायत में ग्राम प्रधान प्रतिनिधि घनश्याम तिवारी द्वारा अपने चहेते मनरेगा मजदूर 30 से 40 लोगों को मनरेगा योजना के तहत कार्य कराया गया जबकि उस गांव में टोटल 800 मनरेगा मजदूर पाए गए इतना ही नहीं वर्ष 21 22 के दौरान ग्राम पंचायत में कुल 59 आवास दिए गए थे जिसमें 35 आवास पूर्ण पाए गए 15 अक्टूबर पाए गए अपूर्ण आवासों में 6 आवास ऐसे मिले जो बुनियादी स्तर तक ही सिमट कर रह गए जबकि समस्त आवासों का भुगतान मैं मजदूरी के साथ हो गया है ग्रामीणों के अनुसार उक्त ग्राम पंचायत का प्रधान प्रतिनिधि घनश्याम तिवारी एक सामाजिक चोला पहनकर लूट का सूट के मामले में शातिर व्यक्ति है इसीलिए उक्त व्यक्ति द्वारा सारे नियम कानून ताक पर रखते हुए भ्रष्टाचार का खुला खेल खेला गया क्योंकि इसे प्रशासनिक भय नहीं दिखाई देता काश अगर जिला प्रशासन या मनरेगा सेल द्वारा ऐसे महावतो का समय-समय पर जांच कराकर कार्रवाई की गई होती शायद यही कारण है कि ग्राम प्रधान प्रतिनिधि घनश्याम तिवारी सदा इस भ्रम में रहे यदि कोई जांच भी होगी तो वह प्रधान तथा ग्राम पंचायत सेक्रेटरी पर होगी इसी का परिणाम हुआ कि खुलेआम भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया विकासखंड बघौली के ग्राम पंचायत हावपूर भडारी, प्रधानमंत्री आवास योजना के एक लाभार्थी द्वारा नाम न छापने की शर्त पर बताया गया कि आवास के मिले पैसे से मैंने अपने पुराने मकान का प्लास्टर कराया तथा आवश्यक बचे हुए धन को ग्राम प्रधान प्रतिनिधि द्वारा इस्तेमाल कर लिया गया,
सोशल ऑडिट टीम के सदस्यों को इन सभी विकास कार्यों की पत्रावली या नहीं दिखाई गई मजबूरन मनरेगा सेल से मिले एमआईएस रिपोर्ट के आधार पर सोशल ऑडिट करते हुए मामले का समापन कर दिया क्योंकि टीम को नाही तकनीकी सहायक या ग्राम प्रधान पंचायत सेक्रेट्री द्वारा खुली बैठक में आकर सपोर्ट न करके इस बात की तरफ इशारा करता है कि इन सभी भ्रष्टाचार में इन लोगों का हाथ भी शामिल है देखना अब यह है कि क्या सोशल ऑडिट टीम इन सभी भ्रष्टाचार में गमन हुए पैसों का रिकवरी करने के लिए रिपोर्ट मनरेगा सेल अथवा जिला विकास अधिकारी या मुख्य विकास अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करता है प्रस्तुत करने के उपरांत क्या उपरोक्त अधिकारियों द्वारा इन पर कोई कार्यवाही या रिकवरी की जाएगी यह आने वाला समय ही गवाह होगा |
रिपोर्ट :- के के मिश्रा