मुस्लिम महिलाएं पर्दा करें और सादगी से गुजारें ज़िंदगी।
पुराना गोरखपुर गोरखनाथ में मुस्लिम महिलाओं का जलसा।
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
दीन-ए-इस्लाम लड़कियों को भी शिक्षा हासिल करने का अधिकार देता है। बेहतर शिक्षा की वजह से ही आज मुस्लिम समाज की लड़कियां विभिन्न ओहदों पर कार्यरत हैं। मुस्लिम लड़कियां समाज के विकास के लिए भी योगदान दे रही हैं। लड़कियां बेहतर शिक्षा से जुड़ सकें व समय के साथ सामाजिक व्यवस्था को बेहतर बनाने में अपना योगदान दे सकें, इसके लिए पहल की जा रही है। दीन-ए-इस्लाम ने ही सबसे पहले महिलाओं को अधिकार दिए हैं। दीन-ए-इस्लाम में महिलाओं के स्वाभिमान की सुरक्षा सर्वोपरि है।
जिला गया, बिहार की मुफ़्तिया फिरदौस जबीं अमजदी ने अराकीने अंजुमने ख़्वातीने इस्लाम कमेटी की ओर से इमाम बारगाह पुराना गोरखपुर गोरखनाथ में जलसा-ए-ख़्वातीन से ख़िताब करते हुए बतौर मुख्य अतिथि उक्त बातें कहीं। उन्होंने अल्लाह के हुक्म को मानने, पैग़ंबर-ए-आज़म हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नतों पर अमल करने, मुस्लिम महिलाओं से पर्दा करने के साथ ही सादगी से ज़िदंगी गुजारने की नसीहत की।
विशिष्ट अतिथि मुफ़्तिया ग़ाजिया खानम अमजदी ने मुस्लिम महिलाओं को जागरूक करते हुए कहा कि कहा कि दीन-ए-इस्लाम ने महिलाओं को समाज में एक बेहतरीन मुक़ाम अता करके उनकी इज़्ज़त में इज़ाफ़ा किया है। दीन-ए-इस्लाम में महिलाओं की बुलंदो बाला अज़मत है। आज समाज में महिलाओं की आज़ादी के नाम पर महिलाओं को घरों से निकाल कर फैशन परस्ती, आज़ादी के नारों के जरिए महिलाओं का चैन सुकून छीन लिया गया है। आजकल मुस्लिम लड़कियों की गैर मुस्लिम लड़कों के साथ इश्क़ो आशिक़ी और शादी ब्याह के वाक़्यात मंज़रे आम पर आ रहे हैं। यह दरअसल दीन-ए-इस्लाम से दूरी का नतीजा हैं। ईमान चला गया तो दुनिया व आख़िरत की ज़िंदगी नाकाम हो जाएगी। माएं घरों में अपनी बच्चियों को इस्लामी माहौल पर अमल करने की तरफ़ प्रेरित व जागरूक करें। अल्लाह और पैग़ंबर-ए-आज़म हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के तरीके पर कारबन्द रहने की तलक़ीन करें।
विशिष्ट अतिथि आलिमा नाजिश फ़ातिमा शम्सी ने कहा कि दीन-ए-इस्लाम ने बेटी की बेहतरीन तरबियत पर जन्नत की खुशख़बरी, बेहतरीन बीवी को नेमत और माँ के क़दमों तले जन्नत कह कर औरत की अज़मत को बुलंदो बाला कर दिया है। शिक्षा किसी भी समाज की रीढ़ होती है। कोई समाज तब तक तरक्की नहीं कर सकता जब तक कि वह शिक्षा हासिल नहीं करेगा। शिक्षा के साथ संस्कार भी हासिल करना जरूरी है। संस्कार के बिना शिक्षा व्यर्थ है। लड़कियों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाना बेहद जरूरी है। लड़कियां दीनी शिक्षा के साथ आला असरी शिक्षा भी हासिल करें, मगर इस्लामी तहज़ीबो तमद्दुन को थामे रखें।