जमीन खरीद फरोक्त मे बड़े – बड़े खेल लेखक से अधिकारी तक होते है मालामाल
के के मिश्रा / जी एल वेदान्ती
सन्त कबीर नगर – पारदर्शी कानून और कर्त्तव्यनिष्ठ पदाधिकारियो को कूट रचित बैनामा का दस्तावेज दृष्टि से कैसे ओझल हो गया यह अपने आप मे बहुत बड़ा आश्चर्य है इसे किस नजर से देखा जाय वक्त के पहले कुछ कहना मुनासिब नही होगा । तीन बिस्वा जमीन के बदले जहां उनतिस बिस्वा जमीन का दस्तावेज विक्रेता के आंखो के सामने तैयार हो जाता है और उसे नजर नही आता है वही विक्रेता से जमीन की कीमत सहित दस्तावेज मे लिखा जमीन सम्बधी रकबा चौहद्दी और कीमत रजामंदी को देखने वाले उप निबंधक को जालसाजी करतब दिखायी नही दिया । वहां सिवाय दुर्भाग्य के कुछ नही कहा जा सकता , चाहे वह विक्रेता के दुर्भाग्य की बात हो या उप निबंधक के सदाचार सत्यनिष्ठ कर्त्तव्य पारायणता के दुर्भाग्य की बात हो । देखा जाय तो कूट रचना का खेल केवल बैनामा की दुनिया भर मे ही नही है वरन वरासत की दुनिया मे भी है जीवित जहां मृत हो गया है वही उसके अधिकार का अधिकारी कोई और हो गया है ऐसे बहुतायत मामले प्रकाश मे है ।
उल्लेखनीय है कि तहसील खलीलाबाद के अंतर्गत नेदुला गांव निवासी राम प्यारे की तीन बिस्वा जमीन का सौदा करके मध्यस्थता करने वाला गांव का प्रदीप शर्मा क्रेता अनिल मिश्रा राजू मिश्रा उर्फ राजीव मिश्रा एवं गवाह राहुल कुमार ने आपसी षड्यन्त्र करके उनतिस बिस्वा जमीन बैनामा करवा लिए । मौके पर न विक्रेता रामप्यारे को पता चला और न बैनामा अधिकारी को पता चला । यही नही विश्वसनीय सूत्र की माने तो आधा घंटा बाद दस्तावेज लेखक तेज प्रकाश श्रीवास्तव के नाम अट्ठाइस सौ वर्ग फीट कराये गये बैनामा मे से बैनामा हो गया । ऐसे मे यह सवाल उठता है कि खुले तौर पर हुए इस कूट रचित जालसाजी का किसी को पता क्यो नही चला ? बैनामा करने वालो की अगर मानी जाय तो ऐसा कोई समय नही होता है जो कूट रचना जालसाज की पोल न खोल दे । आज के दौर मे अब कोई ऐसा नही है जिसके यहां कोई पढ़ा लिखा व्यक्ति न हो । घर से लेकर टोला मोहल्ला गांव मे पढ़े लिखे बहुतायत लोग मिल जायेगे , पढ़े लिखे लोगो की जरूरत कही महसूस की जाय या नही पर जमीनी मामले मे खरीदने या बेचने के समय इनकी कमी जरूर दूर की जाती है । वही बैनामा के समय दस्तावेज की तैयारी से लेकर बैनामा करने तक ऐसी दृष्टि होती है जिनकी नैतिक जिम्मेदारी सच्चाई के दामन को देखना ही नही होता है अपितु उसे सत्य की कसौटी पर खरा उतरता देखना होता है । बहरहाल तीन बिस्वा जमीन की जगह उनतिस बिस्वा जमीन का बैनामा बड़े ही इत्मिनान के साथ हो गया है । यह और बात है कि तहरीर एवं आन्दोलन के बूते जालसाजो के ऊपर कानून का डंडा पड़ चुका है और वे लोग संगीन धाराओ मे जेल जा चुके है । वही प्रभारी मंत्री के पहल पर उप निबंधक की सन्दिग्ध भूमिका के मद्देनजर विभागीय जांच की टीम गठित कर दी गयी है जो मण्डलीय अधिकारी ए आई जी कमलेश कुमार शुक्ला को जांच का जिम्मा सौपा गया है । पर अपना पूरा हक गंवा चुके रामप्यारे को अपनी जमीन कब मिलेगी इसे न्यायकाल के सिवा कोई बता नही सकता है ।