डा.प्रेम त्रिपाठी व समाजसेवी चन्द्रमणि पाण्डेय के नेतृत्व में ग्रामीण चिकित्सकों ने 07 सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजे…
बस्ती / ब्यूरो रिपोर्ट

आज ग्रामीण स्वास्थ्य सेवक वेलफेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के बैनरतले एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा.प्रेम त्रिपाठी व समाजसेवी चन्द्रमणि पाण्डेय सुदामा के नेतृत्व में सैकड़ों शहरी व ग्रामीण निजी चिकित्सकों ने जिलाधिकारी बस्ती के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजे गये ग्यापन में जांच के नाम पर हो रहे उत्पीड़न को रोकने व स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की मांग करते हुए कहा कि हम लोगों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गतिविधियों में जुटे लोगों को केन्द्र और प्रदेश सरकार के कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने, उन्हें प्रशिक्षण दे कर रजिस्टर्ड करने हेतु निरंतर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस संबंध में माननीय, स्वास्थ्य मंत्री भारत सरकार, स्वास्थ्य मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार, आप श्रीमान जी को समय समय पर अनेकों पत्र दिए गये किंतु अभी तक कोई प्रभावी पहल नहीं हो सका है । समाजसेवी सुदामा ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने हेतु इनका उत्पीड़न बंद कर इन्हें प्रशिक्षण दिलाया जाय उन्होंने कहा कि कोविड काल में जब सभी चिकित्सालय बंद हो गये थे तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ साथ जागरूकता अभियान का कार्य इन्हीं ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों ने किया इसके लिए कुछ स्वास्थ्य सेवकों को सम्मानित भी किया गया था। किन्तु आज उन्हीं का उत्पीड़न जांच के नाम पर धनउगाही कर किया जा रहा है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष डा.प्रेम त्रिपाठी ने कहा कि हम ग्रामीण स्वास्थ्य सेवक वेलफेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के पदाधिकारी, सदस्य, चिकित्सक, स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में कार्य करते हुए सरकार व समाज का सहयोग भी कर रहे है60प्रतिशत मरीजों का देखरेख हम ही करते हैं कारण सरकारी चिकित्सालयों में पर्याप्त चिकित्सक हैं ही नहीं ऐसे में हम लोगों की समस्याओं के प्रभावी निस्तारण हेतु हमारी निम्नवत मांगो का निस्तारण कराया जाय
1-ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों का पंजीकरण कराकर उन्हें विहार आदि राज्यों की भांति प्रशिक्षण कराया जाए।
2-ग्रामीण क्षेत्रों में नाम मात्र का धन लेकर विपरीत मौसम वा रात्रि में भी आकस्मिक सेवा देने वालों को झोलाछाप कह कर प्रताड़ित ना किया जाए वरन उन्हें ग्रामीण स्वास्थ्य सेवक का दर्जा दिया जाए।
3-मरीजो को जिला अस्पताल या सरकारी अस्पतालों में पहुंचाने पर उन्हें प्रोत्साहन दिया जाय।
4-केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा चलाए जाने वाले स्वास्थ्य कार्यक्रमों में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों की भागीदारी सुनिश्चित कराया जाय।
5-प्रदेश में चिकित्सकीय कार्य कर रहे ऐसे अनुभवी लोगों को जिनके ऊपर प्राथमिक उपचार हेतु मुकदमे पंजीकृत हैं उन्हें भी दोषमुक्त करार दिया जाए।
6-ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों का पंजीकरण कराकर उन्हें उनकी योग्यता अनुसार प्राथमिक उपचार हेतु प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया जाय।
7-ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों को प्रशिक्षण के माध्यम से (यथा प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना) के माध्यम से स्वावलंबी बनाया जाय।