
बस्ती / ( उत्तर प्रदेश )
उत्तर प्रदेश में अखिल भारतीय फार्मासिस्ट एसोसिएशन द्वारा घोषित बंद को ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। प्रदेश भर में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों ने अपनी-अपनी क्लिनिक बंद रखकर आंदोलन को मजबूती प्रदान की है। जानकारी के अनुसार प्रदेश में लगभग एक से डेढ़ लाख क्लिनिक बंद रहने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं, जिससे मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पर मरीजों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बंद का असर सबसे अधिक दिखाई दे रहा है, जहां आम लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रेम त्रिपाठी ने कहा कि यह केवल समर्थन मात्र है। उन्होंने कहा, “जिस दिन ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों ने पूर्ण रूप से बंद किया, उस दिन सरकारों को हमारी सेवाओं और हमारी उपयोगिता का वास्तविक अहसास होगा।”
वहीं गाजीपुर और बलिया क्षेत्र में बंद को सफल बनाने के लिए क्षेत्र भ्रमण कर डॉ रमाकांत यादव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व और समन्वय प्रयासों से आंदोलन को क्षेत्रीय स्तर पर मजबूती मिली।