मोदी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता के विस्तार के लिए सात नए आईआईएम, छह नए आईआईटी, एक नया केंद्रीय विश्वविद्यालय, एक नया आईआईटीटी, एक नया एनआईटी और 104 से भी अधिक केन्द्रीय विद्यालय और 62 नए नवोदय विद्यालय खोले हैं। यह आंकड़े सिद्ध कर रहे हैं कि नए भारत का भविष्य गढ़ने के लिए नई पीढ़ी को शिक्षित करने के लिए मोदी सरकार गंभीरता से कार्य रही है। education India Modi government
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘देश की आकांक्षा को पूरा करने का महत्वपूर्ण माध्यम शिक्षा नीति और शिक्षा व्यवस्था को माना है। 2014 में प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद ही मोदीजी ने सबका साथ, सबका विकास के साथ ही सबको शिक्षा, अच्छी शिक्षा के संकल्प को पूरा करने के लिए जो कदम उठाए थे, आज उसके अच्छे परिणाम हमारे सामने हैं। प्रधानमंत्री मोदीजी की स्पष्ट अवधारणा है कि किसी भी देश की प्रगति के लिए शिक्षा न केवल समावेशी होनी चाहिए बल्कि समान होनी चाहिए। तेजी से बदलते युग में शिक्षकों को भी नई व्यवस्थाओं और तकनीकों के मद्दनेजर तैयार किया जा रहा है। मोदीजी छात्रों के साथ ही शिक्षकों की भावनाओं का पूरा ध्यान रखते हैं।
उनका मानना है कि भारत के शिक्षक वैश्विक मानक पर खरे उतरे हैं। भारत के संस्कारों के कारण देश में शिक्षक और बच्चों के बीच जीवन भर का पारिवारिक रिश्ता होता है। जुलाई 2018 में 2022 तक शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक लाख करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा की गई थी। मोदीजी का शिक्षा के साथ ही विद्याथियों के सम्पूर्ण विकास पर जोर है। इसी कारण उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद और परीक्षा के तनाव से मुक्त रहने का मंत्र देने के लिए ‘परीक्षा पर चर्चा’ का आयोजन किया।
मोदीजी की पहल पर देश में शिक्षा नीति-2020 की घोषणा के साथ ही सम्पूर्ण शिक्षा जगत में एक बड़ा परिवर्तन आया है। शिक्षा नीति में मोदीजी के शिक्षा जगत को लेकर लिए गए संकल्पों को पूरा करने का बीड़ा उठाया गया है। विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ी है। स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं में बढ़ोतरी हुई है। शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। देश के 83 प्रतिशत स्कूलों में बिजली पहुंच गई है। 2014 तक केवल 55 प्रतिशत स्कूलों में बिजली थी। मोदी सरकार के सात वर्षों के कार्यकाल में पुस्तकालय और अध्ययन कक्षों की सुविधा 84 प्रतिशत स्कूलों में हो गई है। पहले ये सुविधाएं केवल 15 प्रतिशत स्कूलों में थी। प्रधानमंत्री की स्वच्छ भारत योजना के तहत हर स्कूल में लड़कियों के लिए अलग से शौचालय बनाने पर जोर दिया गया।
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स्कूलों में स्वच्छ पीने के पानी के साथ ही हाथ धोने की सुविधाएं दी गई हैं। शौचालयों की स्थिति पहले से अच्छी हुई है। देश के 97 प्रतिशत स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय हैं। हाल ही में मोदी सरकार ने समग्र शिक्षा अभियान-दो को स्वीकृति दी है। इस अभियान के तहत प्री-स्कूल से 12वीं कक्षा तक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना है। स्कूलों में बाल वाटिका, स्मार्ट क्लासरूम, प्रशिक्षित शिक्षकों की व्यवस्था की जाएगी। इस अभियान में लड़कियों का विशेष ध्यान रखने की व्यवस्था की गई है।
पिछले सात वर्षों में महाविद्यालयों की स्थापना में सरकार ने पूरी मेहनत से काम किया। पिछले सात वर्षों में रोजाना दो नए महाविद्यालय खोले गए। वर्ष 2013-14 में देश में कॉलेजों की कुल संख्या 36,634 थी। 2019-20 में कॉलेजों की संख्या 42,343 हो गई थी। विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए कोई कठिनाई न हो, इसके लिए विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ाई गई है। हर सप्ताह एक नया विश्वविद्यालय खोला गया। वर्ष 2013-14 में देश में कुल 723 विश्वविद्यालय थे। वर्ष 2019-20 में इनकी संख्या बढ़कर 1043 हो गई। सात वर्षों में देश में 320 नए विश्वविद्यालय खोले गए। सरकार द्वारा घोषित प्रमुख विश्वविद्यालयों में लद्दाख का पहला विश्वविद्यालय भी शामिल है। पूर्वोत्तर राज्यों में 22 नए विश्वविद्यालय खोले गए। देश में पहली बार फॉरेंसिक विश्वविद्यालय और वड़ोदरा में राष्ट्रीय रेल तथा परिवहन विश्वविद्यालय की भी स्थापना की गई।
मोदीजी की पहल पर शिक्षकों की कमी को दूर किया जा रहा है। स्कूलों में लगातार शिक्षकों की भर्ती हो रही है। शिक्षकों की नियुक्ति में महिला शिक्षकों की संख्या बढ़ाई गई है। मोदी सरकार में महिला शिक्षकों की संख्या बढ़ी है। 2019-20 में पुरुष शिक्षक 47.7 लाख और महिला शिक्षक 49.2 लाख थीं। 2012-13 में पुरुष शिक्षकों की संख्या महिलाओं शिक्षकों की तुलना साढ़े छह लाख ज्यादा थी। इस समय प्राइमरी स्कूलों में 15.8 लाख पुरुष और 19.7 लाख महिलाएं अध्यापन का कार्य रही है।
मोदी सरकार की शिक्षकों की कमी दूर करने के प्रयासों के कारण स्कूलों में छात्र-शिक्षक का अनुपात भी सुधरा है। 2014 में 34 बच्चों पर एक शिक्षक था। शिक्षकों की संख्या बढ़ने के कारण अब 26 बच्चों पर एक शिक्षक है। अपर प्राइमरी में अब प्रति शिक्षक केवल 18 बच्चे ही हैं। मोदी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता के विस्तार के लिए सात नए आईआईएम, छह नए आईआईटी, एक नया केंद्रीय विश्वविद्यालय, एक नया आईआईटीटी, एक नया एनआईटी और 104 से भी अधिक केन्द्रीय विद्यालय और 62 नए नवोदय विद्यालय खोले हैं। यह आंकड़े सिद्ध कर रहे हैं कि नए भारत का भविष्य गढ़ने के लिए नई पीढ़ी को शिक्षित करने के लिए मोदी सरकार गंभीरता से कार्य रही है।