क़ुर्बानी अदा करने का तरीका बताया गया
शाही जामा मस्जिद में दर्स का 7वां दिन

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
शाही जामा मस्जिद तकिया कवलदह में क़ुर्बानी पर चल रहे दर्स (व्याख्यान) के 7वें दिन हाफ़िज़ आफताब ने क़ुर्बानी करने का तरीका बताते हुए कहा कि पहले जानवर को अच्छी तरह खिला पिला लें। छुरी तेज कर लें। ज़बह से पहले कुरआन-ए-पाक में दर्ज खास दुआ पढ़ें। इसके बाद जानवर को बायें पहलू पर इस तरह लिटाएं कि किब्ला की तरफ उसका मुंह हो और अपना दाहिना पांव उसके पहलू पर रख कर तेज छुरी से ‘‘बिस्मिल्लाह अल्लाहु अकबर’’ पढ़ कर ज़बह करें फिर दुआ पढ़ें “अल्लाहुम्म तक़ब्बल मिन्नी कमा तक़ब्बल त मिन खलीलिका इब्राहिम अलैहिस्सलाम व हबीबि क मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम’’। अगर कुर्बानी अपनी तरफ से हो तो ‘‘मिन्नी’’ और अगर दूसरों की तरफ से हो तो ‘‘मिन्नी’’ की जगह ‘‘मिन’’ कहें और उसका और उसके बाप का नाम लें। हदीस में आया है कि पैगंबर-ए-आज़म हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि सींग वाला मेढ़ा लाया जाए जो स्याही में चलता हो और स्याही में बैठता हो, पेट स्याह हो और आंखें स्याह हो, क़ुर्बानी के लिए हाजिर किया गया। पैगंबर-ए-आज़म ने फरमाया छुरी लाव, फिर फरमाया इसको पत्थर पर तेज कर लो। फिर पैगंबर-ए-आज़म ने छुरी ली और मेढ़े को लिटाया और उसे ज़बह किया और दुआ की इलाही तू इसको मेरे व मेरी आल और उम्मत की तरफ से कुबूल फरमा। लिहाजा जो लोग हैसियत वाले हों वह अपनी तरफ से क़ुर्बानी करवाने के बाद पैगंबर-ए-आज़म की तरफ से भी क़ुर्बानी करवाएं तो बेहतर है।
अंत में सलातो सलाम पढ़कर मुल्क में अमनो अमान व भाईचारे की दुआ मांगी गई। दर्स में हाफ़िज़ अब्दुर्रहमान, हाफ़िज़ आरिफ, मो. कासिद, बशीर खान, मो. इरफ़ान, मो. फरीद, हाजी मो. यूनुस, मो. अफ़ज़ल, इकराम अली, मो. अरमान, जलालुद्दीन, अली हसन आदि ने शिरकत की।