जुमा की तकरीरों में बयान की क़ुर्बानी की फज़ीलत, साफ-सफाई की हिदायत।

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
आने वाली 21 जुलाई को ईद-उल-अज़हा पर्व के मद्देनज़र शहर की तमाम मस्जिदों के इमामों ने जुमा की तकरीर में क़ुर्बानी की फज़ीलत बयान की। पैगंबर हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम व हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम की क़ुर्बानी का वाकया बयान किया। अवाम से अपील की गई कि पर्व में कोविड 19 के मद्देनज़र साफ-सफाई का खास ध्यान रखा जाए। क़ुर्बानी का गोश्त पास-पड़ोस, गरीबों, फकीरों में जरूर बांटा जाए। क़ुर्बानी के जानवर की खाल के साथ बेहतर रक़म मदरसों को दी जाए।
नूरानी मस्जिद तरंग क्रासिंग में इमाम हाफ़िज़ मो. अशरफ ने तकरीर में कहा कि मख्सूस जानवर को मख्सूस दिन में ब नियते तकर्रुब ज़बह करना क़ुर्बानी है। क़ुर्बानी करवाना वाजिब है। क़ुर्बानी हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की सुन्नत है। जो इस उम्मत के लिए बाकी रखी गई और पैगंबर-ए-आज़म हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम को क़ुर्बानी करने का हुक्म दिया गया। हदीस में आया है कि पैगंबर-ए-आज़म हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि दसवीं ज़िलहिज्जा में इब्ने आदम का कोई अमल अल्लाह के नज़दीक क़ुर्बानी करने से ज्यादा प्यारा नहीं है। कोविड 19 को ध्यान में रखते हुए साफ-सफाई पर खास ध्यान दें।
बेलाल मस्जिद इमामबाड़ा अलहदादपुर में इमाम कारी शराफत हुसैन क़ादरी ने कहा कि अल्लाह ने क़ुरआन-ए-पाक में क़ुर्बानी करने का हुक्म दिया है। मालिके निसाब पर क़ुर्बानी वाजिब है। क़ुर्बानी से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों को गड्ढ़ों में दफ़न किया जाए। हड्डियां सड़कों पर न फेंके। क़ुर्बानी का गोश्त पास-पड़ोस, गरीबों व फकीरों में जरूर बांटें। जिनके यहां क़ुर्बानी न हुई हो उनके घर सबसे पहले गोश्त भेजवाएं। खाल ले जाने वालों के साथ बेहतर सुलूक करें। क़ुर्बानी की खाल सदका कर दें या किसी दीनी मदरसें को दें साथ में मदरसे को अच्छी रक़म से भी नवाजें।
सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफ़रा बाज़ार के इमाम हाफ़िज़ रहमत अली निज़ामी ने सामूहिक क़ुर्बानी स्थलों पर पर्दा लगाकर क़ुर्बानी करने की अपील की साथ ही कहा कि दीन-ए-इस्लाम ने चौदह सौ साल पहले स्वच्छता को आधा ईमान करार दिया है। दीन-ए-इस्लाम चौदह सौ साल से साफ-सफाई का दर्स देता चला आ रहा हैं। साफ-सफाई अल्लाह को पसंद हैं इसका हर मुसलमान को खास ख्याल रखना चाहिए। क़ुर्बानी खुश दिली से करें।
सुब्हानिया जामा मस्जिद तकिया कवलदह के इमाम मौलाना जहांगीर अहमद अज़ीज़ी ने हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम व हजरत इस्माईल अलैहिस्सलाम का वाकया बयान किया। उन्होंने कहा कि मुसलमानों का हर पर्व शांति का दर्स देता हैं। लिहाजा इसका ख्याल रखें कि हमारे किसी काम से किसी को भी जर्रा बराबर भी तक़लीफ न होने पाए।साफ-सफाई का खास तौर पर ख्याल रखें। जिन पर क़ुर्बानी वाजिब है वह क़ुर्बानी जरूर कराएं। यह क़ुर्बानी उनके बख्शिश का जरिया बनेगी।
चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर के इमाम हाफ़िज़ महमूद रज़ा क़ादरी ने कहा कि दीन-ए-इस्लाम में दो ईद है। ईद-उल-फित्र व ईद-उल-अज़हा। दोनों ईद बेहद खास है। साफ-सफाई का ख्याल जरूर रखें। कुर्बानी का फोटो-वीडियो न बनाएं और न ही अपने क़ुर्बानी के जानवर की नुमाइश करें। क़ुर्बानी में बढ़चढ़ कर हिस्सा लें।क़ुर्बानी दिखावे के लिए नहीं अल्लाह की रज़ा के लिए होनी चाहिए।
बहादुरिया जामा मस्जिद रहमतनगर में मौलाना अली अहमद ने बताया कि हदीस में है कि पैगंबर-ए-आज़म हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि ईद-उल-अज़हा के दिन सबसे पहले जो काम हम करेंगे वह यह है कि नमाज़ पढ़ेगें फिर उसके बाद क़ुर्बानी करेंगे। जिसने ऐसा किया उसने हमारे तरीके को पा लिया और जिसने नमाज़ से पहले ज़बह कर लिया वह गोश्त है जो उसने पहले से अपने घर वालों के लिए तैयार किया। क़ुर्बानी से उसका कुछ ताल्लुक नहीं है। क़ुर्बानी हमें दर्स देती है कि जिस तरह से भी हो सके अल्लाह की राह में खर्च करो। कुर्बानी की खाल दफ़न न की जाए, बल्कि खाल के साथ मदरसे वालों को एक अच्छी रक़म भी दी जाए ताकि मदरसा सालभर की आर्थिक जरुरतें पूरी कर सके।