नौजवानो की नशे की लत से दूरी तय करेगा देश का विकास – शकुन्तला तोमर
॥ जिन्दगी को हां नशे को ना ॥

लखनऊ – समाजिक दर्पण सोशल मिरर फाउंडेशन के तत्वाधान मे अंतर्राष्ट्रीय मद्य निषेध दिवस पर विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ । वर्चुअल विचार गोष्ठी का आयोजन का शुरुआत संस्थापिका श्रीमती शकुन्तला तोमर ने सरस्वती वंदना से किया । ” नशा ही नाश का कारण ” है के शीर्षक गोष्ठी पर विचार व्यक्त करते हुए श्री तोमर ने कहा कि आजकल नशे के लत मे देश का हर नौजवान लिप्त है । यह नशे का लत ही है जो देश के नौजवानो के बर्बादी का कारण है । इसके कारण उनके अन्दर जो नैतिकता है और जो भावनात्मक समावेश है उसका जो शेंस है वह घटता जा रहा है जब भावनात्मकता होती है तभी रचनात्मकता होती है कितने ही परिवारो के चिराग है वो नशे की आग मे जलकर भस्म हो जा रहे है जो बेहद चिंताजनक है इसके समूल नाश के लिए हर व्यक्ति को आगे आना होगा । देश को अगर हम विकास के रूप मे देखना चाहते है तो हमे नौजवानो को नशे की लत से दूर करना होगा । इसी क्रम मे संचालन कर रही भारतीय नागरिक परिषद की महासचिव व शिक्षिका रीना त्रिपाठी ने देश के प्रधानमंत्री व राज्य के मुख्यमंत्री से नशा मुक्ति पर ऐसी नीति बनाने का आग्रह किया जिससे देश नशा मुक्त हो जाय । उदाहरण के तौर पर उन्होने 1977 के दौरान मोरारजी देसाई की सरकार मे हुए दो साल के नशे पर पूर्ण प्रतिबंध का जिक्र किया । वेस्टर्न इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन नासिक के महासचिव सूर्यकांत पवार ने कहा कि समाज मे नशे की ये जो किड़ है इसको हमे जल्द से जल्द खत्म करने की जरूरत है अगर हम समाज मे खुद को प्रतिष्ठित या एजुकेटेज समझते है तो यह हमारा नैतिक कर्त्तव्य है कि इस पर हम ध्यान दे । समाजिक कार्यकर्ता व शिक्षिका डां सुमन दुबे ने कहा कि एक मां बहुत कुछ कर सकती है चाहे वह लड़का हो या लड़की हो , शुरू से इस बात का एहसास कराये कि नशे का सेवन गलत है इसे स्वीकर नही किया जायेगा तो नशा मुक्ति अभियान को विशेष बल मिलेगा । हर लड़कियां इस एजेंडे को रख सकती है कि हम उस लड़के से शादी नही करेगी जो लड़का नशा करता है । इसी क्रम मे प्रदेश नशा मुक्त समाज अभियान प्रभारी हरियाणा संतोष पासवान आदि ने अपने – अपने विचार व्यक्त किये ।