आवास से वंचित हैं पात्र गरीब परिवार
सेमरियावां ब्लाक के मुहम्मदगढ़ का मामला
संतकबीरनगर। सेमरियावां

विकास खण्ड सेमरियावां में प्रधानमंत्री आवास योजना व आवास प्लस योजना गंवई राजनीति की शिकार होकर रह गई है। पात्र गरीब परिवार आज भी छप्पर या टिन शेड में रहने को मजबूर हैं। जानकारी तथा मांग के बाद भी संबंधित जिम्मेदार अनजान बने हुए हैं। मामले को लेकर ग्रामीणों में रोष है।
सेमरियावां ब्लाक क्षेत्र के गांवों में आवासीय योजना गंवई राजनीति की शिकार होकर रह गई है। गरीबों के सिर पर पक्की छत के इंतजाम के लिए चल रही प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए गरीब जिम्मेदारों के मोहताज बने हुए हैं। इसका लाभ उन्हें मिलने के बजाय जिम्मेदार अपने चहेतों को लाभान्वित कर रहे हैं।
क्षेत्र के ग्राम पंचायत मुहम्मदगढ़ तथा राजस्व गांव मदना और पचावां है।
जहां सैकड़ों की संख्या में परिवार के लोग निवास करते हैं। हालत यह है कि पात्र गरीब परिवार छप्पर और टिन शेड के मकानों में रहने को मजबूर हैं। किसी तरह यह लोग मेहनत मजदूरी करके अपने परिवार का भरण पोषण कर पाते हैं। रजावती पत्नी राम तौल, मीरा देवी पत्नी लालचन्द, सुन्दरी पत्नी फूलचन्द, रेहाना खातून पत्नी मु. फारूक, शबनम खातून पत्नी मु. गालिम, बैतुन्नासा पत्नी अब्दुल जब्बार, पूजा पत्नी रमेश कुमार आदि दर्जनों परिवार आज भी आवास पाने को लेकर भटकने को मजबूर हैं। तो वहीं पात्रता को दरकिनार कर जिम्मेदारों ने अपने चहेतों को आवास का लाभ दिला दिया है।

गांव में मेहनत मजदूरी ही है इनकी जमा पूंजी
गांव में करीब दो दर्जन लोग छप्पर या टिन शेड के मकान में रहते हैं। जिनके नाम आज भी पात्रता सूची में शामिल नहीं हैं। जो कि गांव या आसपास के गांवों में मेहनत मजदूरी करते हैं। बहुत मुश्किल से अपने परिवार का भरण पोषण कर पाते हैं ऐसे में आवास खुद बना पाना टेढ़ी खीर है।
कहीं वंचित न रह जाये गरीब पात्र परिवार

अधिकारी व कर्मचारी गांव में घर घर पहुंचकर सत्यापन के बजाय ब्लाक पर समीक्षा बैठक तक ही सीमित होकर रह गये हैं। यही कारण है कि पात्र गरीब परिवार आज भी सरकार की इस योजना का लाभ से वंचित है।