सूअर, मच्छर, गन्दा पानी, इंसेफेलाइटिस की रचे कहानी
– स्कूलों में बच्चों को दिलाई जा रही है शपथ, रटाए जा रहे हैं नारे
– स्वास्थ्य विभाग के साथ ही शिक्षा विभाग लगा है अभियान में
संतकबीरनगर। 30 जुलाई 2019
ब्युरो रिपोर्ट

जेई / एईएस जैसी जानलेवा बीमारियों से बचने के लिए किए गए प्रयासों के क्रम में अब स्कूली बच्चों को इंसेफेलाइटिस से बचने के लिए शपथ दिलाई जा रही है। यही नहीं इससे सम्बन्धित नारा ‘ सूअर, मच्छर, गन्दा पानी, इंसेफेलाइटिस की रचे कहानी’ जैसा नारा भी रटाया जा रहा है। ताकि बच्चों के मन मस्तिष्क पर इंसेफेलाइटिस के वाहकों और कारकों की एक स्पष्ट छवि बन जाए और इंसेफेलाइटिस का खात्मा किया जा सके। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ शिक्षा विभाग भी पूरी तन्मयता के साथ लगा हुआ है।
जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह ने बताया कि जेई / एईएस तथा संचारी रोगों से बचाव के लिए चलाए जा रहे विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान के क्रम में बच्चों के मन मष्तिस्क पर इंसेफेलाइटिस के वाहकों व कारकों की एक छवि अंकित करने के लिए नारा गढ़ा गया है। नारे बच्चों को जल्दी याद हो जाते हैं, इसलिए ऐसा किया गया है। जब बच्चे को नारा याद रहेगा तो वह सूअर और मच्छर से बचकर तो रहेगा ही, गन्दे पानी का सेवन भी नहीं करेगा। वह अन्य बच्चों को भी ऐसा न करने की हिदायत देगा। साथ ही बच्चों व शिक्षकों के लिए एक शपथ तैयार की गई है। यह शपथ बच्चों के साथ ही उनके शिक्षकों के लिए भी जरुरी है। जिले के प्रत्येक स्कूल में यह शपथ रोज प्रार्थना के बाद बच्चों को दिलाई जा रही है। साथ ही इसकी मानीटरिंग भी की जा रही है। इसके लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित भी किया गया है। प्रशिक्षित शिक्षकों के साथ ही स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी इस बात की निगरानी करते हैं, कि यह शपथ का कार्यक्रम रोज स्कूलों में होता रहे। राजकीय कन्या इण्टर कालेज की आठवीं कक्षा की छात्रा तृप्ति कहती हैं कि इंसेफेलाइटिस से बचने के लिए लगाए जा रहे नारे का काफी असर है। हम अपने गांव में बच्चों को जाकर इन चीजों से बचने की सलाह देते हैं ताकि वे इंसेफेलाइटिस से बच सकें।
स्कूलों में दिलाई जा रही है यह शपथ
मै शपथ लेता हूं कि इंसेफेलाइटिस रोग से मैं अपना एवं अपनों का हर संभव बचाव करुंगा। यह रोग मच्छर के काटने, सूअर, खुले में शौच करने एवं दूषित ( गन्दे ) जल के सेवन से होता है। मैं घर के आस – पास पानी इकट्टा नहीं होने दूंगा, मच्छरों से बचाव करुंगा, खुले में सड़क के किनारे शौच नहीं करुंगा और दूषित जल या इनसे बने खाने वाले सामानों का सेवन नहीं करुंगा। शौच के बाद एवं खाने से पहले साबुन से हाथ जरुर धोऊंगा। जे.ई. का टीका जरुर लगवाउंगा। मुझे अपने परिवार एवं देश के लिए स्वस्थ रहना है।
बच्चों को दिलाई जा रही है शपथ – विजय लक्ष्मी
जूनियर हाईस्कूल खलीलाबाद की प्रधानाध्यापिका श्रीमती विजय लक्ष्मी त्रिपाठी बताती हैं कि रोज प्रार्थना के बाद बच्चों को इंसेफेलाइटिस से बचने की शपथ दिलाई जाती है। साथ ही नारे भी लगवाए जाते हैं। यह पूरा प्रयास है कि बच्चे जागरुक हो जाएं और इंसेफेलाइटिस और एईएस जैसी बीमारियों की चपेट में न आएं।
‘‘इसके लिए एनपीआरसी स्तर पर शिक्षकों को नोडल अधिकारी बनाकर ट्रेनिंग दी गई थी। वे शिक्षक क्षेत्र के स्कूलों में बच्चों को जाकर शपथ दिलाते हैं। इसके लिए शपथ का पम्पलेट और अन्य चीजें भी संबन्धित शिक्षक को दी गई थी। वे स्कूलों में जाते हैं और बच्चों को शपथ दिलाते हैं। अब स्कूलों में प्रार्थना के समय बच्चों को यह शपथ दिलाई जा रही है। इससे बच्चों के साथ शिक्षक भी जागरुक हो रहे हैं। इसके बेहतर परिणाम भी सामने आ रहे हैं।’’
अंगद सिंह
जिला मलेरिया अधिकारी
जेई व एईएस के वर्तमान तुलनात्मक आंकड़े
1 जनवरी 2019 से 30 जुलाई 2019 – गंभीर बुखार के 774 केस सामने आए। इसमें से 678 ठीक हुए। 61 रेफर हुए, मौत एक भी नहीं,जबकि 26 ठीक होने के बाद चिकित्सक की बिना सलाह लिए ही चले गए। एईएस के 6 रोगी सामने आए, इंसेफेलाइटिस का कोई रोगी सामने नहीं आया। 1 इलाज के बाद रिकवर हुआ, 4 रेफर हुए जबकि 1 ठीक होने के बाद बिना चिकित्सकीय परामर्श के चला गया।
1 जनवरी 2018 से 30 जुलाई 2018 – गंभीर बुखार के 713 केस सामने आए। 534 ठीक हुए। 76 रेफर हुए। 9 की मौत हो गई। जबकि94 ठीक होने के बाद बिना परामर्श लिए ही चले गए। एईएस के 11 व जेई का 1 मरीज सामने आया। इसमें से 7 ठीक हुए तथा 5 रेफर हुए। मौत किसी की नहीं हुई।