लंगड़ा बनाकर छोड़ेगा ग्रामीण पेयजल योजना
अधिशासी अभियंता और ठेकेदार के फंसे पेंच मे फंसे ग्रामीण राह चलना हुआ दुश्वार…

सन्त कबीर नगर -( के के मिश्रा ) कोई इस गफलत मे न रहे कि योजनाये सुखमय होती है आज के इस दौर की कौन सी योजना काल का गाल साबित हो जायेगी कुछ कहा नही जा सकता है एक योजना अगर चलने के लिए सुव्यवस्थित मार्ग निर्माण करती है तो दूसरी योजना चलने मे दुश्वारियां पैदा करती है । बतौर उदाहरण विकास खण्ड सांथा का ग्राम पंचायत लोहरसन है जो बसपा प्रदेश सरकार मे अम्बेडकर गांव चयनित हुआ था गांव की गली व सड़के बेहतर ढंग से आर सी सी हुआ था । किसी भी ग्रामीण को आने जाने मे कोई दिक्कत कोई समस्या नही होती थी । लोग बड़े आराम से राह चला करते थे लेकिन जबसे ग्रामीण पेयजल योजना का दस्तक इस गांव मे हुआ है तबसे ग्रामीणो का राह चलना मुश्किल हो गया है पाइप लाइन के नाम पर सुदृढ़ बने आर सी सी को बीचोबीच तोड़ दिया गया । पेयजल विभाग से ठेका लेकर काम कराने वाला ठेकेदार इंदल कुमार पाइप लाइन तो बिछवा दिया । लेकिन छै महीने से अधिक का समय बीत जाने पर भी ठेकेदार द्वारा रास्ता ठीक नही किया गया । इस निसबत मे ग्रामीण से लेकर ग्राम प्रधान द्वारा कईयो बार ठेकेदार से कहा गया कि रास्ता ठीक करवा दो । लेकिन ठेकेदार द्वारा कोई तवज्जो नही दिया जा रहा है । बार – बार यह कर टाल दिया जाता है कि बजट नही है जैसे ही बजट आयेगा तैसे ही रास्ता ठीक करवा दूंगा । ग्रामीणो का कहना है कि ठेकेदार की नीयत ठीक नही है अधिक से अधिक रुपया बचाने के चक्कर मे ठीक ढ़ंग से काम नही करवा रहा है । कोई ग्रामीण का फिसलन से हाथ – पैर टूट न जाय , कोई चोट से जख्मी न हो जाय । गांव का एक जिम्मेदार शख्तियत होने के नाते अपयश के भय से ग्राम प्रधान को भी भय सताने लगा है । ग्राम प्रधान का कहना है कि पेयजल तो बहुत अच्छी योजना है इससे ग्रामीणो को स्वच्छ जल पीने को मिलेगा । लेकिन जिस तरह से ठेकेदार द्वारा काम करवाया जा रहा है लगता है ये बहुत महंगा साबित होने वाला है । गांव के रास्ते कितने अच्छे बने थे लोग बड़े आराम से आते – जाते थे लेकिन जबसे पाइप लाइन का काम शुरू हुआ तबसे लोगो का सुरक्षित आना – जाना मुश्किल हो गया है जगह – जगह कीचड़ जगह – जगह पानी रुकना शुरू हो गया है ठेकेदार से लेकर अधिशासी अभियंता से बार – बार कहने पर भी कोई तवज्जो नही दिया जा रहा है अधिशासी अभियंता विजय प्रताप सिंह तो फोन उठाना ही बन्द कर दिया है । ठेकेदार बजट का रोना रोता है ऐसे मे ग्रामीणो की सुरक्षा कैसे हो ? कैसे सुरक्षित होकर राह चले ? साइकिल मोटरसाइकल तो दूर लोगो को पैदल चलना भी दुश्वार हो गया है । बारिश का मौसम आ गया है अब तो कीचड़ तो कीचड़ जलजमाव व फिसलन भी अधिक होता है । वर्तमान का परिवेश वैसे भी घातक हो गया है पूरा देश वैश्विक महामारी कोविड 19 से जूझ रहा है जो स्वच्छता पर विशेष ध्यान दे रहे है ऐसे मे जगह – जगह जलजमाव व कीचड़ से युक्त रास्तो पर ग्रामीण कैसे चलेगे कुछ समझ मे नही आ रहा है ।
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