संसंतकबीरनगर
रिपोर्ट – एस आई सफ़ी (बख्ति़यार चिश्ती)
दावत ए इंकिलाब

मादरे इल्मी जमिया अलिमिया जमदा शाही बस्ती से हमारा जज़्बाती रिश्ता है, हम बेकार उसने हमें कार आमद बनाया, हम गुम नाम थे उसने हमें नेक नाम बनाया हम कुछ नहीं थे उसने हमें बहुत कुछ बनाया आज हम जहां हैं,जैसे हैं जिस हाल में हैं सब फै़ज़ान है मादरे इलमी का, उसके आगोशे करम में रह कर अगर जि़न्दगी के चंद साल ना गुज़ारे होते तो हलाक़ हो जाते, कहते हैं मां के कदमों तले जन्नत है,मादरे इल्मि के क़दमों तले हम सब की जन्नत भी है, इज़्ज़त भी है, शोहरत भी है, जाहो हाशमत भी है, अल्लाह इसे आबाद रखे.
आज मादरे इल्मी पर मुसीबत की घड़ी आई है, उसके सर पर ग़म के बादल छाए हैं, ऐसे में फरज़ंदाने अलीमिया पर लाजि़म है कि आगे आएं अपने दस्ते बाज़ू फैलाएं , और अपने मादरे इल्मि पर सब कुछ निछावर कर दें, औलाद की कमाई में मां बाप का भी हक़ होता है,आज मादरे इल्मी हमसे वही हक़ मांग रही है हमें मादरे इल्मि का वजूद बचाना है उसकी तालीमी रफ्तार के साथ तामीरी पेश रफ़्त को बहाल रखना है हम पर जो भी परेशानी आती है तो आए अपने मादरे इल्मि की बर्क़ रफ़्तार तरक्क़ी को सुस्त नहीं होने देंगे इन्शा अल्लाह।
इन्तेज़ामिया के सामने कई महाज़ हैं। सबसे बड़ा मसला तामीर का है। उसे हम इन्तेज़ामिया पर छोड़ दें बाक़ी आओ मिलकर हम करलें। ज़्यादा नहीं बस एक एक हज़ार की क़ुरबानी दे दें। हज़ारों से ज़्यादा फ़ारेग़ीन हैं इतने में बहुत कुछ हो जाएगा बस हिम्मत करें अपने पास से नहीं तो अपने मुतअल्लेक़ीन से इमदाद करायें। आगे बढ़ें हाथ बढ़ायें और मादरे इल्मि के लिए ईसार व फ़िदाकारी की नई तारीख़ रक़म करदें।
बहुत बर्बाद हैं लेकिन सदाए इंक़लाब आए।
वहीं से पुकार उठेगा जो ज़र्रह जहाँ होगा।
अर्ज़ गुज़ारान
*मोहम्मद निज़ामुद्दीन क़ादरी
सरपरस्त तंज़ीमे अबनाए अलीमिया *
*मुहीब अहमद क़ादरी
सदरे तंज़ीम *
कमाल अहमद अलीमी निज़ामी जनरल सेक्रेटरी
अब्दुल जब्बार अलीमी नेपाल राब्ता कार व जुमला ओहदेदारान व मेंबरान