नाशिक = “भाईचारे के बगैर जिंदगी का कोई मतलब नहीं” उक्त बातें अब्दुल्लाह खान ने कही।
उन्होंने कहा कि जिंदगी केवल जन्म और मृत्यु के बीच का सफर नहीं है। यह एक ऐसी अनुभूति है, जो रिश्तों, संवेदनाओं और आपसी जुड़ाव का गहरा अर्थ समेटे हुए है। जन्म और मृत्यु तो जीवन के दो पड़ाव हैं, लेकिन इनके बीच का हर क्षण ही जिंदगी के मर्तबे को परिभाषित करता है।
उन्होंने कहा कि अगर इस सफर में भाईचारा नहीं है, तो जीवन का सारा अर्थ अधूरा रह जाता है। इंसान चाहे कितना भी धन, पद या प्रतिष्ठा प्राप्त कर ले। लेकिन यदि उसके भीतर दूसरों के लिए अपनापन, सहानुभूति और सहयोग की भावना नहीं है, तो वह भीतर से खाली ही रहता है।
श्री खान ने कहा कि भाईचारा ही वह आधार है, जो समाज को एकता में बांधता है। यही भावना कठिन समय में सहारा बनती है और खुशियों को कई गुना बढ़ा देती है। इसके अभाव में जीवन केवल एक यांत्रिक प्रक्रिया बनकर रह जाता है, जिसमें न ऊष्मा होती है और न आत्मीयता।
उन्होंने कहा कि जिंदगी का सार यही है कि हम एक-दूसरे के लिए जिएं, एक-दूसरे के दुःख-दर्द को समझें और साथ मिलकर आगे बढ़ें। क्यों कि भाईचारे के बिना जिंदगी केवल जीने की प्रक्रिया है, जीवन नहीं।