

पीस पार्टी द्वारा जिला अघिकारी कार्यालय सन्तकबीनगर पर प्रदर्शन करते हुए महामहिम राष्ट्रपति महोदया को सम्बोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के प्रतिनिधि को दिया गया मुस्लिम अनुसूचित जाति को S/C मे शामिल करने तथा संविधान घारा 341 वापस करने की मांग किया गया
रिपोर्ट – नसीम अंसारी सन्तकबीनगर
पीस पार्टी जिला ईकाई सन्तकबीनगर के तत्वावधान मे जिलाधिकारी सन्तकबीनगर के कार्यालय पर प्रदर्शन किया गया इस अवसर पर पीस पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राशिद मदनी ने कहा कि ब्रिटिश राज में 1936 से शासनकाल के अंत तक व आजादी के बाद भी अनुसूचित जाति में सभी धर्म के लोगों को नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण दिया गया था। आजादी के बाद भारत सरकार ने 10 अगस्त 1950 के Constitutional आर्डर में अनुसूचित जाति की जातियों के आरक्षण को तो आगे बढ़ाया गया परंतु उस आर्डर में हिंदू शब्द जोड़ दिया गया जो ब्रिटिश राज में नहीं था। ये कांग्रेस द्वारा मुसलमानों के साथ की गई सबसे बड़ी संवैधानिक नाइंसाफी थी। 1956 में सिख धर्म की अनुसूचित जातियों को तथा 1990 में बौद्ध धर्म की अनुसूचित जातियो को भी SC के रिजर्वेशन में शामिल हुये
उन्होंने आगे कहा कि
जस्टिस सच्चर कमेटी का 2006 में तथा जस्टिस रंगनाथ मिश्रा कमेटी की 2007 में आई रिपोर्ट में मुस्लिमों के हालात
अनुसूचित जातियों से भी बदतर बताए गए।जस्टिस रंगनाथ मिश्रा कमेटी ने साफ-साफ कहा कि मुस्लिमो की अनुसूचित जातियों को भी SC की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। लेकिन तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व वाली भारत सरकार ने कुछ नहीं किया। भाजपा सरकार ने भी 2023 में के जी. बालकृष्णन आयोग गठित कर मुसलमानों के अनुसूचित जातियो का
मुद्दा ठंडे बस्ते में डाल दिया है। कोई भी पार्टी मुसलमानों के साथ न्याय नहीं करना चाहती। सामाजिक न्याय की बात करने वाली तमाम पार्टियां मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक समझती है। उनके हालात को लेकर उन्हें कोई फिक्र नहीं है।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राशिद मदनी
महामहिम जी से अनुरोध किया की संविधान सम्मत कार्यवाही कर मुस्लिम अनुसूचित जातियों को SC में सम्मूलित कर के आरक्षण का नाम दिलाने की महान कृपा कीजिए इस अवसर पर
- Rashtriya Mahasachiv – Afroz Badal
- Engineet Amir
- Dr Saleem
- Maghar Nagar adhyaksh – Ubaidunnabi
- Master Shamshaad
- Maroof Ahmad
- Mehdi Hasan
- Phool Chand
- Muallima Aamira Khatoon
- Muallima Naaz Fatma
- Muallima Sadiya khatoon
- Muallima Arzo Fatma
- Muallima Khushnuma आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे