– संसद को याद दिलाना होगा चीन अधिकृत भूमि मुक्त कराने का संकल्प



संतकबीरनगर 7 अक्टूबर 2023 देवों के देव महादेव का निवास स्थान कैलाश मानसरोवर जो तिब्बत में है और पिछले 64 वर्षों से चीन के कब्जे में है, उसे चीन के कब्जे से मुक्त कराने के लिए अयोध्या के राममंदिर मुक्ति आंदोलन जैसा आंदोलन करना होगा। कैलाश मानसरोवर मुक्ति के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने का समय आ गया है। अब इस आंदोलन की कमान देश का संत समाज करेगा। इसके लिए मुझसे जो बन पड़ेगा, वह सब करेंगे। जो भी निर्देश राष्ट्रीय नेतृत्व का होगा, इसके अनुसार संत समाज को एकत्रित करेंगे।
इस आशय के विचार भारत-तिब्बत समन्वय संघ के गोरक्ष प्रांत के संतकबीरनगर जनपद में होटल सोनी इंटरनेशनल में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय कोर परिषद की उत्तरार्ध बैठक में मुख्य अतिथि अयोध्या रंगमहल पीठाधीश्वर श्री श्री रामशरणदास जी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हमारा मूल उद्देश्य है कि कैलाश मानसरोवर की मुक्ति ही नही सभी भारतवासियों को निर्भय होकर निःशुल्क दर्शन करने की व्यवस्था दिलाना है। भारत-तिब्बत समन्वय संघ ने जो अभियान शुरू किया है, वह पवित्र है। इस अभियान के लिए कुछ भी करने के लिए संत समाज तत्पर है। यह मामला मैं संतों के धर्म संसद में उठाऊंगा। विशिष्ट अतिथि खलीलाबाद के पूर्व भाजपा सांसद डॉ इंद्रजीत मिश्र राष्ट्रीय प्रभारी राजनैतिक समन्वय प्रभाग, ने कहा है कि मुझे याद है जब 1962 में चीन से युद्ध शुरू हुआ तो महिलाएं अपना गहना तक दान दिया। यहां तक कि अनाज भी चीन के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए सहयोग स्वरूप दिया। तिब्बत के धर्मगुरु दलाई लामा 1959 में देश मे चीन से बचने के लिए शरण लिये थे। इसी से खार खाये चीन ने 1962 में हमला किया। तिब्बती मूल की कैलशन युडांग ने कहा कि हमारे माता पिता भारत आये थे। मेरा जन्म धर्मशाला में हुआ। जो तिब्बत में राह रहे है उनका चीन बहुत उत्पीड़न कर रहा है। चीन बच्चों का डीएनए सैम्पलिंग कर रहा है। इतना ही नही छोटे बच्चे के स्कूल में तिब्बत की भाषा पढ़ाने पर चीन ने प्रतिबंध लगा दिया है। तिब्बती भाई व बहनों को चीन की त्रासदी से मुक्ति भारत ही दिला सकताहै lहमें भरोसा है जिस तरह भारवासियों ने 200 साल की त्रासदी वाले दौर से मुक्ति पा लिया, लंबे संघर्ष के बाद। हमें भारत पर पूरा भरोसा है। बैठक के विषय का प्रवर्तन करते हुए भारत-तिब्बत समन्वय संघ के केंद्रीय संयोजक हेमेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि बौद्ध धर्म के धर्मगुरु दलाई लामा चीन के हमले से बचने के लिए भारत मे शरण लिया। इनके साथ डेढ़ लाख तिब्बती भी आये। सब सम्मान के साथ स्नेह प्रेम से हैं। इसी से खफा होकर चीन ने 1962 में भारत पर हमला किया। भारत के 4000 वर्गफीट पर आधिपत्य कर लिया है lइस भूभाग को चीन के कब्जे से मुक्त कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में यह संकल्प लिया गया कि जब तक चीन के कब्जे से एक-एक इंच जमीन को वापस न ले लें, तब तक चैन से नहीं बैठेंगे। इस संकल्प को सरकार को फिर से याद दिलाना होगा। तिब्बत की संस्कृति और सभ्यता को चीन नष्ट कर रहा है। देवों के देव महादेव भगवान शिव के मूल स्थान कैलाश मानसरोवर को चीन के कब्जे से मुक्त कराने राममंदिर जैसे आंदोलन को जनभावना तैयार करनी होगी। बैठक का संचालन राष्ट्रीय महामंत्री ( महिला विभाग) डॉ सोनी सिंह ने करते हुए भारत-तिब्बत समन्वय संघ के गठन की पृष्ठभूमि और यात्रा के सफल सोपानों से सबको परिचित कराया।
उक्त बैठक में राष्ट्रीय संयोजक श्री हेमेंद्र तोमर जी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री एन. के. सूद, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री सूरज पर्चा, राष्ट्रीय महामन्त्री अरविन्द केसरी, राष्ट्रीय महामन्त्री रामकुमार सिंह, क्षेत्रीय संयोजक अरविंद विक्रम चौधरी, श्री कांत मणि त्रिपाठी प्रांत अध्यक्ष गोरक्ष प्रांत, शिवेन्द्र सिंह महामन्त्री गोरक्ष प्रांत, प्रांत के सभी जिलाध्यक्ष और विभिन्न क्षेत्रों और देश के विभिन्न प्रांतों के पदाधिकारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करायी.
के के मिश्रा जर्नलिस्ट