संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश।

भारत के प्रसिद्ध सूफी बुजुर्ग इस्लामिक विद्वान हजरत सुफी निजामुद्दीन मुहद्दिस बस्तवी का 10 वां उर्स-ए पाक 25 नवम्बर को अगया स्थित खानकाहे निजामिया पर आयोजित होगा। आयोजन कमेटी के लोगों ने उर्स के कार्यक्रम की तैयारियां शुरु कर दिया है।
बता दें की हजरत सूफी निजामुद्दीन एक बड़े आलिम-ए-दीन और सूफी बुजुर्ग के रूप में प्रसिद्ध थे। देश के विभिन्न प्रांतों,में उनके अनुयाई बड़ी संख्या में मौजूद हैं। हर वर्ष उनका वार्षिक उर्स भव्य रूप में मनाया जाता है, जिसमें देश के विभिन्न प्रांतों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। पचीस नवम्बर सुबह में फर्ज की नमाज के बाद सूफी साहब की मजार पर कुरान खानी के साथ ही उर्स का कार्यक्रम शुरू होगा। दोपहर बाद जुमा की नमाज के बाद मजार पर चादर पोशी और गुल पोशी का सिलसिला शुरू होगा और देर शाम तक चलेगा। रात में ईशा की नमाज के बाद निजामी कॉन्फ़रन्स् का आयोजन होगा। जिसमें देश के कई बड़े इस्लामिक विद्वान प्रतिभाग करेंगे। 26 नवम्बर की सुबह में मजार पर कुल शरीफ के आयोजन के बाद उर्स का कार्यक्रम समाप्त हो जाएगा।
दरगाह हज़रत हजरत सुफी निजामुद्दीन के सज्जादानशीन के साहबजादे हजरत मौलाना जियाउल मुस्तफा निजामी ने उर्स में आने वाले सभी ज़ायरीन से अपील करते हुए कहा कि अकीदतमंद अपने साथ महिलाओं को न लाये। दरगाह पर उलेमा व अकीदतमंद की बड़ी भीड़ के मद्देनजर महिलाओं के लिये इंतेज़ाम नही हो पाते है। खानकाह-ए-निजामीया की रिवायत भी रही है कि यहाँ कभी उर्स में शिरकत करने महिलायें नही आती। साथ ही महिलाओं से भी कहा गया है वो लोग अपने- अपने घरों में ही उसे निजामी करें। घर से ही इसाले सवाब, फातिहा व दुआ करें। महिलाएं व जो लोग नहीं आ सकते है उनके लिए दरगाह की ओर से लाइव ऑनलाइन ऑडिया प्रसारण की व्यवस्था की जाती है इस साल भी यही व्यवस्था रहेगी। वह लोग घर बैठे उर्स के सभी कार्यक्रम सुन सकते है। आगे कहा कि मज़हब-ए-इस्लाम औरतो को पर्दे में रहकर घर मे ही इबादत करने का हुक्म देता है।
माैलाना जियाउल मुस्तफा निजामी ने कहा कि आला हज़रत ने औरतो को मज़ारों पर जाने और हाजरी देने से मना फरमाया।