संस्कारो के लौटे दिन !
जी एल वेदांती

सन्त कबीर नगर : – त्रिस्तरीय चुनाव के महापर्व मे संस्कारो के दिन लौट आये है समता पंथ – निरपेक्ष सहित एकता – भाईचारा अपनापन का मेला हर कूचा हर गली , नुक्कड़ पर लग गया है रास्ता चलते अभिवादन का , चाय की दुकान पर अतिथि देवो भव का भाव महंगाई को मात दे दिया है । टोला – महल्ला , घर – द्वार संस्कारो के रिश्ते बन गये है । पुरानी अदावते गंगा मे स्नान कर शिकवा – शिकायतो की दुनिया को तिलांजलि दे दिया है । लोकतंत्र के इस त्रिस्तरीय चुनावी महापर्व की आभा कृपा दृष्टि बनकर समाज को इस कदर सुशोभित कर रहा है मानो तिमिर को निगल कर सूर्य उदित हो रहा है । वह तन्हा जिन्दगी जो किसी के लिए अभिशाप नजर आ रही थी वहां मुस्कुराहट की कली खिलने लगी है यह और बात है कि चमकते दांत दिखायी नही दे रहे है पर ये क्या कम है जो मुरझाया चेहरा हंसना जान लिया है ।
बताते चले कि देश के अभी बीते परतंत्र के दौर को गुजरे कुछ ज्यादा लम्हे नही हुए थे सत्तर वर्ष के एक छोटे से बीते दौर पर बहुतायत लोग उंगली उठाना शुरू कर दिये थे । राजनीतिक विषमताओ को तुष्टीकरण का जामा पहनाते हुए उथल – पुथल का राग अलापने लगे थे । कहने लगे थे कि स्वंतंत्रता के दिन अब ज्यादा दिन रहने वाले नही है अपराध के बढ़ते ग्राफ और भ्रष्टाचार के पसरते पैर पूर्वजो द्वारा लड़ी गयी लड़ाई को खाक मे मिलने से कोई रोक नही पायेगा , तुष्टीकरण की राजनीति सब मटियामेट कर देगा ।