मेरा बिगड़ा वक़्त सम्भाल दो, मेरे ख्वाज़ा मुझको नवाज़ दो
उर्स-ए-ख्वाज़ा पर विशेष कार्यक्रम आयोजित।
बरेली, उत्तर प्रदेश

अता-ए-रसूल ख्वाज़ा मोइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी हिन्दल वली के आज 809 वे कुल शरीफ की रस्म दरगाह आला हज़रत समेत बरेली की सभी छोटी-बड़ी दरगाहों, खानकाहों, मस्जिदों व मदरसों में कोविड 19 की गाइड लाइन के अनुसार अकीदत के साथ अदा की गई । दरगाह आला हज़रत पर दरगाह प्रमुख हज़रत मौलाना सुब्हान रज़ा खान (सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती व सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रज़ा क़ादरी (अहसन मियां) की सदारत में महफ़िल का आगाज़ हुआ ।
दरगाह आला हज़रत के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि बरेली से बड़ी तादात में अकीदतमंद उर्स में शिरकत करने अजमेर शरीफ जाते थे । लेकिन इस मर्तबा कोरोना या किसी और मजबूरी की वजह से जो लोग नही पहुँच पाए वो लोग शहर की दरगाहों व खानकाहों में कुल की रस्म में शामिल हुए । आज सुबह से ही फिज़ाओं में गरीब नवाज़ की शान में मशहूर मनकबत “मेरा बिगड़ा वक़्त सम्भाल दो, मेरे ख्वाज़ा मुझको नवाज़ दो, तेरी इक निगाह की बात है, मेरी ज़िंदगी का सवाल है” गूँजने लगी ।
इसी कड़ी में दरगाह आला हज़रत पर महफ़िल का आगाज़ कारी रिज़वान रज़ा ने तिलावत ए कुरान से किया । हाजी गुलाम सुब्हानी ने मिलाद पढ़ी । मुफ्ती आकिल रज़वी व मुफ्ती सलीम नूरी ने ख्वाज़ा गरीब नवाज़ की करामत व किरदार पर रोशनी डाली । मुफ़्ती मोइनुद्दीन ने खिराज़-ए-अक़ीदत पेश की । मौलाना फैज़ रज़ा, मुफ्ती सलीम नूरी व मुफ़्ती अफरोज़ आलम ने फातिहा ने पढ़ी । मुल्क में खुशहाली व कोरोना खात्मे को लेकर मुफ्ती अहसन मियां ने खुसूसी दुआ की । आखिर में सबको तबर्रुक तकसीम किया गया ।
इस मौके पर ने मौलाना अख्तर, शाहिद नूरी, हाजी जावेद खान, अजमल नूरी, परवेज़ नूरी, सय्यद फैज़ान नूरी, नासिर कुरैशी, शान रज़ा,औरंगज़ेब नूरी, मंज़ूर खान, ताहिर अल्वी, सुहैल रज़ा, अबरार उल हक़, सय्यद जुल्फी, ज़ुबैर रज़ा खान, मास्टर कमाल, तारिक सईद, ज़ोहिब रज़ा, अश्मीर रज़ा, काशिफ रज़ा, साजिद रज़ा, इशरत नूरी, सय्यद फरहत रज़वी, साकिब रज़ा, शाद रज़ा, अदनान रज़ा, आसिफ नूरी, आलेनबी, सय्यद माजिद, गौहर खान, सय्यद एजाज़, हाजी अब्बास नूरी, नफीस खान, नईम नूरी,हाजी शारिक नूरी, शारिक बरकाती, मुजाहिद बेग, आसिम नूरी, इरशाद रज़ा,आदि लोग मौजूद रहे ।