
संतकबीरनगर। स्वर्गीय रूद्र नारायन सिंह गृहस्थ जीवन व्यतीत करते हुए भी एक संत थे ये शब्द स्वर्गीय रुद्र नारायन सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए उनके छोटे भाई स्व0 मुकुन्द नारायन सिंह के छोटे पुत्र रामशंकर सिंह ने कही। स्वर्गीय रूद्र नारायन सिंह का जन्म ख़लीलाबाद तहसील के देवरिया गंगा गांव में सन् 1898 में हुआ था। शिक्षा दीक्षा के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियों के नाते उनकी शादी 14 वर्ष की आयु में ही सन् 1912 में देवरिया जनपद के बरडीहा नामक गांव में हुआ था। परन्तु उनकी धर्म पत्नी शादी के 4 वर्ष बाद ही सन् 1916 में गोलोक वासी हो गयीं है। उक्तक्स अवधि में उनके पास कोई संतान नहीं उत्पन्न हुआ था, वे विचलित होते हुए भी अपने मन को अपने छोटे भाई मुकुन्द नारायन सिंह के बच्चों के साथ लगाकर जीवन यापन शुरू किये। शिक्षा क्षेत्र में बस्ती मण्डल के ख्याति लब्ध अध्यापक माने जाते थे, वे लालगंज में हेडमास्टर के पद पर कार्यरत थे उनके कार्यव्यवहार को देखते हुए सरकार ने एक अतिरिक्त भार वहाँ के “पोस्टमास्टर का” भी दे रखा था, उन्होंने पूरे ईमानदारी एवं कर्तव्यनिष्ठा से दोनों पदों का सकुशल संचालन करते रहे। विद्यालयी शिक्षा देने के साथ ही साथ वे बच्चों को गृहस्थ जीवन का गुरुमंत्र भी बताते रहते थे। परोपकार एवं सेवा उनमें कूट -कूट कर भरा था उनसे मिलने एवं गुरूतर शिक्षा ग्रहण करने हेतु लोग लालायित रहते थे। उनके मुख से हर स्वांस श्रीराम नाम से ही निकलता था पूरा श्री रामचरित मानस कंठस्थ था। समाज सेवा के क्षेत्र में भी उनका कोई सानी नहीं था। उस समय अन्न के संकट रहते थे हर जरूरत मन्द को वे अपने सामर्थ्य एवं आवश्यकता अनुसार अन्न दान भी किया करते थे। असहाय मजबूर एवं ईमानदार व्यक्ति की हर समय सहायता करने को तत्तपर रहते थे। इसी बीच सन् 1954 में उनके छोटे भाई मुकुन्द नारायन सिंह की मृत्यु हो गयी, वे उनके पुत्र बड़े भाई रामकिंकर सिंह एवं खुद मैं रामशंकर सिंह की परवरिस एवं शिक्षा – दीक्षा तथा गृहस्थ आश्रम की सभी आवश्यकताओं को सप्रेम पूरा करते रहते थे, और अपने पुत्र की तरह पालन पोषण करते रहे, कभी यह अहसास नहीं होने दिया कि हमारे सगे पिता नहीं हैं।
उनकी अभिलाषा थी कि उनके परिवार से कोई न कोई शिक्षा के लव को सदैव जलाये रक्खे, इसी बात को ध्यान में रखते हुए उनके छोटे भाई मुकुन्द नारायन सिंह के बड़े पुत्र रामकिंकर सिंह ने अध्यापन के क्षेत्र में कार्य शुरू किया और वे भी अपने बड़े पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए एक प्रसिद्धि प्राप्त अध्यापक रहे तथा भाई रामकिंकर सिंह ने अपने बड़े पिता स्वर्गीय रूद्र नारायन सिंह के सपनों को साकार करने के उद्देश्य से अपने घर पर ही सन् 1975 में “कृषक वैस पूर्व माध्यमिक विद्यालय देवरिया गंगा” के नाम से एक विद्यालय का नींव डाला जो आज भी गरीब बच्चों को उत्तम शिक्षा दे रहा है, तथा भाई रामकिंकर सिंह के एकलौते पुत्र संतोष कुमार सिंह भी समाज सेवा में अपना पूरा जीवन खपा रहे हैं वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी में प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर निःस्वार्थ सेवा दे रहे हैं।।
बड़े पिता स्वर्गीय रूद्र नारायन सिंह जी ने अपनी 83 वर्ष की आयु पूरा करते हुए सन् 1981 में गोलोक वासी हो गए।
अपने बड़े पिता जी के सपनों को साकार करने के उद्देश्य से मैंने अपने बच्चों को शिक्षा क्षेत्र में समर्पित करने तथा समाज सेवा को भी ध्यान में रखते हुए अपने पुत्रों में से बड़े पुत्र कृष्ण कुमार सिंह को डॉक्टर बनाया जो आज बस्ती मण्डल में होम्योपैथ के ख्यातिलब्ध डॉक्टर के रूप में जाने जाते हैं, वहीँ द्वितीय पुत्र राम कुमार सिंह जनपद के प्रसिद्ध विद्यालय हीरालाल रामनिवास इण्टर कालेज के कुशल प्रधानाचार्य के रूप में कार्य करते हुए समाज सेवा में भी अपना योगदान दे रहे हैं, वर्तमान में भारत तिब्बत समन्वय संघ में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में देश सेवा एवं शिव सेवा में अपने को समर्पित करने के साथ अन्य कई राष्ट्रीय संस्थाओं में सेवा दे रहें हैं। तृतीय पुत्र डॉ श्याम कुमार सिंह भी वर्तमान में पवित्रा डिग्री कालेज गोरखपुर में प्राचार्य के पद पर सुशोभित होकर शिक्षा क्षेत्र में सेवा दे रहे हैं।
आज उस सन्त की याद में उनके पौत्र एवं मेरे मझले पुत्र राम कुमार सिंह ने सन् 2014 में ग्राम महदेवा नानकार, पोस्ट बौरब्यास, जनपद संतकबीर नगर में वहाँ की जनता के माँग को ध्यान में रखते हुए एक अंग्रेजी माध्यम विद्यालय (रूद्र नारायन सिंह स्मृति शिक्षण संस्थान / R.N.S. Memorial Academy के नाम से पूर्ण रूप से सुसज्जित विद्यालय) का निर्माण कर एक पिछड़े इलाके के गरीब बच्चों को कम से कम शुल्क में बेहतर से बेहतर ढंग से शिक्षा देकर समाज को शिक्षित करने का वीणा उठाया है जो जनपद में एक अद्वितीय मिसाल है। भारत तिब्बत समन्वय संघ से जुड़ कर शिवमय होकर कैलाश मानसरोवर मुक्ति महा यज्ञ में समर्पित होकर अपने को धन्य करने का सौभाग्य प्राप्त करना, शिव कृपा ही है रामकुमार सिंह के पुत्र सुधांशु कुमार सिंह भी भारतीय जनता पार्टी से जुड़ कर देश सेवा में लगे हैं।
धन्य थे स्वर्गीय रूद्र नारायन सिंह जिनके पद चिन्हों पर चलकर आज पूरा परिवार शिक्षा एवं समाज सेवा से जुड़ा हुआ है।
ईश्वर ऐसे महापुरुष के रूप में हर परिवार में जन्म ले ऐसी मेरी कामना है।।
मैं अपने दादा जी स्वर्गीय रूद्र नारायण सिंह जी के चरणों में बारंबार भावभीनी श्रद्धांजलि करते हुये प्रणाम करता हूं।।
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राम शंकर सिंह
राम कुमार सिंह
ग्राम-मंझरिया गंगा, खलीलाबाद
संतकबीरनगर