
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर में 21 रमज़ान को अमीरुल मोमिनीन हजरत सैयदना अली रदियल्लाहु अन्हु के शहादत दिवस पर सामूहिक रूप से कुरआन ख्वानी व दुआ ख्वानी कर अकीदत का नजराना पेश किया गया।
मस्जिद के इमाम मौलाना महमूद रजा कादरी ने कहा कि पैग़ंबरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का फरमान है कि जिसका मैं मौला, अली भी उसके मौला। जिसका मैं आका, अली भी उसके आका। जिसका मैं रहबर, अली भी उसके रहबर। जिसका मैं मददगार, अली भी उसके मददगार। हजरत अली का बहुत बड़ा मर्तबा है। हमें भी हजरत अली के नक्शेकदम पर चलने की पूरी कोशिश करनी चाहिए तभी दुनिया व आखिरत में फायदा होगा।
मकतब इस्लामियात तुर्कमानपुर में कारी मो. अनस रज़वी ने कहा कि हजरत अली इल्म का समंदर हैं। बहादुरी में बेमिसाल हैं। आपकी इबादत, रियाजत, परहेजगारी और पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम व सहाबा किराम से मोहब्बत की मिसाल पेश करना मुश्किल है।
सुन्नी बहादुरिया जामा मस्जिद रहमतनगर में मौलाना अली अहमद ने कहा कि हजरत अली फरमाते हैं कि अल्लाह की कसम मैं कुरआन की आयतों के बारे में सबसे ज्यादा जानने वाला हूं। पैगंबरे इस्लाम ने फरमाया कि मैं इल्म का शहर हूं और अली उसके दरवाजा हैं। अब जो इल्म से फायदा उठाना चाहता है वह बाबे इल्म से दाखिल हो।