गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
तंजीम उलमा-ए-अहले सुन्नत द्वारा जारी रमज़ान हेल्प लाइन नंबरों पर सवाल-जवाब का सिलसिला जारी रहा। उलमा किराम ने क़ुरआन व हदीस की रोशनी में जवाब दिया।
- सवाल : प्रोविडेंट फंड पर जकात है या नहीं? (जफर, बड़े काजीपुर)
जवाब : हां। अगर यह रकम निसाब को पहुंच जाए तो साल बसाल जकात अदा करनी पड़ेगी। (मुफ्ती मेराज) - सवाल : रोजे की हालत में खून देना कैसा? (अब्दुल समद, तुर्कमानपुर)
जवाब : सख्त मजबूरी में जबकि जान का खतरा हो रोज़े की हालत में भी खून देना जायज है, मगर इतना खून देना जिससे कमज़ोरी महसूस हो मकरूह है। (मुफ्ती अख़्तर) - सवाल : रोजे की हालत में आंख में दवा डालना कैसा? (निशात, बुलाकीपुर)
जवाब : रोजे की हालत में आंख में दवा डालना जायज है, इससे रोजा नहीं टूटेगा, अगरचे उसका जायका हलक में महसूस हो। (मुफ्ती अजहर) - सवाल : रोजे की हालत में जख्म पर मरहम या दवा लगा सकते हैं? (नदीम, सूरजकुण्ड)
जवाब : हां। लगा सकते हैं। (कारी अनस) - सवाल : इंजेक्शन के ज़रिए खून निकाला या चढ़ाया गया तो वुजू टूट जाएगा? (मेहताब, खूनीपुर)