छात्र संघ चुनाव के लिए लिखा जाएगा 1 किलोमीटर लंबा पत्र

चूंकि भारत लोकतंत्रात्मक देश है जिसमें किसान और गांवो की अहमियत स्वतंत्रता से लेकर अब तक है। किसानी मूलक देश के लोकतंत्र की सम्पूर्ण किसानी की शुरुआत ही छात्रसंघ से होती है। जिस प्रकार बिना सिंचाई के खेती असम्भव है उसी प्रकार लोकतंत्र का अस्तित्व भी बिना छात्रसंघ के दिवास्वप्न समान ही है। परंतु वर्तमान समयकाल छात्रसंघ की अस्मिता के लिए भारत की स्वतन्त्रताकाल का सबसे प्रतिकूलता भरा समयकाल है। वर्तमान शासन सत्ताधारी लोगों को एक भय बना हुआ है छात्रसंघ से। एक अंदरूनी डर बार बार सता रहा सत्तानविशों को। छात्रसंघ के विरोध में इनके पास कोई वाजिब तर्क नही है, फिर भी छात्रसंघ के पक्ष में खड़ा होने से सभी राजनीतिक पार्टियां डरती हैं।
पर मैं अनिल दूबे अब शांत नही रह सकता लोकतंत्र के बारम्बार किये जा रहे गर्भपात को देखकर। अब कुछ रचनात्मक गतिविधि ही अपनानी पड़ेगी, क्योंकि बुद्ध गांधी के वंशज होने के नाते हम हिंसात्मक रास्ते अपना नही सकते। पर आज़ाद भगत सुभाष बिस्मिल का खून शांत बैठने भी नही दे रहा।
तो सभी युवा आँधियों ,
फिराक के शहर का युवा अब कलम को धार देकर तैयार है। जिससे निकलने वाला हर शब्द , शब्द नही बल्कि तीर होगा जो छात्रसंघ विरोधी ताकतों की एक एक मीनार को जमींदोज करने को काफी होगा।
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल व कुलाधिपति को हम लिखेंगे एक किलोमीटर लम्बा पत्र। जिसको जनवरी मध्य में गोरखपुर से लखनऊ तक छात्रसंघ , लोकतंत्र की जरूरत रैली आयोजित कर माननीया कुलाधिपति महोदया को दिया जाएगा।।