डॉ0 अत्रेश सिंह को 10 लाख रुपए का यूजीसी स्टार्टअप ग्राण्ट
– खलीलाबाद के बंजरिया मुहल्ले के रहने वाले हैं डॉ अत्रेश
– गोरखपुर यूनिवर्सिटी में बतौर असिस्टेण्ट प्रोफेसर हैं तैनात
संतकबीरनगर 19 अक्टूबर 2019
जितेन्द्र चौधरी

विश्व विद्यालय अनुदान आयोग ने खलीलाबाद के बंजरिया निवासी डॉ अत्रेश कुमार सिंह को शोध कार्य के लिए 10 लाख रुपए का स्टार्टअप ग्राण्ट दिया है। इसके जरिए वे आयरन – थर्ड के शिफ बेस पर शोध कार्य करेंगे।
डॉ अत्रेश सिंह खलीलाबाद के बंजरिया मुहल्ले में रहते हैं। उन्होने स्थानीय एचआरपीजी कालेज के रसायन विज्ञान विभाग में 14 सालों तक अध्यापन का कार्य किया और विभागाध्यक्ष भी रहे। पिछले साल उनका चयन दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर में असिस्टेण्ट प्रोफेसर के तौर पर हुआ है। वहां पर अध्यापन कार्य करते हुए उन्होने यूजीसी को एक रिसर्च प्रोजेक्ट ‘‘ सेंथेसिस, रिएक्टिविटी, स्ट्रक्चरल कैरेक्टराइजेशन एण्ड कैटेलिटिक एक्टिविटी ऑफ शिफ बेस कॉम्पलेक्सेस ऑफ आयरन (।।।) ’’ भेजा था। उक्त शोध कार्य में आयरन (।।।) के शिफ बेस कॉम्प्लेक्स का संश्लेषण करने के साथ ही उसका संरचनात्मक सूत्र निकाला जाएगा। साथ ही इसके क्रिएटिविटी का भी अध्ययन किया जाएगा। यही नहीं उत्प्रेरक के रुप में इनके भूमिकाओं का अध्ययन भी किया जाएगा। यूजीसी को भेजे गए डॉ अत्रेश के प्रोजेक्ट का वहां की टीम ने गहनता से निरीक्षण करते हुए इसका कार्य शुरु करने के लिए 10 लाख रुपए का स्टार्टअप ग्राण्ट स्वीकृत किया है। एचआरपीजी कालेज में अध्यापन कार्य के दौरान डॉ सिंह ने मिक्स्ड बैलेन्स आयरन के शिफ बेस काम्पलेक्सेस पर आधारित दो शोधपत्रों का प्रकाशन अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर हुआ था। जिसके लिए उन्हें एचआरपीजी कालेज में शिक्षक दिवस पर सम्मानित भी किया गया था ।
मानव जीवन के लिए महत्वपूर्ण है शोध – डॉ सिंह
डॉ अत्रेश सिंह ने बताया कि आयरन के शिफ बेस काम्पलेक्सेस का मानव जीवन के लिए एण्टीवैक्टीरियल , एण्टीफंगल, एनिलिटिकल एक्टिविटी आदि के रुप में बहुत ही महत्व है। इससे प्रभावित होकर आयरन (।।।) के शिफ बेस काम्लेक्सेस पर अपना शोध प्रस्ताव यूजीसी को भेजा था। यह शोध कार्य अध्यापन और शोध के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा।
फोटो –
डॉ अत्रेश कुमार सिंह, असिस्टेण्ट प्रोफेसर
मोबाइल नं – 9450573366