विकास कार्य की समीक्षा के रुप मे उड़ाया जा रहा है मजाक
संतकबीरनगर
के के मिश्रा / हरीश सिंह
संतकबीरनगर:- शासन के कल्याणकारी योजनाओ से सम्बन्धित विकास कार्यो की शासन के निर्देशन मे स्थलीय निरीक्षण पारदर्शिता , सहभागिता एवं जवाबदेही को सम्मिलित करते हुए सोशल आडिट का नाम लेकर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विकास खण्ड वार ग्राम पंचायतो का सोशल आडिट का नाम देते हुए जांच करवा रही है । इसी क्रम मे मेहदावल विकास खण्ड के अंतर्गत ग्राम पंचायतो मे जांच टीमो द्वारा जांच की जा रही है लेकिन यह दुर्भाग्य ही है कि लोककल्याणकारी योजनाओ के धन का दुरूपयोग ग्राम प्रधानो द्वारा खुलेआम किया जा रहा है ।
बताते चले कि ग्राम पंचायत भरवलिया पाण्डेय , भरवलिया चौबे , भटौली मे किया गया । जहां ग्राम पंचायत मे सोशल आडिट टीम स्थलीय सत्यापन कम अपनी समेत टीमो का जेब भरने का काम किया गया । ग्राम पंचायत भरवलिया पाण्डेय मे चार सौ मनरेगा मजदूर है जहां पर अड़तालीस लाख रुपये का काम दिखाया गया है ॥ मजदूरो के खातो मे मजदूरी आज तक नही पहुंची , सूत्रो के मुताबिक ग्राम प्रधान ब्लाक प्रधान संघ के अध्यक्ष है व स्थानीय लोकप्रिय विधायक राकेश सिंह के चहेते है । बजट की कमी नही है काम होगा नही , होगा भी तो मजदूरो को मजदूरी मिलना नही है । क्यो कि प्रधान जी बड़े रसूखदार है ऐसी सूरत मे आडिट मे इनका रहना कोई जरूरी नही है । यही हाल भरवलिया चौबे का है जहां के प्रधान मेरठ मे यात्रा करते नजर आये , रोजगार सेवक द्वारा बताया गया मेरे यहां तीन लाख बाइस हजार का पोखरे की खुदाई का काम कराया गया है दो सौ पचहत्तर मनरेगा जाब कार्ड है जिनमे पचास प्रतिशत लोगो के खाते मे मजदूरी जाते पाया गया । मौके पर जाब कार्ड रजिस्टर सहित कोई भी अभिलेख मौके पर पाया नही गया । लिहाजा समाज के सभी वर्गो को भारत सरकार / राज्य सरकार की योजनाओ के क्रियान्वयन मे पारदर्शिता , जन सहभागिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा उठाये गये महत्वपूर्ण कदम का सकारात्मक रुप देखने मे नही आ रहा है ।
ऐसे मे यह सवाल उठता है कि सरकार से लेकर जिला प्रशासन की देखरेख मे जब इस प्रकार खुलेआम आंखो मे धूल झोकते हुए सोशल आडिट की भ्रष्टाचार मुक्त की धज्जिया उड़ायी जा रही है तो ग्राम पंचायतो मे विकास कार्य और प्रदेश से भ्रष्टाचार कैसे खत्म होगा ।